The Day I Learned The Value of a Smile

Author
Maya Angelou
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Image of the Weekजिस दिन मैंने मुस्कुराहट का असली अर्थ सीखा
--माया एंजेलो द्वारा लिखित (२ मार्च, २०१६)

मैं दुनिया को कैसे देखती हूँ और उसमें अपनी जगह को कैसे पहचानती हूँ, उसपर मेरी दादी, जिन्होनें मुझे पाला-पोसा, उनका एक उल्लेखनीय प्रभाव है। वे गरिमा की तस्वीर थी। वे मंद स्वर में बोलतीं और कमर के पीछे, हाथों की अँगुलियों को एक-दूसरे में बांधे, हौले-हौले चलतीं। मैं उनकी इतनी अच्छी नकल करती कि पड़ोस में सभी मुझे उनकी छाया बुलाते थे।

"बहन हेंडरसन, हम देख रहे हैं कि तुम्हारी छाया फिर तुम्हारे साथ है।”

दादी मेरी और देखतीं और मुस्कुरातीं। "खैर, आप ठीक कह रहे हैं। अगर मैं रुकती हूँ, तो यह रुकती है। अगर मैं चलती हूँ, तो यह चलती है।”

जब मैं तेरह बरस की थी, मेरी दादी मुझे मेरी माँ के पास कैलिफोर्निया छोड़ने के लिए ले गयीं, और फिर तुरंत आरकैन्सा वापिस लौट गयीं। कैलिफोर्निया वाला घर आरकैन्सा वाले छोटे से घर, जिसमें मैं बड़ी हुई थी, उससे बहुत अलग था। मेरी माँ के सीधे बाल बड़े आधुकिक ढंग से एकदम छोटे कटे हुए थे। मेरी दादी औरतों के बालों को गर्म प्रेस से सीधे बनाने में विशवास नहीं रखती थीं, इसलिए मैं आम चोटियों के साथ बड़ी हुई थी। खबरें, धार्मिक संगीत, गैंग बस्टर्स और लोन रेंजर को सुनने के लिए दादी हमारे रेडियो को बजाती थीं। कैलिफोर्निया में मेरी माँ लिपस्टिक और लाली लगाती थीं और रिकॉर्ड प्लेयर पर ज़ोर से ब्लूज़ और जैज संगीत बजाती थीं। उनका घर ऐसे लोगों से भरा हुआ था जो बहुत हँसते थे और ऊँचे स्वर में बात करते थे। मैं निश्चित रूप से अपने को उस घर का हिस्सा महसूस नहीं करती थी। मैं कमर के पीछे हाथ बांधे, मेरे बाल कसी छोटी में बंधे, एक ईसाई गीत गुनगुनाती हुई उस सांसारिक वातावरण में घूमती रहती।

मेरी माँ लगभग दो सप्ताह तक मुझे देखती रहीं। फिर हमने “ बैठकर बात-चीत की”, जो बाद में एक आम बात हो गयी।

उन्होंने कहा, "माया, तुम मुझे पसंद नहीं करतीं क्योंकि मैं तुम्हारी दादी जैसी नहीं हूँ। यह सच है। मैं उन जैसी नहीं हूं। लेकिन मैं तुम्हारी माँ हूँ और मैं तुम्हारे लिए अच्छे कपड़े खरीदने के लिए और तुम्हें अच्छा बना हुआ खाना देने के लिए और तुम्हारे सिर पर यह छत बरकरार रखने के लिए मेहनत कर रही हूँ। जब तुम स्कूल जाओगी, तुम्हारे अध्यापक तुम्हें देखकर मुस्कुराएंगे और तुम वापिस मुस्कुराओगी। अन्य छात्र जिन्हें तुम जानती भी नहीं, मुस्कुराएंगे और तुम भी मुस्कुरओगी। लेकिन दूसरी ओर, मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुमसे क्या करवाना चाहती हूँ। अगर तुम अजनबियों के लिए अपने चेहरे पर एक मुस्कान ला सकती हो, तो यह मेरे लिए भी करो। मैं तुमसे वादा करता हूँ कि तुम किसी दिन इस बात को समझोगी।"

उन्होंने मेरे गाल पर अपना हाथ रखा और मुकुरायीं. “इधर आओ बच्चे, अपनी माँ के लिए मुस्कुराओ. चलो।”

उन्होंने एक मज़ाकिया शक्ल बनाई और अपनी इच्छा के विरुद्ध, मैं मुस्कुरा दी। उन्होंने मुझे होठों पर चूमा और रोने लगीं।

“यह पहली बार है जब मैंने तुम्हें मुस्कुराते हुए देखा है। यह बहुत प्यारी मुस्कान है, माँ की सुंदर बेटी मुस्कुरा सकती है।”

मुझे कभी किसी ने सुंदर नहीं कहा था और मेरी याद में मुझे कभी किसी ने बेटी भी नहीं पुकारा था।

उस दिन, मैंने सीखा है कि मैं सिर्फ किसी और व्यक्ति के जीवन में एक मुस्कान लाने से ही एक दानी बन सकती हूँ। आगामी वर्षों ने मुझे सिखाया है कि एक कोमल शब्द, किसी को अपना समर्थन दे पाना, एक धर्मार्थ उपहार है। मैं परे हो सकती हूँ और किसी और के लिए रास्ता बना सकती हूँ। अगर किसी को पसंद हो तो मैं अपने संगीत को ऊंचा बजा सकती हूँ, नापसंद हो तो नीचा बजा सकती हूँ।

मैं शायद कभी एक लोकोपकारी के रूप में न जानी जाऊँ, लेकिन मैं निश्चित रूप से मानव जाति को प्यार करती हूँ, और मैं अपने संसाधनों का स्वतंत्र रूप से औरों को दूँगी।

मैं अपने आप को धर्मार्थी बतला कर खुश हूँ।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस बात से क्या समझते हैं कि हम किसी और के जीवन में केवल एक मुस्कान लाकर, एक दानी बन सकते हैं? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बांटना चाहेंगे जब आप किसी और के जीवन में मुस्कुराहट ला पाये हों? ऎसी कैंसी साधना है जो आपको खुले तौर पर अपने संसाधनों को बांटने में मदद करती है?

यह लेख माया एंजेलो द्वारा लिखित, “मेरी बेटी को लिखा पत्र” का अंश है।
 

Excerpted from Letter to my Daughter by Maya Angelou.


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