Reengineeing Our Patterns

Author
Eknath Easwaran
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Image of the Weekअपने तरीकों की पुनर्रचना करना
-- एकनाथ ईस्वरन (१२ अक्टूबर, २०१६)

जब मैं किसी को सलाह देता हूँ कि वो थोड़ा ठहर जाएं, तो वे अक्सर एक वैध सवाल उठाते हैं : “मुझे इतना कुछ करना है; मैं यह सब हौले-हौले से कैसे करूँ और सारा काम ख़त्म भी हो जाए? "मैं आमतौर पर उन्हें भारत में अपने एक शिक्षक के रूप में हुए अनुभव के बारे में बताते हुए जवाब देता हूँ। एक बड़े विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष के रूप में मुझ पर बहुत भारी जिम्मेदारियां थीं। लेकिन मैं खुद को हर काम को हौले-हौले और बिना तनाव के करने का अभ्यास कराना चाहता था क्योंकि मुझे मालूम था कि यह मुझे आध्यात्मिक पथ में मदद करेगा।

मैंने कैंपस पर जिन-जिन गतिविधियों में मैं व्यस्त था, उन सब की एक सूची बनाने से शुरूआत की, वो काम जिन्हें करने की उम्मीद मुझसे थी और वो काम जो मुझे करने पसंद थे। पता चला कि एक बहुत लंबी सूची बन गयी। जो बात आज लोग मुझे कह रहे हैं, मैंने भी उस समय वही कहा: यह नहीं हो सकता कि मैं धीरे-धीरे काम करूं और इन सभी महत्वपूर्ण कामों की निपटा सकूँ।

फिर मुझे अपनी आध्यात्मिक शिक्षक, मेरी दादी, की याद आयी, जिनपर हमारे एक सौ से अधिक सदस्यों के विस्तारित परिवार और गाँव के लोगों की बड़ी जिम्मेदारियां थीं। उनहोंने उन सब जिम्मेदारियों को हमेशा बहुत निभाया, और मुझे याद आया कि उनमें इस चीज़ की एक अमोघ भावना थी कि क्या काम महत्त्वपूर्ण था और क्या ज़रूरी नहीं था। तो उनके उदाहरण का उपयोग करते हुए, मैंने अपनी सूची में से उन गतिविधियों को हटाना शुरू कर दिया जो एकदम ज़रूरी नहीं थीं।

जिस तरह से मैंने उल्लेख किया है अपने तरीकों की पुनर्रचना करना आसान या पीड़ारहित नहीं होगा। इसके लिए एक लंबे समय के लिए लगातार प्रयास करने की आवश्यकता होगी। लेकिन उसके लाभ शानदार होते हैं और हम उन्हें उसी दिन से प्राप्त करना शुरू कर देते हैं जिस दिन से हम यह बदलाव लाने की कोशिश करते हैं।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप लेखक की इस बात से क्या समझते हैं कि कैसे ठीक कामों का चुनाव करने से उन्हें आध्यात्मिक पथ पर चलने में मदद मिली? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जहां आपने अपने खुद के तरीकों की पनर्रचना होते देखी हो? आपको अनावश्यक कामों को छोड़कर आवश्यक कामों पर ध्यान देने के लिए किस चीज़ से मदद मिलती है?

एकनाथ ईस्वरन की एक पुस्तक, “ध्यान” का एक अंश।
 

An excerpt from ‘Meditation’ , a book by Eknath Easwaran.


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