Reaching Underneath Our Protective Shell

Author
Pema Chodron
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Image of the Weekअपने सुरक्षा कवच के नीचे पहुंचना
- पेमा चोडरन​ ​(४ नवंबर, २०१३)


महायान शिक्षाओं में एक कथन है, "सारे दोष अपनी ओऱ ढकेल लो ।" इस वाक्य का सार है, "जब बहुत दर्द हो तो वो इसलिए है क्योंकि मैंने इतना कस कर पकड़ रखा है।" यह ये नहीं कह रहा कि हम हर बात पर अपने को दोषी ठहराएं। हर चीज़ पर अपनी जान देने को तैयार हो जाएं। इसका मतलब यह है कि दर्द का अहसास तभी होता है जब हम यह सोचते हैं कि चीज़ें हमारी इच्छा के अनुसार हों, तो दर्द उन्हें कस कर पकड़ने की वजह से होता है, और जब हम अपने आपको बेचैन पाते हैं, जब हम खुद को किसी अवांछित स्थिति या जगह पर पाते हैं, तो हमें एक ही रास्ता नज़र आता है, वो है किसी को दोषी ठहरा देना।

हम आदतन दोष नामक एक अवरोधक खड़ा कर लेते हैं, जो हमें दूसरों के साथ असली बात-चीत करने के रास्ते में बाधा डालता है, और हम अपने ऐसे विचारों से कि कौन सही है और कौन गलत, इस अवरोधक को और मज़बूत बनाते हैं। हम ऐसा उन लोगों के साथ करते हैं जो हमारे सबसे नज़दीक होते हैं, और हम ऐसा राजनीतिक व्यवस्थाओं के साथ करते हैं, उन सब चीज़ों के साथ जो हमें अपने सहकर्मियों के बारे में और हमारे समाज के बारे में पसंद नहीं हैं। यह बेहतर महसूस करने का काफी आम, प्राचीन, और अचूक तरीका है। किसी और को दोषी ठहरा दो। दूसरों पर दोष लगाना अपने हृदय की ​रक्षा​ करने का अच्छा तरीका है, अपने अंदर जो कोमल, साफ़ दिखाए देने वाला, और कमज़ोर है, उसे बचाने की कोशिश। उस दर्द को अपनाने की बजाए, हम उससे छुटकारा पाने की कोशिश करते हैं।

यह कथन एक ऐसा उपयोगी और दिलचस्प सुझाव है जिससे आप अपने अंदर बैठी उन पुरानी व्यवहारिक प्रवृत्तियों में बदलाव ला सकते हैं, जो हमें सोचने पर मज़बूर करती हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो। शुरूआत के लिए सबसे पहले जब भी आपको किसी को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति का अहसास हो, आप अपने अंदर झाँक कर देखने की कोशिश करें कि अपने आप को इतना कस कर पकड़ के रखने से कैसा महसूस होता है। दूसरे को दोषी ठहराने से कैसा महसूस होता है।? कुछ अस्वीकार करने से क्या महसूस होता है? नफरत करने से क्या महसूस होता है? अपने क्रोध को उचित समझने से क्या महसूस होता है?

हम सब में बहुत सी कोमलता मौज़ूद है, बहुत बड़ा मन। हमें शुरआत करनी होगी उस कोमल स्थान को छू कर। संवेदना का यही अर्थ है । जब हम कुछ समय के लिए दूसरों को दोष देना छोड़ कर खुद को अपने कोमल हृदय को छूने का मौका देते हैं, तो ऐसा लगता है कि हम उस गहरे घाव तक पहुँच गए हैं जो दोष लगाने से बने बाहरी कवच के नीचे स्थित है (…)

संवेदनशील कार्य तब शुरू होता है जब आप अपने आप को सही और गलत मानना शुरू कर देते हैं। उस समय आप इस बात पर विचार कर सकते हैं कि इन दोनों ही चीज़ों से बेहतर एक और रास्ता है, अधिक नाज़ुक, अस्थिर किस्म की अवस्था जिसमें आप जी सकते हैं।

अगर आप इस स्थान को छू पाएं, तो यह आपको पूरी ज़िंदगी आप जो भी महसूस करते हैं उसे खुल कर महसूस करने और अधिक बंद रहने की बजाए और अधिक खुल कर अहसास करने के लिए ट्रेन करेगा। आप पाएंगे कि जैसे-जैसे आप खुद को इस प्रक्रिया में लगाएंगे, जैसे-जैसे आप अपने ज़िंदगी के उन हिस्सों को प्रोत्साहित करेंगे जिन्हें पहले आप असम्भव समझते थे, आप में कुछ बद्लाव होने लगेगा। आपके अंदर कुछ हमेशा के लिए बदल जाएगा। आपकी पुरानी आदतें ढीली पड़ने लगेंगी और आप उन लोगों के चेहरे देखने लगेंगे और उनके शब्द सुन सकेंगे, जो आपसे बात कर रहे हैं।

आप जो कुछ भी किसी तरह के दयाभाव से महसूस करते हैं, अगर आप को उसका अहसास होने लगे तो आपका बाहरी सुरक्षा कवच पिघल जाएगा और आपको लगेगा कि आपकी ज़िंदगी के अधिक हिस्से ऐसे हैं जिनके साथ काम करना मुमकिन है। जैसे-जैसे हम अपने लिए कम्पैशन रखना सीखेंगे, औरों के लिए कम्पैशन का दायरा - आप किस चीज़ और किस व्यक्ति के साथ और कैसे काम करते हैं - भी बढ़ जाएगा।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: खुद के उन हिस्सों को प्रोत्साहित करना जो आपके लिए पहले नामुमकिन था, इससे आप क्या समझते हैं? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बांटना चाहेंगे जो ऐसे किसी अनुभव को दर्शाता हो? हम अपनी भावनाओं के साथ दया भाव से कैसे कनेक्ट कर सकते हैं?


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