हमारे जीवन को हाँ कहना
मीराबाई स्टार द्वारा
जीवन भर, मैं उन लोगों की दीवानी रही हूँ जो ईश्वर के प्रेम में सराबोर रहते हैं। वे दुर्लभ आत्माएं जो परमानंद की अवस्था में खो जाती हैं और स्वतः ही कविताएँ बोलने लगती हैं। वे जो गहरी स्थिरता ले आते हैं, समभाव को धारण करते हैं, और बोलने से ज्यादा सुनना पसंद करते हैं। वे जो दीक्षित और प्रतिष्ठित हैं, वे संन्यासी...। मैं उन्हीं में से एक बनना चाहती थी। जब तक कि मेरी यह चाहत खत्म नहीं हो गई।
मैं चाहती हूँ कि आप भी उस दिखावे की चाहत छोड़ दें...। मैं चाहती हूँ कि आप बस वही बनें जो आप असल में हैं: एक ऐसा इंसान जो इस छोटे से जीवन को पूरी सादगी और grace (अनुग्रह,ईश्वरीय कृपा के भाव) से जिए। जिसके दिल में करुणा हो,sense of humour (विनोद-भाव), मन में कुछ नया सीखने की तड़प हो और यह स्वीकार भाव हो कि उसे सब कुछ नहीं पता। बस, जीवन के प्रति श्रद्धा हो
आपको हिमालय के किसी मंदिर में बैठकर रात-रात भर मंत्र जपने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपको 'मैरी मैग्डलीन' का कोई नया अवतार बनने की भी ज़रूरत नहीं है। बड़ी-बड़ी आध्यात्मिक किताबें पढ़ना या लिखना कोई ज़रूरी काम नहीं है। आपसे यह भी नहीं कहा जा रहा कि आप बौद्ध धर्म के अलग-अलग पंथों (महायान और थेरवाद) के बीच का अंतर जानें, या धर्मग्रंथों की अच्छी बातों को रटें। अगर आप एक सूफ़ी इंसान की तरह ईश्वर की राह पर चलना चाहते हैं, तो बस अपनी आँखों में विस्मय (अचंभे) का भाव जगाएँ और अपनी ज़िंदगी की राह पर निकल पड़ें।
बस चलते रहिये। थक जाएँ तो आराम करें, और फिर से चल पड़ें। गिरें, तो फिर से खड़े हों और आगे बढ़ें। अपने आस-पास के नज़ारों पर ध्यान दें। देखें कि कैसे चीजें बदल रही हैं और कैसे कुछ चीजें वैसी ही बनी रहती हैं। जीवन में मिलने वाले अचानक तोहफों (सरप्राइज) के लिए तैयार रहें और जैसे मौसम बदलते हैं, वैसे ही आप भी खुद को बदलें। अपने शरीर का आदर करें, अपने मन को मज़बूत बनाएँ, और चाहे कैसी भी मुश्किल आए, अपने हृदय को हमेशा खुला रखें।
जो जैसा है, उसे 'हाँ' कहें—भले ही वह आपको बेचैन करे, शर्मिंदा करे या आपका दिल तोड़ दे। अपनी मुट्ठी भर 'हाँ' को पेड़ों की ऊँचाइयों की ओर उछाल दें, और फिर अपना चेहरा ऊपर उठाएं। जैसे 'हाँ' की वह बारिश अपनी कृपा आपके ऊपर और आपके चारों ओर बरसाती है, उसे महसूस करें, जब तक कि वह आपके भीतर गहराई में न उतर जाए।
मनन के लिए मूल प्रश्न,
1-आप इस विचार को कैसे समझते हैं कि “एक सच्चा इंसान” होना—जीवन को grace (ईश्वरीय कृपा),करुणा,sense of humour (विनोद-भाव), जिज्ञासा और इस विनम्र स्वीकार के साथ जीना है कि हमारे पास हर उत्तर नहीं होता, और फिर भी जीवन के प्रति श्रद्धा बनाए रखना है?
2- आप अपने जीवन का कोई ऐसा अनुभव साझा कर सकते हैं, जब आपने किसी कठिन या अनिश्चित क्षण में इसी सरलता, साहस और खुलेपन के साथ स्वयं को उपस्थित पाया हो?
3-असहजता या दिल टूटने के क्षणों में भी, आपकी दृष्टि में विस्मय और आपके हृदय को खुला बनाए रखने में क्या सहायक होता है?
Mirabai Starr is a contemporary translator of sacred literature, speaker, and teacher of contemplative practice and inter-spiritual dialog.
Seed Questions for Reflection
What do you make of the notion that being a "true human person" involves showing up for life with grace, kindness, a sense of humor, curiosity and a willingness to not have all the answers, with reverence for life? Can you share a personal story that reflects a moment in your life when you showed up in this way? What helps you cultivate a gaze of wonder and keep your heart open, even in the face of discomfort or heartbreak?