That Friend Walking Behind Me

Author
Parker Palmer
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Image of the Weekवो दोस्त जो मेरे पीछे चल रहा है
-- पार्कर पामर द्वारा लिखित (१५ जून, २०१६)

कल्पना कीजिए कि कई वर्षों से एक दोस्त, मुझसे एक ब्लॉक पीछे चल रहा था, मेरा नाम पुकार रहा था, मेरा ध्यान पाने के लिए क्योंकि वह मुझे मेरे बारे में कुछ कठिन लेकिन घाव भरने वाले सत्य बताने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मैंने - मैं क्या सुनूंगा, इस बात के डर से, या अहंकार के कारण होने वाले विशवास से कि मुझे कुछ जानने की ज़रूरत नहीं है - उसकी पुकार को नजरअंदाज कर दिया और चलता रहा।

तो मेरा दोस्त और करीब आया और उसने मेरा नाम और ज़ोर से पुकारा, लेकिन मैं पीछे न देखने की ज़िद्द में, चलता रहा। फ़िर वह और पास आया, अब चिल्ला कर मेरा नाम पुकारने लगा। मेरी प्रतिक्रिया के आभाव में, उसने मेरे ऊपर पत्थर फेंकना और मुझे लाठियों से मारना शुरू कर दिया, अभी भी मेरा ध्यान पाने से ज़्यादा कुछ और न चाहते हुए। लेकिन दर्द महसूस होने के बावजूद, मैं चलता रहा।

क्योंकि उसके पुकारने, चिल्लाने, लाठियों और पत्थरों का मेरा ध्यान आकर्षित में कोई फायदा नहीं हुआ, तो अब मेरे दोस्त के पास केवल एक ही चीज़ करनी रह गयी थी: निराशा का बंब मुझपर छोड़ देना। उसने ऐसा मुझे मारने के इरादे से नहीं किया था, बल्कि सिर्फ मुझे अपनी ओर घूम जाने के और यह सीधा सा सवाल पूछने के एक आखिरी प्रयास के कारण किया: “ तुम क्या चाहते हो?” जब मैंने अंत में उस ओर मुड़ कर देखा - और जो आत्म-ज्ञान वो मुझे देने का इंतज़ार कर रहा था, उसे स्वीकार करना और उसपर आचरण करना शुरू किया - तो मैंने सुख की राह पर पहला कदम रखा।

थॉमस मर्टन ने उस दोस्त का नाम "सच्ची आत्मा” रखा है। यह वो अहंकार नहीं है जो हमको फुलाना चाहता है। यह वो बौद्धिक आत्म नहीं है जो तार्किक लेकिन बेबुनियाद विचारों के साथ जीवन की गंदगी के ऊपर मंडराना चाहता है। यह नैतिक आत्म नहीं है जो किसी और के “उचित व्यवहार” के आधार पर जीना चाहता है। यह वो आध्यात्मिक आत्म नहीं है जो "पृथ्वी के कठोर बन्धन” से छूटना और स्वर्ग में लगातार उड़ान भरना चाहता है।

सच्चा रूप वो रूप है जिसके साथ हम पृथ्वी पर आये थे, वो रूप जो बस यह चाहता है कि हम वो बनें जो हम बनने के लिए पैदा हुए थे। सच्चा रूप हमें बताता है कि हम कौन हैं, हम जीवन के पारिस्थिति तंत्र में कहां बीजे गए हैं, हमारे लिए “ठीक काम” कैसा लगता है, और हम अपने स्वयं की क्षमता में और अधिक तरह से कैसे विकसित हो सकते हैं। जैसे एक पुरानी कथा हमें याद दिलवाती है, हमारा ध्येय अपने सच्चे आत्म के आकार में रहना है, किसी और के जीवन के आकार में नहीं: "मरने से पहले, यहूदी धर्मगुरु ज़ुस्या ने कहा था: 'आने वाली दुनिया मुझसे यह नहीं पूछेगी, ‘तुम मूसा क्यों नहीं हो?' वे मुझसे पूछेंगे, ‘आप ज़ुस्या क्यों नहीं थे? ''

अपने आप को नोट: जमीन पर रहो, मुड़कर देखो,पूछो और सुनो! सच्ची आत्मा ही सच्चा दोस्त है -- यह वो दोस्ती है जिसे हम अपने जोखिम पर नज़रअंदाज़ करते हैं। और सबसे कह दो: मित्र एक-दूसरे को ऊंचाई पर नहीं रहने देते!

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: “'सच्ची आत्मा” से आप क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँटना चाहेंगे जब आपने अपने ”दोस्त” की उपस्थिति को महसूस किया हो? ऐसा क्या है जो आपको ऊंचाई से नीचे उतरने और अपने 'दोस्त' के साथ जुड़ने में मदद करता है?

पार्कर पामर एक लेखक, वक्ता और ऐक्टिविस्ट हैं जो शिक्षा, समाज, नेतृत्व, आध्यात्मिकता और सामाजिक परिवर्तन के मुद्दों पर केंद्रित है। वे “अपने जीवन को बोलने दो” के लेखक हैं। ऊपरी अंश उनके लेख, नीचे रहना सुख की राह है, से उद्धृत है।
 

Parker Palmer is a writer, speaker and activist who focuses on issues in education, community, leadership, spirituality and social change. He is the author of Let Your Life Speak. The above excerpt is from his article, Down is the Way to Well Being.


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