Medicine for the Earth

Author
Sandra Ingerman
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पृथ्वी के लिए दवा
-- सैंड्रा इंगरमैन (४ जनवरी, २०१७)

सभी आध्यात्मिक परंपराओं में यह सिखाया जाता है कि वो सब जो भौतिक दुनिया में प्रकट होता है वो आत्मा के अदृश्य क्षेत्र में शुरू होता है।

हमें याद रखना चाहिए कि एक बच्चा गर्भ में बड़ा होता है। पेड़ और पौधे एक बीज से शुरू होते हैं जो कि मिट्टी में पनपता है और फिर जड़ें, शाखाएं, पत्तियां, कलियों, फल, और फूलों में बढ़ जाता है। सृजन हमारे माध्यम से होता है।

हम अक्सर उम्मीद करते हैं कि परिवर्तन बस जादू से अपने आप हो जाए, बिना किसी भीतरी काम के किए जो बाहरी परिवर्तन को लाने के लिए ज़रूरी है। हम चाहते हैं कि विज्ञान जादुई तरीके से हमारे समय की सभी बीमारियों के लिए "एक दवा" बना दे। लेकिन असली परिवर्तन जिन्हें हम ढूंढ रहे हैं वो भीतर से आने चाहिऐं । हमें अपने दैनिक जीवन में आध्यात्मिक साधनाओं को सम्मिलित करने की और उन्हें जीने की ज़रूरत है।

हमने चेतना के अंधेरे स्थानों पर काम करने और उन्हें स्वर्ण प्रकाश में बदलने में सक्षम होने की जरूरत है। रस-विद्या का सही अर्थ यही है। और फिर हमारी बाहरी दुनिया वापिस हमारी प्रकाश की स्थिति को प्रतिबिंबित करेगी।
हमें याद रखना चाहिए कि हम सिर्फ आकृति और पदार्थ नहीं हैं। हम प्रकाशमान प्राणी हैं। और हमारा काम प्रकाश को फैलाना है।

अभी हम में से कई लोग अपरीक्षित विचार, व्यवहार, और भावनाओं के साथ घूमते हैं। हम एक भय से भरा जीवन जीते हैं और यह नफरत और युद्ध की स्थितियों को उत्पन्न करता है। हमारा मानना ​​है कि संसाधनों की कमी है और हम जो बना सकते हैं वो सीमित है। हम कैसे एक अलगाव की स्थिति में जीते हैं यह उसका एक प्रतिबिंब है।

सबसे बड़ी शिक्षा है, "हम जो बन जाते हैं वो दुनिया में परिवर्तन लाता है और जो हम करते हैं, वो नहीं।" हमारा वो हिस्सा जो “बन” रहा है उसमें यह याद रखना शामिल है कि हम आध्यात्मिक प्राणी हैं जिनका काम प्रकाश को फैलाना और बेशर्त प्यार को प्रवाहित करना है। हम यहां प्रेम की शक्ति के बारे में जानने और प्यार से रचना करने के लिए आये हैं। जो हिस्सा हम “कर” रहे हैं उसमें हम इस पृथ्वी पर किस तरह सचेत प्राणियों के रूप में चलते हैं, वो शामिल है। हमें हर क्रिया, विचार, और शब्द के प्रति जागरूक होना चाहिए। क्योंकि एक बार फिर, हमारी बाहरी दुनिया हमारे भीतर की स्थिति का एक प्रतिबिंब है।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस धारणा से क्या समझते हैं कि जिन सच्चे परिवर्तनों को हम ढूंढ रहे हैं वो हमारे अंदर से आने चाहिएं ? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आप जो बनते जा रहे थे उससे आपने अपनी दुनिया में परिवर्तन आता अनुभव किया हो? आपको काम करते हुए अपने अस्तित्व की ओर जागरूक होने में किस चीज़ से मदद मिलती है?

सैंड्रा इंगरमैन द्वारा लिखित “आध्यात्मिक पर्यावरण: पृथ्वी की पुकार” के अध्याय, “पृथ्वी के लिए दवा”, के कुछ अंश।
 

Excerpted from Spiritual Ecology: The Cry of the Earth, chapter Medicine for the Earth by Sandra Ingerman.


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