क्यों व्यस्तता वास्तव में आधुनिक आलस्य है
- रसमस होउगार्ड और जैकलीन कार्टर (२० मार्च, २०१९)
क्रिया व्यसन आलस्य का एक उन्नत प्रकार है। यह हमें कार्यों के साथ व्यस्त रखता है। जितना व्यस्त हम खुद को रखते हैं, उतना ही हम जीवन और मृत्यु के सवालों से जूझने से बचते रहते हैं। जैसे हम अपने आप को कार्यों में लगाए रखते हैं, वो महत्वपूर्ण हों या नहीं, हम जीवन का सामना करने से बचते हैं। हम उन मुद्दों से एक सुरक्षित और आरामदायक दूरी रखते हैं, जिनका सामना करना कभी-कभी मुश्किल होता है। क्या हमने सही करियर चुना है? क्या हम अपने बच्चों के साथ पूरी तरह मौजूद हैं? क्या हमारा जीवन उद्देश्यपूर्ण है?
अपनी सभी गतिविधियों से हमारा मानना है कि हम किसी बड़ी चीज के करीब पहुंचते हैं। हम शायद नहीं जानते कि यह क्या है, लेकिन हम इस पर काम करते रहते हैं। यह एक सीढ़ी पर जितना तेज़ हम चढ़ सकें उतना तेज़ चढ़ने जैसा है, इस आशा में कि हम सबसे ऊपर पहुंच जाएं। और एक दिन हम वहाँ पहुँचते हैं। हम नौकरी में पदोन्नति या नए अधिग्रहित घर के रूप में ऊपर पहुंच जाते हैं। लेकिन सीढ़ी के टॉप पर पहुंचने का क्या फायदा है, केवल ऊपर पहुंच कर यह एहसास करने के लिए कि सीढ़ी गलत दीवार के साथ लगी हुई थी।
एक समय, दलाई लामा शहर में आ रहे थे। उन्हें देखने के लिए 10,000 से अधिक लोग एक साथ इकट्ठे हो रहे थे। 500 से अधिक स्वयंसेवकों, दर्जनों सुरक्षा सम्बंधित लोगों और पत्रकारों के जनसमूह को समन्वित किया जाना था। इस सबके पीछे करीब ७० वर्षीय, एक नाटे इन्सान, लाखा थे जो दलाई लामा के एक पुराने दोस्त और अध्ययन सखा थे। जब मैंने उनसे पूछा, " लाखा, क्या आप व्यस्त हैं?" वो मेरी ओर मुड़े, मुझे शांति से देखा और कहा, "बहुत सारी गतिविधि है, लेकिन मैं व्यस्त नहीं हूं।" उनकी उपस्थिति उनके शब्दों की तुलना में अधिक ज़ोर से बोली। लाखा कई सामयिक सीमाओं और विवरणों के साथ एक विशाल परियोजना की देखरेख कर रहे थे । बहुत कुछ चल रहा था, लेकिन वह उनपर हावी नहीं हो रहा था। वे व्यस्त नहीं थे।
उस दिन मुझे स्पष्ट महसूस हुआ कि व्यस्तता एक विकल्प है। हमारे पास समय सीमाएं, परियोजनाएं और गतिविधियां हो सकती हैं, लेकिन हमारे पास यह चुनने की स्वतंत्रता है कि क्या हम क्रिया व्यसित और व्यस्त-आलसी हो जाते हैं, या बस कई गतिविधियों के अनुभव का निरीक्षण करते हैं। यह एक विकल्प है। और उस विकल्प को बनाने की क्षमता एक स्पष्ट दिमाग विकसित करने से आती है, जो कार्रवाई की लत से मुक्त हो।
आजकल हम सभी व्यस्त रहते हैं, अति ग्रस्त और शायद तनाव में हैं। यह हमारी पहचान का हिस्सा है। अगर हम व्यस्त हैं तो हम महत्वपूर्ण हैं। यदि हम तनावग्रस्त हैं, तो यह इसलिए है क्योंकि हम प्रतिबद्ध हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह हमारे आधुनिक समाजों के डीएनए में है। यदि हम व्यस्त और तनावग्रस्त नहीं हैं, तो हम पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं। हमारे साथ कुछ गड़बड़ है। लेकिन लाखा ने एक स्पष्ट विकल्प दिखाया; कई गतिविधियां होना और अत्यधिक प्रभावी और उत्पादक होना, लेकिन मानसिक स्पष्टता और शांति बनाए रखना - कार्रवाई की लत के आगे घुटने न टेक देना । अस्तित्वगत रूप से आलसी न होना।
प्रतिबिंब के लिए मूल प्रश्न: अस्तित्वगत रूप से आलसी होने से आप क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आप आलस्य के बारे गहराई से जागरूक हुए हों? ऐसा क्या है जो आपको "व्यस्त" हुए बिना किसी गतिविधि में रहने में मदद करता है ?
रैसमस होउगार्ड “संभावित परियोजना”(Potential Project) के संस्थापक हैं, जैकलिन कार्टर वन सेकंड अहेड की लेखिका हैं। उपरोक्त अंश माइंडफुल पत्रिका के एक लेख से लिया गया है।
Rasmus Hougaard is the founder of the
Potential Project, Jacqueline Carter is the author of
One Second Ahead. Excerpt above is from an
article in Mindful magazine.
Seed Questions for Reflection
What does being existentially lazy mean to you? Can you share a personal experience of a time you became acutely aware of this laziness? What helps you be in activity without being "busy"?