The Committee of the Mind

Author
Thanissaro Bhikku
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Image of the Weekमन की कमेटी

आपके मन में "आप" के बारे में कई विचार हैं, हर विचार का अपना ही प्लान है. ये सब "आप" मन की कमेटी के सदस्य हैं. इसीलिए मन सिर्फ एक मन की तरह कम, और बेलगाम लोगों की भीड़ की तरह ज्यादा है: बहुत सी अलग-अलग आवाजें, और बहुत से अलग-अलग विचार कि आपको क्या करना चाहिए। कमेटी के कुछ सदस्य अपनी मूल इच्छाओं के पीछे छिपी धारणाओं के बारे में स्पष्ट और ईमानदार हैं. अन्य सदस्य अस्पष्ट और कुटिल हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हर सदस्य एक नेता की तरह है, जो अपने ही समर्थकों और योजनाओं से अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं.

ध्यान करने का एक उद्देश्य है इस लेन-देन को ठीक से देख पाना, ताकि आप इस कमेटी में कुछ व्यवस्था ला सकें - ताकि आपकी खुश रहने की इच्छाएँ एक दूसरे से टकराव कम करें और जैसे-जैसे आप इस बात को समझें कि इन इच्छाओं को एक-दूसरे का विरोध करने की ज़रुरत नहीं है, वे एक-दूसरे से अधिक तालमेल में रह पाएं। इन इच्छाओं को एक कमेटी की तरह मानने से हमें यह समझने में भी मदद मिलती है कि जब हमारा ध्यान का अभ्यास हमारी कुछ इच्छों के विरुद्ध जाता है, तो वो हमारी सभी इच्छों के विरुद्ध नहीं जाता। आपको भूखा नहीं मारा जा रहा. जो इच्छाएँ ध्यान के माध्यम से दबती जा रही हैं आपको उनके साथ अपनी पहचान बनाने की ज़रुरत नहीं है, क्योंकि आपके पास अभी भी कुछ और बेहतर इच्छाएँ हैं जिनके साथ आप अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं. चुनाव आपको करना है. आप कमेटी के निपुण सदस्यों को कमेटी के कम समझदार सदस्यों को ट्रेन करने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि वे आपकी असल खुशी की खोज करने के प्रयास को रोकने में असफल हो जाएँ। हमेशा याद रहे कि असल खुशी पाना संभव है, और उस खुशी को ढूंढ पाने में मन खुद को ट्रेन कर सकता है.

मन के कई पहलु होते हैं, जो कि कमेटी के सदस्यों के आपस के झगड़े और उनके खुशी पाने के क्षणिक प्रकारों से मोह होने के कारण, ज़्यादातर छुप जाते हैं. उनमें से एक पहलु बिलकुल स्वाभाविक है. दूसरे शब्दों में, वो किसी भी स्थिति पर निर्भर नहीं है. वह समय या स्थान पर निर्भर नहीं होता। वह एक सम्पूर्ण, शुद्ध स्वतंत्रता और खुशी का अनुभव है. ऐसा इसलिए है क्योंकि वह भूख और खिलाने की ज़रुरत से मुक्त है. पर जबकि यह पहलु स्वाभाविक है, फिर भी इस पहलु पर मन के हालात को बदल कर पहुंचा जा सकता है: कमेटी के बेहतर सदस्यों को बढ़ावा देकर ताकि आपके चुनाव आपको असली खुशी प्राप्त करने में ज्यादा से ज्यादा मदद कर सकें।

आप इस स्वाभाविक पहलु को इस तरह देख सकते हैं जैसे खारे नमकीन पानी में ताज़ा पानी. आम मन खारे पानी की तरह होता है, जिसे पीने से आप बीमार हो जाते हैं. अगर आप उस खारे पानी को कुछ देर के लिए रखा रहने दें, तो ताज़ा पानी अपने आप उसमें से अलग नहीं हो जाएगा। आपको उसे अलग करने का प्रयत्न करना पड़ेगा। नमक के नीचे बैठ जाने पर, ऊपर का पानी अलग करने की प्रक्रिया ताज़ा पानी नहीं बनाती है. वो तो जो ताज़ा पानी वहां पहले से ही मौजूद था, उसे सिर्फ बाहर निकालती है, और आपकी प्यास बुझानी की ज़रुरत को पूरा करती है.


--टानिसरो भिक्कू


विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप अपने मन के स्वाभाविक पहलू से क्या समझते हैं? अपने मन के स्वाभाविक पहलु को अलग करने के कौन से तरीके आपके काम आये हैं? क्या आप अपना कोई निजी अनुभव सबसे बांटना चाहेंगे जहाँ आप अपने मन के स्वाभाविक पहलु तक पहुँचने में सफल हुए?


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