To Know Your Mind, Pay Close Attention To It


Image of the Weekअपने मन को जानने के लिए उस पर ध्यान दीजिये
सैम हर्रिस

कुछ दुर्लभ और आश्चर्यजनक अनुभव संभव हैं। पर इस के लिए हमें सिर्फ एक चीज़ चाहिए, " आध्यात्मिकता " ( स्वयं - अतिक्रमण की इस परियोजना का अपरिहार्य पारिभाषिक शब्द ) को गंभीरता से लेना। [...]

हम अपना जीवन विचारों में खोये हुए बिता देते हैं। वह अनुभूति जिसे हम " मैं " कहते हैं - शरीर में विषय की अनुभूति - यह हम बिना जाने के क्या सोच रहे हैं सोचने जैसा है। जैसे ही हम विचारों की दुनिया से बहार आते हैं हमें पता चलेगा के दो विचारों के बीच चेतना क्या है - अगले विचार के उठने से पहले। और चेतना अपने जैसी नहीं लगाती। वह " मैं " जैसी भी नहीं लगती। वास्तव में, स्व की भावना चेतना में एक और अनुभव मात्र है ( इस के आलावा आप उसे कैसे महसूस करते ? ). [...]

मै कहता हूँ के आध्यात्मिकता किसी आस्था की मान्यता जो हमारे अनुभव के बहार है पर नहीं निर्भर होनी चाहिए। और वह जागृत होती है उसी ईमानदार खोज से जो विज्ञान को भी प्रेरित करती है।

चेतना का अस्तित्वा है ( भौतिक दुनिया से उसका चाहे जो भी सम्बन्ध हो ), और वह जांचे गए और बिना-जांचे गए जीवन का अनुभवपूर्ण आधार है। अगर इस क्षण आप चेतना को उसी के ऊपर लगाएं तो आप देखेंगे के आप का मन विचारों में खो जाता है। अगर आप स्वयं विचारों को नज़दीक से देखें तो आप देखेंगे के वो निरंतर उठते हैं और विलीन हो जाते हैं। अगर आप इन विचारों के विचारक को ढूंढेगे तो आप को कोई नहीं मिलेगा। और आप को लगेगा के - " हर्रिस क्या बेतुकी बात कर रहा है ? मैं हूँ विचारक !"-यह केवल चेतना में उठता हुआ एक और विचार मात्र है।

अगर आप इसी तरह लगातार चेतना को उसे ऊपर लगते रहेंगे तो आप दखेंगे के स्व के अनुभव वाला भाव गायब हो जाता है। इस अन्वेषण के बारे में कुछ भी [ धार्मिक या विशेष रूप से ] बुद्ध धर्म से सम्बंधित नहीं है, और किसी बात पर पर्याप्त प्रमाण के अभाव में विशवास न करें। व्यक्ति को केवल मात्र यह आधार स्वीकार करना है - अगर आप जानना चाहते हैं के वास्तव में आप का मन कैसा है तो आप को उस पर गहरा ध्यान देना पड़ेगा।

मनन के लिए प्रश्न :
स्व का भाव चेतना में एक और अनुभव है - इस विचार को आप कैसे समझते हैं ?
क्या आप एक निजी कहानी बाँट सकते हैं जब आप को चेतना स्व जैसी नहीं अनुभव हुई ?
चेतना को उसी के ऊपर लगाने में आपको क्या मदद करता है ?


यह लेख न्यू-यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित सैम हर्रिस के साक्षात्कार से उद्धृत है। सैम हर्रिस अमेरिकन लेखक, दार्शनिक और न्यूरोसाइंटिस्ट हैं।
 

Excerpted from a NY Times interview with Sam Harris, an American author, philosopher and neuroscientist.


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