अहंकार के सात चरण
- रुमी द्वारा, जैसा कि एलीफ़ शफाक ने लिखा (१८ अप्रैल, २०१८)
पहला चरण भ्रष्ट अहंकार (नफ्स) है, जो सबसे ज्यादा आदिम और सामान्य अवस्था है, जब आत्मा संसार की गतिविधियों में फंसी होती है। अधिकांश मनुष्य वहीं फंसे रहते हैं, अपने अहंकार की सेवा में संघर्ष कर रहे हैं और पीड़ित हैं, लेकिन हमेशा निरंतर रहने वाले दुःख के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। यदि और जब एक व्यक्ति को अहंकार की इस तिरस्कृत स्थिति के बारे में पता चल जाता है, तो खुद पर काम करना शुरू कर के, वह अगले चरण में जा सकता है, जो एक तरह से पिछले चरण के विपरीत है। अन्य लोगों को हर समय दोष देने के बजाय, जो व्यक्ति इस स्तर पर पहुंच चुका है, वह खुद को दोषी मानता है, कभी-कभी तो खुद को मिटा देने की हद तक।
यहाँ अहंकार दोष लगाने वाला नफ्स बन जाता है और इस प्रकार आंतरिक शुद्धि की यात्रा शुरू होती है।
तीसरे चरण में, व्यक्ति अधिक परिपक्व हो जाता है और अहंकार प्रेरित नफ़्ज़ में विकसित हो जाता है। यह केवल इस स्तर पर होता है, और कभी भी इससे पहले नहीं, कि कोई व्यक्ति "आत्मसमर्पण" शब्द का सही अर्थ अनुभव कर सकता है और ज्ञान की घाटी में घूम सकता है। जो भी इतनी दूर तक पहुंच गया, वह व्यक्ति धैर्य, दृढ़ता, बुद्धि और विनम्रता से युक्त होगा और इनका प्रदर्शन करेगा। दुनिया नई और प्रेरणा से भरपूर महसूस होगी। फिर भी, जो लोग तीसरे स्तर पर पहुंच जाते हैं, उनमें से कई लोग यहीं रहने की इच्छा महसूस करते हैं, आगे बढ़ने के लिए इच्छा और साहस खो देते हैं। यही कारण है कि, भले ही यह कितना ही सुंदर और धन्य है, फिर भी तीसरा चरण उस व्यक्ति के लिए एक जाल है जो उच्च लक्ष्य रखता है।
जो लोग और आगे बढ़ पाते हैं, वे बुद्धि की घाटी तक पहुंच जाते हैं और स्थिर नफ्स को जान पाते हैं। यहां अहंकार वो नहीं है जो पहले था, वह एक उच्च स्तर की चेतना में परिवर्तित हो गया है। उदारता, कृतज्ञता, और जीवन की कठिनाइयों की परवाह किए बिना संतोष की अविश्वसनीय भावना ही वो मुख्य विशेषताएं हैं जो उस व्यक्ति के साथ रहती हैं जो यहां पहुँच जाता है।
इसके बाद आती है एकता की घाटी। जो लोग यहां मौजूद हैं, वो उसी अवस्था में खुश रहेंगे जिसमें भगवान उन्हें रखता है। साधारण बातों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्होंने आनंदित नफ़्ज़ को हासिल कर लिया है।
अगले चरण में आते हैं, सुखदायक नफ्स, इंसान मानवता के लिए एक लालटेन बन जाता है, जो हर किसी की ओर ऊर्जा बिखेरता है, एक सच्चे गुरु की तरह सिखाता और रोशन करता है। कभी-कभी ऐसे व्यक्ति के पास चिकित्सा की शक्तियां भी हो सकती हैं। जहाँ भी वह जाता है, वह अन्य लोगों के जीवन में एक बड़ा असर डालेगा। वह जो कुछ भी करता है और करने की इच्छा करता है, उसका मुख्य लक्ष्य दूसरों की सेवा के माध्यम से ईश्वर की सेवा करना है।
अंत में, सातवें चरण में, इंसान शुद्ध नफ़्ज़ पा लेता है और इंसान- ए - कामिल, एक आदर्श इंसान बन जाता है। लेकिन कोई भी उस अवस्था के बारे में बहुत कुछ नहीं जानता, और अगर कुछ लोग जानते भी हैं, तो वे इसके बारे में बात नहीं करेंगे।
राह में आने वाले चरणों को आसानी से संक्षेप में समझाया जा सकता है, पर उन्हें अनुभव करना कठिन है। रास्ते में आने वाली बाधाओं के साथ ही यह तथ्य है कि निरंतर प्रगति की कोई गारंटी नहीं है। पहले से अंतिम चरण तक का मार्ग किसी भी तरह से सीधा नहीं है। पहले के चरणों में वापस गिर जाने का ख़तरा हमेशा बना रहता है, कभी-कभी एक बेहतर स्तर से एकदम पहले स्तर पर। रास्ते में कई फंदों को देखते हुए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि हर शताब्दी में कुछ ही लोग अंतिम चरण तक पहुंच पाते हैं।
विचार के लिए मूल प्रश्न: आप अहंकार (नफ्स) के सात चरणों से क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आपको इस बात का अहसास हुआ हो कि आप किस चरण से गुजर रहे थे? जिस चरण का आप अनुभव कर रहे हैं, उस चरण के बारे में जागरूक रहने और अपने विकास की यात्रा को सँभालने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है?
एलीफ़ शफाक के प्यार के चालीस नियम से लिया गया।
Excerpted from Elif Shafak's Forty Rules of Love.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the seven stages of the self (Nafs)? Can you share a personal story of a time you became aware of which stage you were passing through? What helps you remain aware of the stage you are experiencing and support your own journey of evolution?