What We Need Is Here


Image of the Weekजो हमें चाहिए वो यहीं है
-- वेंडेल बेरी द्वारा लिखित (२३ मार्च, २०१६)

रविवार की सुबह घुड़सवार,
कटी फसल के पार, हम ख़ुरमा
और जंगली अंगूर चखते हैं, गर्मियों के
अंत की तेज़ मिठास। समय की भूलभुलैया में,
पतझड़ के मैदानों में, हम उन नामों को
पढ़ते हैं जो कब्रों पर लिखें हैं। हम ख़ुरमा
का एक बीज खोल कर
उसमें एक वृक्ष को पाते हैं,
एक सम्भावना की तरह,
उस पीलेपन में, बीज के भीतर।
कुछ कलहंस बहुत ऊंचाई पर हमारे ऊपर उड़ते,
गुज़र जाते हैं, और आकाश बंद हो जाता है। बेफिक्री,
जैसे प्यार या नींद में होती है, उन्हें
अपनी राह पर रखती है, प्राचीन
विश्वास में स्पष्ट: जो हमें चाहिए
वो यहीं है। और हम प्रार्थना करते हैं,
नई पृथ्वी या नए स्वर्ग के लिए नही,
बल्कि अपने हृदय में शांति और
अपनी आँखों में स्पष्टता के लिए।
जो हमें चाहिए वो यहीं है।

यह कविता "कुछ जंगली कलहंस", वेंडेल बेरी की चयनित कविताओं में से है।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस ज्ञान से क्या समझते है, “जो हमें चाहिए वो यहीं है?” क्या आप अपने जीवन के किसी समय की कोई कहानी बांटना चाहेंगे जब जो आपके सामने था उससे आप अपनी असल सच्चाई के संपर्क में आ सके हों? अपने सामने की गहरी सच्चाई को देखने के लिए आप अपनी नज़र को कैसे विकसित कर सकते हैं?






 

The poem "Wild Geese", From Selected Poems of Wendell Berry.


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