अन्य कई आवाजें हैं, हमारे अलावा , द्वारा एला कारा देलोरिया
हम, ( मूल निवासी अमरिकियों) को मौन/ शांति के बारे में पता है | हम उससे भयभीत नहीं होते हैं| वस्तुतः , हमारे लिए मौन, शब्दों से अधिक शक्तिशाली है| हमारे बुजुर्गों को मौन/ शांति के प्रकार के बारे में शिक्षा मिली थी और उन्होंने ही वो ज्ञान हमें दिया है | पहले अवलोकन करें, फिर ध्यान से सुनें, उसके पश्चात ही कार्य करें, ये वो हमें बताते थे | उनके जीवन को जीने का ये ही तरीका था |
आप में से ज्यादा तर लोगों के साथ इसका उल्टा है | आप बातें करके ज्ञान हासिल करते हैं|जो बच्चा स्कूल मे सबसे ज्यादा बातें करता है उसे आप इनाम देते हैं| आपके उत्सवों ( Parties) में आप सब एक साथ ही बातें करने की कोशिश करते हैं| आपके कार्यस्थल में आप यहाँ के हर दम मीटिंग्स होती रहती हैं जिनमे सब कोई एक दुसरे को बीच में टोकता रहता है, और सभी तक़रीबन पांच , दस या सौ दफे तक बातें करते हैं| और आप उसे समस्या के समाधान का तरीका कहते हैं| आप अगर एक कमरे में हैं और उसमे मौन/शांति है , तो आप घबरा जाते हैं| आपको उस जगह को आवाजों से भर देना है | अतः आप अनिवार्यता से बातें करते रहते हैं, यह जानने से भी पहले , कि आप क्या बोलने वाले हैं |
(आधुनिक) ज़माने के लोग तर्क वितर्क करना जानते हैं| वो दुसरे व्यक्तियों को अपना वाक्य भी पूरा नहीं करने देते| वे हरदम टोक देते हैं| हम निवासी अमरीकियों के लिए ये सभ्य व्यवहार नहीं माना जाता बल्कि बेवकूफी मानी जाती है | अगर आप बात करना शुरू करते हैं तो मैं आपको बीच में नहीं काटूँगा| में सिर्फ सुनूंगा | अगर मुझे आपका कहा पसंद नहीं है , तो मैं आपको ध्यान से सुनना बंद कर दूंगा लेकिन आपको टोकूंगा नहीं| जब आपकी बात ख़त्म हो जाएगी, तब मैं अपने मन में विचार करूंगा जो आपने कहा है , और मैं, अगर बहुत जरूरी नहीं हो तो , यह भी आपको नहीं कहूँगा कि मैं आपसे सहमत नहीं हूँ| अन्यथा , मैं सिर्फ चुप रहूँगा और मैं चला जाऊँगा |
आपने मुझे बता दिया है जो मुझे जानने की जरूरत थी| अब कुछ कहने को बचा नहीं है |पर शायद अधिकांश आधुनिक व्यक्तियों के लिए ये पर्याप्त नहीं है |
व्यक्तियों को अपने शब्दों को बीज के रूप में आदर करना चाहिए | वे उन्हें रोप दें, और उन्हें मौन/शांति में अंकुरित होने दें| हमारे बुजुर्गों ने बताया कि धरती हमसे हमेशा वार्ता करती रहती है, पर उसे सुनने ले लिए हमें शांत/मौन रहना होगा |
अन्य कई स्वर हैं, हमारे अलावा| कई आवाजें |
मनन के लिए मूल प्रश्न : आप इस धारणा से कैसा नाता रखते हैं, कि अन्य कई स्वर हैं, हमारे अलावा ? क्या आप उस समय की एक कहानी साझा कर सकते हैं जब आप मौन/शांत थे, और आपने धरती को बातें करते सुना हो? आपको अपने शब्दों को मौन/शांति में अंकुरित होने में किस चीज़ से सहायता मिलती है|
Ella Cara Deloria, also called Aŋpétu Wašté Wiŋ, was a Yankton Dakota educator, anthropologist, ethnographer, linguist, and novelist. She recorded Native American oral history and contributed to the study of Native American languages.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that there are many voices besides ours? Can you share a personal story of a time you were silent and able to hear the earth talking? What helps you grow your words in silence?