“कृतज्ञता, धन्यवाद से कहीं अधिक है”
⁃ रॉबिन वॉल किम्मेरर के द्वारा
कृतज्ञता एक विनम्र "धन्यवाद" से कहीं अधिक है। यह वह धागा है जो हमें एक गहरे रिश्ते में जोड़ता है, शारीरिक और आध्यात्मिक एक साथ, क्योंकि हमारे शरीर को भोजन से पोषण मिलता है और आत्मा को अपनेपन की भावना से पोषण मिलता है, जो कि सबसे महत्वपूर्ण है। कृतज्ञता विपुलता की भावना पैदा करती है, यह जानना कि आपके पास वह सब कुछ है जिसकी भी आपको आवश्यकता है। पर्याप्तता के उस माहौल में, अधिक पाने की हमारी भूख कम हो जाती है और हम केवल वही लेते हैं जिसकी हमें आवश्यकता होती है, दाता की उदारता को सम्मान देते हुए।
अगर हमारी पहली प्रतिक्रिया कृतज्ञता है, तो हमारी दूसरी प्रतिक्रिया पारस्परिकता है: बदले में उपहार देना। मैं इन पौधों को उनकी उदारता के बदले में क्या दे सकता हूँ? यह एक (direct) प्रत्यक्ष, सीधी प्रतिक्रिया हो सकती है, जैसे निराई करना (खेत से अवांछित पौधों को हटाना) या पानी देना या आभार का गीत जो ब्रह्मांड में प्रशंसा भेजता है। या (indirect) अप्रत्यक्ष, जैसे कि मेरे स्थानीय भूमि ट्रस्ट को दान करना ताकि उपहार देने वालों के लिए और जमीन की व्यवस्था की जा सके, या ऐसी कला बनाना जो दूसरों को पारस्परिकता के भाव में आमंत्रित करे।
कृतज्ञता और पारस्परिकता एक उपहार अर्थव्यवस्था का धन है, और उनके पास हर आदान-प्रदान के साथ एक से अधिक बार जोड़ने की उल्लेखनीय संपत्ति है, उनकी ऊर्जा एक हाथ से दूसरे हाथ में जाने की होती है, एक वास्तव में नवीकरणीय संसाधन(वे संसाधन, जिन्हें इस्तेमाल करने के बाद भी फिर से भर दिया जा सकता है) मैं पौधों से स्ट्रॉबेरी स्वीकार करता हूँ , और फिर उस उपहार को अपने पड़ोसी को स्ट्रॉबेरी की पुडिंग बना कर भेजता हूं,और पड़ोसी केक बना कर अपने दोस्त को भेजता है। और दोस्त जो भोजन और दोस्ती में इतना समृद्ध महसूस करता है कि वह अन्नदान शाला में स्वयंसेवक बन जाता है। आप समझ सकते हैं कि यह कैसे आगे आगे बढ़ता जाता है।
दुनिया को एक उपहार की उपाधि दे कर ही हम महसूस कर सकते हैं, इस पारस्परिक समबन्ध के जाल में अपनी सदस्यता को। यह आपको सुखी भी करती है, और यह आपको आपकी जिम्मेवारी भी महसूस कराती है। किसी भी वस्तु को उपहार के रूप में अपनाने में आपका उससे सम्बन्ध एक विशाल एवं गहरे रूप से बदल जाता है, जब कि उस वस्तु के वास्तविक या भौतिक रूप में कोई बदलाव नहीं आया है। एक उनी टोपी को अगर आपने स्टोर से ख़रीदा है , तो वह आपको गरम तो रखेगी , पर अगर वही टोपी आपकी प्यारी चाची ने आपके लिए अपने हाथों से बनाई है , तो आपका उस टोपी से रिश्ता एक अलग प्रकार का हो जाता है, आपको उसको सही रखने की जिम्मेवारी महसूस होती है, और आपका कृतज्ञता का भाव , इस दुनिया के लिए प्रेरणा शक्ति बन जाता है।आप उस उपहार में मिली टोपी की बेहतर देख भाल करेंगे, आपकी खरीदी हुई टोपी से, क्योंकि उसमे रिश्तों का जुड़ाव भी है। यह उपहार की भावना का प्रभाव है।
मनन के लिए बीज प्रश्न :
- आप इस धारणा से कैसे सम्बन्ध रखते हैं कि इस दुनिया को उपहार के रूप में देखना हमें सुख का एहसास देता है एवं जिम्मेवारी भी देता है उसकी परस्परता कायम रखने की ?
- क्या आप उस समय की कोई कहानी साझा कर सकते हैं जब आपने किसी सम्बन्ध को और गहरा बनाया हो,कृतज्ञता की प्रेरक शक्ति के द्वारा ?
- जो कुछ भी आपके पास इस जीवन में है, उसे उपहार के रूप में देखने में आपको किस चीज़ या सोच से मदद मिलती है ?
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that viewing the world as gift gives us a sense of happiness and accountability to reciprocate a gift? Can you share a personal story of a time you deepened a relationship through the motive force of gratitude? What helps you see all that you have in your life as a gift?