पृथ्वी को छूना
- ट्रेसी कोचरन द्वारा लिखित (१९ अप्रैल, २०१७)
बुद्ध की यात्रा की महान कथा में, एक समय ऐसा आता है जब वे पूरी तरह से अभिभूत हैं। जैसे वो बोधी वृक्ष के नीचे ध्यान में बैठे हैं, शैतान मारा उन्हें अपने गहरे सार की इच्छा से विचलित करने के लिए प्रलोभन भेजता है। मारा एक महान नेता, एक बहुत सफ़ल व्यापारी, जिसके पास बेअंत पूँजी है, जो सुंदर महिलाओं द्वारा घिरा हुआ है, उन रूपों में बुद्ध की छवियों को दर्शाता है। वह वो बुद्ध दिखाता है जो भारत को फिर से महान बना सकते हैं, अगर वे जागृत होने की अपनी इच्छा को छोड़ दें, और उठें और कुछ करें। बुद्ध बिलकुल नहीं हिलेंगे।
जब प्रलोभन काम नहीं करता है, मारा भय दिखाता है, भयानक सेनाओं के रूप दिखाता है, जो उनके रक्त के लिए चिंघाड़ रही हैं। ये सेनाएं बाहरी हैं और आंतरिक भी हैं, चिन्ताओं और भय के दल। लेकिन बुद्ध पीछे नहीं हटते। धीरे से वो आगे बढ़े और उन्होंने पृथ्वी को छुआ। इसकी परम्परिक व्याख्या यह है कि वे पृथ्वी को कई जीवन कालों के अपने प्रयासों की साक्षी बनने के लिए कह रहे हैं। उनकी चौंधिया देने वाली चमक या उनकी अनूठी प्रतिभा की नहीं, आप ध्यान दें, लेकिन उनके प्रयास की, उनकी दृढ़ता की, चाहे कुछ भी हो जाए उनकी बार-बार वहां आते रहने की ततपरता की । उनकी बार-बार असफल होने की स्वेच्छा की । "कभी कोशिश की। कभी असफल हुए,” बेकेट लिखते हैं। "चाहे कुछ हो जाए। पुनः प्रयास करो । पुन: असफल होओ । पुनः बेहतर तरीके से असफल होओ ।" बुद्ध ने समझ लिया था जो कि ईसाई लेखक जी.के. चेस्टरटन का मतलब था, जब उन्होंने लिखा था, "जो कुछ भी करने लायक है, वह बुरी तरह से करने लायक है।"
धरती को छूना विनम्रता का प्रतीक होता है, अपने विचारों से बाहर आ कर, अहंकार के व्यस्त छत्ते से बाहर निकल कर, शेष जीवन में शामिल होने के लिए। लैटिन शब्द ह्यूमस, उपजाऊ जीवित मिट्टी, विनम्रता (humility) शब्द से संबंधित है। जब कठिनाई उठती है, तो वह आदत की नीरस मोहावस्था में एक खाली स्थान बनाती है। हमें याद आता है कि जो वास्तव में मायने रखता है वो चिंताओं और इच्छाओं की सूची नहीं है, जिसे सोचने पर हम प्रत्येक दिन में इतना समय बिताते हैं। जो मायने रखता है वो बहुत अधिक ज़रूरी है। उदाहरण के लिए, जीवित होना। जीवन में हिस्सा लेना, सबसे मौलिक तरीकों से देने और प्राप्त करने का मौका पाना, दुनिया की सुंदरता को ग्रहण करना और जहाँ हम दे सकते हैं, वहां वापिस देना।
ऐसे क्षणों में जब ज़मीन हमारे पैरों के नीचे से खिसक जाती है, तो पृथ्वी को छूने की ताकत को याद रखना अच्छा है, अपने दौड़ते विचारों और भय से वर्तमान क्षण के बारे में जागरूकता पर उतरना अच्छा है। जब शब्द विफल हो जाते हैं, तो हम कभी-कभी एक नई आवाज़ और एक नए प्रकार के निश्चय की खोज कर सकते हैं। हम पेड़ों की तरह जड़ जमाकर खड़े हो सकते हैं।
विचार के लिए मूल प्रश्न: धरती को छूने से आप क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आपने धरती को छूना अनुभव किया हो? जब ज़मीन आपके पैरों के नीचे से खिसक जाती है, तब आपको अपनी जड़ें जमाए रखने में किस चीज़ से मदद मिलती है?
ट्रेसी कोचरन पैराबोला पत्रिका की संपादकीय निर्देशक हैं। उन्होंने दशकों से ध्यान का अभ्यास किया है, और न्यू यॉर्क इनसाइट मेडिटेशन सेंटर में एक शिक्षक हैं और टेर्रिटाइन इनसाइट, वेस्टचेस्टर, न्यू यॉर्क में एक साप्ताहिक ध्यान समूह की संस्थापिका हैं। यह लेख उनके संकल्प पर लिखे जाने वाले ब्लॉग से उद्धृत है।
Tracy Cochran is editorial director of
Parabola magazine. She has practiced meditation for decades, and is a teacher at the New York Insight Meditation Center and the founder of Tarrytown Insight, a weekly meditation group in Westchester, New York. The reading above was excerpted from
her blog on determination.
Seed Questions for Reflection
What does touching the earth mean to you? Can you share a personal story of a time you experienced touching the earth? What helps you remember to be rooted when the ground gives way beneath your feet?