​Perspective


Image of the Weekपरिप्रेक्ष्य
- हारून जेहाह(३ अक्टूबर, २०१८)

एक गरीब आदमी अपनी पत्नी और छः बच्चों के साथ एक बहुत ही छोटे कमरे में रहता था। वे हमेशा एक-दूसरे के रास्ते में आते रहते थे और वहां इतनी कम जगह थी कि वे ठीक से साँस भी नहीं ले सकते थे। आखिर वह आदमी यह झेल नहीं पाया। उसने अपनी पत्नी से बात की और उससे पूछा कि क्या किया जाए। उसने कहा, "रब्बी को मिलते हैं," और थोड़ी देर बहस करने के बाद, वह चला गया।

रब्बी ने उनका आदर किया और कहा, "मुझे लगता है कि तुम किसी चीज़ से परेशान हो। वो जो भी है, तुम मुझे बता सकते हो।"

तो उस गरीब आदमी ने रब्बी को बताया कि उसके घर पर हालात कितने खराब थे, उसकी पत्नी, और छःबच्चे सभी उसी एक कमरे में में खाते, रहते और सोते थे। गरीब आदमी ने रब्बी से कहा, "यहां तक कि हमने एक दूसरे पर चिल्लाना और आपस में लड़ना शुरू कर दिया है ।" जीवन इससे और बुरा नहीं हो सकता।"

रब्बी ने उस गरीब आदमी की समस्या पर गहन विचार किया।फिर उन्होंने कहा, "जैसा मैं तुमसे कहता हूं वैसा करो और चीजें बेहतर हो जाएंगी। क्या तुम वादा करते हो?"

“मैं वादा करता हूं," गरीब आदमी ने कहा।

तब रब्बी ने गरीब आदमी से एक अजीब सवाल पूछा। "क्या तुम्हारे पास कोई जानवर हैं?"

"हाँ," उसने कहा। "मेरे पास एक गाय, एक बकरी, और कुछ मुर्गियां हैं।"

"अच्छी बात है," रब्बी ने कहा। "जब तुम घर पहुंचोगे, तो सभी जानवरों को अपने साथ घर में रहने के लिए ले जाना।"
गरीब आदमी रब्बी से यह सलाह सुनकर आश्चर्यचकित था, लेकिन उसने रब्बी के साथ वादा किया था कि वो जैसा कहेंगे वो वैसा करेगा। तो वह घर गया और अपने सभी जानवरों को अपने छोटे से कमरे में ले गया।

अगले दिन वो गरीब आदमी फिर रब्बी को मिलने दौड़ा, "आपने मेरे साथ यह क्या कर दिया, रब्बी?" वह रोया। "यह बहुत खराब है।" मैंने वो किया जो आपने कहा और वो जानवर पुरे घर में चारों तरफ घूम रहे हैं! "रब्बी, मेरी मदद करो!" रब्बी ने सुना और शांतिपूर्वक कहा, "अब घर जाओ और मुर्गियों को वापिस बाहर ले जाओ।"

गरीब आदमी ने वैसा ही किया जैसा रब्बी ने कहा, लेकिन अगले दिन वो फिर दौड़ा आया। "मुर्गियां चली गई हैं, लेकिन रब्बी, बकरी!" उसने आह भरी। "बकरी सारा फर्नीचर तोड़ रही है और जो दिखाई देता है वो सब कुछ खा रही है!" उन अच्छे रब्बी ने कहा, "घर जाओ और बकरी को हटा दो और भगवान तुम्हारी भली करें।"

तो वो गरीब आदमी घर गया और उसने बकरियों को बाहर निकाल दिया। लेकिन वो फिर रोते, चिल्लाते रब्बी से मिलने दौड़ा। "आपने मेरे घर में ये क्या मुसीबत लगा दी है, रब्बी! उस गाय के साथ रहना ऐसा है जैसे अस्तबल में रहना! क्या इंसान इस तरह से जानवर के साथ रह सकते हैं?"

रब्बी ने प्यार से कहा, "मेरे दोस्त, तुम सही हो। भगवान तुम्हारी भली करें। अब घर जाओ और गाय को अपने घर से बाहर ले जाओ।" और गरीब आदमी जल्दी से घर गया और उस गाय को घर से बाहर ले गया।

अगले दिन वह फिर से वापस रब्बी के पास आया। "हे रब्बी," उसने अपने चेहरे पर एक बड़ी मुस्कुराहट के साथ कहा, "हमारा जीवन अब इतना अच्छा है। जानवर घर से निकल गए। घर इतना शांत है और हमारे पास अधिक जगह है! क्या ख़ुशी की बात है!”

प्रतिबिंब के लिए बीज प्रश्न: हमारे परिप्रेक्ष्य हमारे अनुभवों को आकर देते हैं, आप इस बात से क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब परिप्रेक्ष्य द्वारा अनुभव के बदले जाने की जागरूकता ने आपको परिप्रेक्ष्य बदलने में और उसके साथ अनुभव बदलने में मदद की हो? अपने परिप्रेक्ष्य को बदलने की स्वतंत्रता को पहचानने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है?

आरी के ६ मार्च के अवेकिन मरीन रीडिंग से लिया गया ( ईमेल द्वारा भेजा गया)
















 

Ari's Awakin Mar 6th Awakin Marin Reading (sent via email)


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