अब मैं प्रार्थना नहीं करती हूँ , द्वारा चेला हर्किंस
अब मैं प्रार्थना नहीं करती हूँ
अब मैं ब्राउन चोकलेट दूध पीती हूँ,
एवं चन्द्रमा को मुझे गीत सुनाने देती हूँ|
अब मैं प्रार्थना नहीं करती हूँ ,
अब मैं अपने पूर्वजों को, एक छोटे से उकसावे से ही,
अपने कूल्हों के माध्यम से नृत्य करने देती हूँ|
अब मैं प्रार्थना नहीं करती हूँ
अब मैं नदी के पास जाती हूँ
और एक दर्दनाक चिल्लाहट के साथ
अपनी पुरानी पीड़ा को नदी की धारा में बहा देती हूँ।
अब मैं प्रार्थना नहीं करती हूँ
अब मैं तड़पती हूँ, अब मैं कामना करती हूँ,
अब मैं अपनी हसरतों के प्रति "हाँ" कहती हूँ।
अब मैं उस तरह की प्रार्थना नहीं करती जैसा मुझे सिखाया गया था,
लेकिन जैसे जैसे रात में तारे मेरी गोद में नरम जानवरों की तरह रेंगते हैं
और इश्वर अपनी हवा की कोमल उंगलियों से मेरे बालों को मेरे कानों के पीछे छिपाते हैं
और हर वस्तु एवं इंसान में एक नई अंतरंगता (आत्मीयता)उजागर होती है,
शायद यही वो प्रार्थना है , जैसी मैं ,अभी, अंततः , प्रार्थना करना सीख रही हूँ।
चिंतन के लिए बीज प्रश्न: प्रार्थना का अभिप्राय है प्रत्येक वस्तु एवं इंसान में आत्मीयता खोजना, इस धारणा से आप कैसा नाता रखते हैं? क्या आप ऐसे समय की कोई निजी कहानी साझा कर सकते हैं जब आपने प्रत्येक वस्तु एवं इंसान में अंतरंगता (आत्मीयता) को पहचाना हो ? आपको “जो जैसा है “, उससे अन्तरंग (आत्मीय) सम्बन्ध महसूस करने में किस चीज़ से मदद मिलती है | -
Chelan Harkin is an author, poet and mother. At the age of 21, she found herself in the save Baha'u'llah, the founder of the Baha'i faith, and heard "Let us dance" -- which was turning point of her life.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion of prayer as finding an intimacy with everything? Can you share a personal story of a time you recognized intimacy with everything? What helps you feel your connection to all that is?