Not Minding What Happens

Author
Eckhart Tolle
28 words, 35K views, 23 comments

Image of the Week
जो होता है उसकी फ़िक्र न करना

-- एकार्ट टोली (११ जून, २०१५)

महान भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक शिक्षक, श्री जि. कृष्णमूर्ति पचास से अधिक वर्षों के लिए दुनिया भर में घूमे और शब्दों के माध्यम से, जो कि खुद में विषय हैं, उन चीज़ों के बारे में वो कहने का प्रयास किया जो शब्दों और विषयों से पर हैं। अपने जीवन के आखिरी हिस्से में उन्होंने अपने एक भाषण में अपने श्रोताओं को यह कह कर चकित कर दिया कि, "क्या आप मेरा रहस्य जानना चाहते हैं?" हर कोई बहुत सतर्क हो गया। श्रोताओं में से कुछ तो बीस या तीस साल से उन्हें सुनने के लिए आ रहे थे और अभी भी उनके उपदेश का सार समझने में विफल थे। अंत में, इतने वर्षों के बाद, गुरु उन्हें सब समझने की कुंजी देंगे। "यह मेरा रहस्य है," उन्होंने कहा। "जो भी होता है उससे मुझे फर्क नही पड़ता ।"

उन्होंने इसके बारे में और कुछ नहीं समझाया, और मुझे लगता है कि उनके अधिकतर श्रोता पहले से भी ज़्यादा उलझन में पड़ गए। लेकिन इस सरल वाक्य का अर्थ बहुत ही गहरा है।

जब जो हो रहा है मैं उसके बारे में चिंता नहीं करता, इसका क्या तात्पर्य है? इसका अर्थ है कि जो भी होता है, आंतरिक रूप से मैं उससे सहमत हूँ। “जो होना है,” निस्संदेह, इस पल की सहजता को दर्शाता है, कि यह पल हमेशा पहले से ही वैसा है जैसा उसे होना चाहिए। यह इस बात को दर्शाता है कि यह पल, जो अपने आप जैसा एक ही पल है, यह क्या विषय और रूप लेता है। “जो है,” उससे एकमत होकर रहने का अर्थ है, जो हो रहा है, उससे आंतरिक रूप से कोई विरोध न होना। उसे मन ही मन अच्छा या बुरा नाम न दिया जाए, बल्कि वो जैसे है उसे बस वैसे ही रहने दिया जाए। क्या इसका अर्थ यह है कि आप अब अपने जीवन में परिवर्तन लाने के लिए कुछ कुछ नहीं कर सकते? इसके विपरीत, जब आपके कामों का आधार इस पल के साथ एकमतता हो जाती है, तो आपके काम अपने आप जीवन के ज्ञान से सशक्त हो जाते हैं।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: “जो हो रहा है उसकी फ़िक्र न करें” से आप क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँटना चाहेंगे जब आप जो उस पल में हो रहा था उससे आंतरिक सामंजस्य का अनुभव कर सकें हों। ऐसी कौनसी साधना है जो आपको वर्तमान क्षण के साथ एक आंतरिक एकमतता का विकास करने में मदद करती है?

एकार्ट टोली की पुस्तक में "एक नई पृथ्वी" से
 

Ekchart Tolle in his book, "A New Earth." 


Add Your Reflection

23 Past Reflections