पंख की आवाज़ , बोनी रोज़ के द्वारा
मैं और मेरी एक दोस्त अक्सर एक-दूसरे का अभिवादन अरबी शब्द, "इश्क अल्लाह" से करते हैं। इश्क अल्लाह का अर्थ है ईश्वर के प्रति गहरा, भावुक, आतंरिक प्रेम। मिट्टी में समाई रूह और रूह में बसी इस कायनात के प्रति एक दीवानापन। वह सूफी-दरवेशों वाला विस्मय जो झूमता है और कहता है, इश्क अल्लाह माबूद लिल्लाह—ईश्वर ही प्रेम है, प्रेमी है और वही महबूब है...
हमारे पॉइंटर-नस्ल के कुत्ते, सारा और बार्टी मेरे साथ पहाड़ों पर लंबी सैर पर जाते हैं, जहाँ सारा 'इश्क' का एक अनूठा रूप दिखाती है। जब भी उसे किसी पक्षी का आभास होता है, वह एक सटीक मुद्रा में जम जाती है। समय थम जाता है जब वह आगे झुकती है, उसका अगला पैर मुड़ा हुआ और उसकी छोटी पूंछ तनी हुई होती है। यह कुत्तों वाला योग है, नीचे की ओर इशारा करता ईश्वर, जैसे वह अपने निर्धारित उद्देश्य के साथ मिलन का दावा कर रही हो।
मैं अपनी सांस रोक लेती हूँ। मानो धरती अपनी सांस रोक लेती है। फिर सारा को एक पवित्र शुरुआती बंदूक की आवाज सुनाई देती है, जो केवल कुत्तों की दुनिया में ही सुनाई दे सकती है। वह झाड़ियों में झपट्टा मारती है। बीस भूरे बटेर झाड़ियों से ऊपर की ओर उड़ते हैं, कोई चहचहाहट नहीं, बस उनके जिद्दी पंखों की आवाज़ जो कहते हैं, "मैं हूँ।" मैं पंखों की उस आवाज़ को भीतर खींचती हूँ और कहती हूँ, "मैं भी हूँ, प्यारे बटेरों—मैं भी हूँ।" सारा बटेरों पर भौंकती है और फिर अपनी खुशी बार्टी और मेरे साथ साझा करने के लिए पहाड़ के नीचे दौड़ती है। मैं कहती हूँ, "तुम भी प्रिय (महबूब) हो, प्यारे कुत्तों।"
हम साथ मिलकर अपनी 'इश्क' में सराबोर पदयात्रा जारी रखते हैं। मैंने ऐसा क्या किया जो मुझे ईश्वरीय कृपा का यह अनूठा रूप देखने को मिला? किसने ऐसे जीव को रचा जो इतनी स्पष्टता और आत्मीयता से उस परम तत्व की ओर इशारा करता है? वह क्या है जो बटेरों के उस झुंड को एक साथ उड़ने का रोमांच देता है? कैसे हवा, पंख और उड़ान मिलकर ऐसी साज़िश रचते हैं कि इंसान का हृदय उस सुंदरता में टूट कर बिखर जाए, जिसे केवल प्रेम ही सुन सकता है? हमें इस मदहोश कर देने वाली बेखुदी के हवाले कौन करता है? इश्क अल्लाह माबूद लिल्लाह, ईश्वर ही प्रेम, प्रेमी और महबूब के रूप में है...
इन तीनों को एक में ही सुनना कितना बड़ा सौभाग्य है। किसी परिभाषा की, किसी तर्क की आवश्यकता नहीं है। बस उन शब्दहीन बटेरों के पंख में छिपे आश्चर्य को महसूस करना है। प्रेम, प्रेमी और महबूब हमें लगातार पुकारते हैं। लेकिन क्या हम सुनेंगे? क्या हम ध्यान देंगे?
प्रेम की मदद से, मैं बेहतर सुनने की कोशिश करूँगी। मैं उस हाई स्कूल बैंड से शुरुआत करूँगी जो हर दिन मेरे घर के बिल्कुल पास अभ्यास करता है। मैं उनके शोर-भरे "ऑन विस्कॉन्सिन" संगीत से प्यार करूँगी। मैं बीथोवेन के "फुर एलिस" के साल्सा संस्करण पर झूमूँगी। मैं ड्रमों की थाप पर नाचूँगी। मैं प्रेम पर भरोसा करूँगी कि वह उस बेसुरे बैंड संगीत को उन किशोरों की आवाज़ में बदल दे, जो अपने क्लैरिनेट और सैक्सोफोन को कृपा के उस अदृश्य कोण की ओर मोड़ रहे हैं। मुझे पता होगा कि संगीत नहीं बदला है। महबूब मुझे बदल देता है। प्रेमी मेरे कानों को अलग तरह से सुनने के लिए लुभाता है। और प्रेम की रस विद्या झुंझलाहट को विस्मय में बदल देती है।
निरंतर अभ्यास (साधना) से हम यह जान सकते हैं कि सब कुछ—प्रेम, प्रेमी और महबूब ही है। चाहे वह जीवन का बेसुरापन हो या उसकी सहज कृपा; चाहे वह न्यूयॉर्क फिलाहारमोनिक का भव्य संगीत हो या किसी छोटे स्कूल के बैंड का शोर—यह सब उन्हीं 'पंखों की आवाज़' है। यह सब 'इश्क अल्लाह माबूद लिल्लाह' ही है। हर चीज़ एक मदहोश कर देने वाला आनंद है जो हमें 'घर' बुला रहा है—उसी “धरती पर स्वर्ग” की अनुभूति की ओर, जहाँ हमारा असली बसेरा है।
चिंतन के लिए बीज प्रश्न : इस विचार के बारे में आप क्या सोचते हैं कि सब कुछ, यहाँ तक कि शोर मचाने वाला हाई स्कूल बैंड या रोज़मर्रा की झुंझलाहट भी—एक, “हमें, घर बुलाने वाला , मदहोश आनंद" हो सकती है , बशर्ते हम इसे कुछ अलग तरह से सुन सकें? क्या आप अपने जीवन के ऐसे क्षण की कोई कहानी साझा कर सकते हैं जब आपने किसी ऐसे बदलाव का अनुभव किया हो, जब कोई साधारण या परेशान करने वाली आवाज़ , अचानक आपके मेहबूब के आपके लिए गाने की आवाज़ , जैसे "पंखों की आवाज़" के रूप में प्रकट हुई हो ? अपने रोज़मर्रा के जीवन के बेसुरापन के बीच प्रेम, प्रेमी और महबूब को सुनने का अभ्यास करने में आपको कौन सी चीज़ मदद करती है?
Seed Questions for Reflection
What do you make of the idea that everything - even the raucous high school band or daily annoyances - might be "intoxicated rapture calling us home," if only we could hear it differently? Can you share a personal story of a moment when you experienced that kind of shift, when something ordinary or even irritating suddenly revealed itself as "the sound of wings," as part of the beloved singing to you? What helps you practice listening for love, lover, and beloved in the dissonance of your everyday life?