अपने मुर्ग़े को पुनः प्राप्त करें
- जॉन बर्नी के द्वारा
अपने अस्तित्व में रहने के लिए विचार की आवश्यकता नहीं है। पूरी तरह से एकाग्र रहो, नाजुकता से एकाग्र रहो। जागरूकता की स्वाभाविक सहजता पर भरोसा करें। कोई प्रयास न करें। कोई प्रयास नहीं, कोई कार्य नहीं, बचाव का कोई प्रयास नहीं। बस टकटकी लगाए और बिना प्रतिरोध के देखते रहे।
जैसे ही आप इस स्वाभाविक खुलेपन की अनुमति देते हैं, किसी बिंदु पर यह घुलना शुरू कर देता है। जागरूकता का घोल ! एक मिनट यह तरल है, अगले मिनट - ग़ायब ! यह थोड़ा अजीब है, लेकिन वहां है: जुड़ाव। जब आप उस तरह ट्यून होते हैं, तो वहां समानुभूति होती है। कोई "आपकी भावनाएँ" या "मेरी भावनाएँ" नहीं हैं, बस संवेदना की गति है।
यह गहराई से समझना है - व्यक्तिगत रूप से नहीं - वास्तव में जिम्मेदारी क्या है: यह अहसास कि हम हर चीज और हर किसी के साथ जुड़े हुए हैं।
जैसे-जैसे हम इस ध्यान को विकसित करते हैं, अस्तित्व का अंतर्संबंध उभरता है। इसके साथ स्वाभाविक रूप से चला जाता है हमेशा अस्तित्व को बचाने की सोच में रहने का बोझ। दुर्भाग्य से, जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां नियमित रूप से अस्तित्त्व को बचाने का संघर्ष करना सामान्य बात है। यही कारण है कि हम खोए हुए, निराश, असहाय और निराशा में हैं। हमने अपने अस्तित्व के साथ संपर्क खो दिया है; हमारा वास्तविक अस्तित्व।
लेकिन यह खोया नहीं है। आप इसके साथ अभिन्न हैं। यह पौष्टिक, प्यार करने वाला, उदार है। इसे समझना हमें मनुष्य के रूप में पूरा करता है।
और इसलिए आप स्वाभाविक रूप से जी सकते हैं कि जैसे आप इस दुनिया में हैं, अपने व्यक्तिगत उद्देश्य के साथ अधिक संपर्क से, सभी जीवों के पारिस्थितिकी तंत्र में आपके योगदान के साथ। हो सकता है कि आप इसे स्पष्ट न कर पाएं, हो सकता है कि आप इसे समझ न पाएं, लेकिन आपके भीतर की कोई चीज पूरी तरह से इस बात पर भरोसा करती है कि कोई गतिविधि आपका मार्गदर्शन कर रही है और वो हर समय हर चीज का मार्गदर्शन कर रही है, क्योंकि अब आप इसके साथ तालमेल बैठा रहे हैं।
जागरुकता का समन्वय हो रहा है।
वर्षों पहले, मैं कहा करता था कि मैं मुर्ग़े के द्वारा दी गई सीख को समझता हूँ।
आपने अभिव्यक्ति सुनी होगी, "आप एक सिर कटे मुर्ग़े की तरह हैं जो इधर-उधर भाग रहा है।" याद है यह ? ख़ैर, मैंने इसे बदल दिया, "आप एक सिर हैं जो अपने मुर्ग़े को काटकर इधर-उधर भाग रहे हैं।"
आपको अपने मुर्ग़े को पुनः प्राप्त करना होगा!
आपके पूरे तंत्रिका तंत्र में शांति का अनुभव होना बहुत अदभुत है। न कुछ करना है, न कहीं जाना है, न कुछ बनना है। कितनी शांति है ! तब हम वास्तव में देखते हैं। यह देखना भी महसूस करना, सुनना, होना, जुड़ाव है। एक गहरा सिनेस्थेसिया।
सुनने के इस स्तर पर बहुत कम निर्देश की आवश्यकता होती है। यदि आप और अधिक समझना चाहते हैं तो उस इच्छा पर ध्यान दें। ध्यान दें असुरक्षितता के भाव पर , लेकिन इसे ठीक करने की कोशिश किए बिना । असुरक्षा को आने दें। क्या होगा अगर असुरक्षा-अरे वाह-में कुछ भी गलत नहीं था? यह प्रक्रिया सिर्फ एक प्राकृतिक पुनर्संतुलन है - यह सिर्फ उपचार है। ज़रूरी नहीं कि उपचार से किसी स्थिति से छुटकारा मिल जाए । उपचार हो भी सकता था। यह अपूर्णता के साथ संतुलन और सामंजस्य है, और अंततः स्वतंत्रता भी है।
प्रतिबिंब के लिए मूल प्रश्न: आपके चिकन को पुनः प्राप्त करने का आपके लिए क्या मतलब है? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव साझा कर सकते हैं जब आप अपने पूरे तंत्रिका तंत्र में शांति का अनुभव करने में सक्षम हुए हों? अपरिपूर्णता के साथ भी सामंजस्य महसूस करने में क्या चीज़ आपकी मदद करती है?
Jon Bernie is a contemporary, nondual spiritual teacher who offers a compassionate, heart-centered approach to awakening.
Seed Questions for Reflection
What does reclaiming your chicken mean to you? Can you share a personal story of a time you were able to experience peace throughout your whole nervous system? What helps you feel harmony even with imperfection?