The Salt Doll

Author
Ramakrishna Paramhansa
28 words, 5K views, 11 comments

Image of the Weekनमक की गुडिया, द्वारा राम कृष्णा परमहंस

एक नमक की गुडिया ने सैकड़ों मील जमीन पर यात्रा की , जब तक कि वो समुन्द्र तक नहीं पहुँच गई|

वो इस चलनशील ,विशाल , व्यापक समूह को देख कर अचम्भित रह गई: ऐसा , इसके पहले उसने ऐसा कभी देखा नहीं था|

“आप कौन हो ? “उस नमक की गुडिया ने समुन्द्र से पुछा|

समुन्द्र ने मुस्कुराते हुए कहा “ अंदर आकर स्वयं ही देख लो”|

और , वो गुडिया समुन्द्र में उतरती चली गई|

जैसे जैसे वो गुडिया समुन्द्र में उतरती गई, वैसे वैसे वो विघटित होती चली गई, और उसका सिर्फ एक छोटा सा प्रारूप ही बच गया|

अपना पूरा प्रारूप विघटित होने से ठीक पहले उसने विस्मय पूर्ण भाव से चिल्ला कर कहा “ अब मुझे पता चल गया मैं कौन हूं”|

मनन के लिए मूल प्रश्न : आत्म बोध ( self- realisation) आपके लिए क्या मायने रखता है? क्या आप एक ऐसा अनुभव साझा कर सकते हैं, जब आपको अपने असली स्वरुप की झलक मिली हो ? अपने असली स्वरुप की महासागर जैसी विशालता को जानने और नमक की गुड़िया जैसे अस्तित्व के विघटन के अनुभवों में आप कैसे सामंजस्य बिठाते हैं ?
 

Original parable by Ramakrishna Paramhansa, about a salt doll who wanted to measure the depth of the ocean. Edited above by Anthony De Mello.


Add Your Reflection

11 Past Reflections