सकारात्मकता अनुपात
- बारबरा फ्रेड्रिकसन के द्वारा
कल्पना कीजिए कि आप एक पानी में उगने वाली लिली हैं। यह भोर का आरम्भ है और आपकी पंखुड़ियाँ आपके चेहरे के चारों ओर बंद हैं। आप केवल धुप का एक छोटा सा धब्बा देख सकते हैं । लेकिन जैसे-जैसे सूरज आसमान में चढ़ता है, चीजें बदलने लगती हैं। आपके चेहरे के आस-पास का अंधापन खुलने लगता हैं और आपकी दुनिया काफी हद तक फैल जाती है। आप और देख सकते हैं। आपकी दुनिया बड़ी है।
जिस तरह धूप की गर्माहट से फूल खुलते हैं, उसी तरह सकारात्मकता की गर्माहट हमारे मन और दिल को खोलती है। यह हमारे दृश्य परिप्रेक्ष्य को वास्तव में बुनियादी स्तर पर बदल देता है, हमारी सार्वजनिक मानवता को दूसरों के साथ देखने की क्षमता के साथ।
हम यह जानते हैं क्योंकि हमने ऐसे अध्ययन किए हैं जो इसे दिखाते हैं। [...] शोधकर्ताओं ने पाया कि जब आप सकारात्मक भावनाओं को प्रेरित करते हैं, तो लोगों के दिमाग तब भी उस संदर्भ को उठा सकते हैं, जब उन्हें इसे अनदेखा करने के लिए कहा गया हो। जब लोग तटस्थ या नकारात्मक भावनाओं को महसूस कर रहे होते हैं, तो वे संदर्भ को बिल्कुल नहीं देखते हैं।
इससे पता चलता है कि जब लोग सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करते हैं, तो उनके पास एक व्यापक जागरूकता होती है - जो यह समझा सकती है कि जब लोग सकारात्मक थे तो उन क्षणों की स्मृति परिधीय विवरणों के लिए बेहतर क्यों है। सकारात्मक भावनाएं काफी हद तक हमें अधिक संभावनाएं देखने में मदद करती हैं।
लेकिन इन लाभों को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें अपने जीवन में कितनी सकारात्मकता की आवश्यकता है - कितना पर्याप्त है? हमारे शोध ने निष्कर्ष निकाला है तीन-से-एक - हर नकारात्मक भावना के लिए कम से कम तीन सकारात्मक भावनाओं का अनुपात - एक सही अनुपात के रूप में कार्य करता है, जो यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि क्या आप जीवन में क्षीण हो गए हैं, मुश्किल से पकड़े हुए हैं, या जीवित हैं, संभावना के साथ एक परिपक्व जीवन जीते है, या फिर आपका जीवन उल्लेखनीय रूप से कठिन समय के लिए लचीलापन लिए हुए है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अनुपात तीन-से-शून्य नहीं है। यह सभी नकारात्मक भावनाओं को खत्म करने के बारे में नहीं है। इस नुस्खे का एक हिस्सा यह विचार है कि नकारात्मक भावनाएं भी वास्तव में आवश्यक हैं।
एक पालों वाली नाव के रूपक पर विचार करें। पाल नाव पर विशाल मस्तूल है, जो पाल को हवा को पकड़ने में सहायता, और नाव को गति देने का काम देता है। लेकिन पानी की सतह के नीचे भारी लोहे का नौतल है, जिसका वजन टनों में हो सकता है। आप मस्तूल को सकारात्मकता के रूप में देख सकते हैं और नौतल को नकारात्मकता के रूप में । यदि आप नाव चलाते हैं, तो आप जानते हैं कि भले ही यह मस्तूल है जो पाल को पकड़ता है, परन्तु बिना नौतल के नाव आगे नहीं चल सकती; नाव बस इधर उधर बहती रहेगी या उलट जायेगी। नकारात्मकता, नौतल, वह है जो नाव को दिशाबद्ध और प्रबंधनीय रहने की अनुमति देता है।
जब मैंने एक बार दर्शकों के साथ इस रूपक को साझा किया था, तो एक सज्जन ने कहा, "आप जानते हैं, कब नौतल सबसे ज्यादा मायने रखता है? जब आप हवा की विपरीत दिशा में नौकायन कर रहे हों, जब आप कठिनाई का सामना कर रहे हों।" नकारात्मक भावनाओं का अनुभव करना और उन्हें व्यक्त करना वास्तव में कठिन समय के दौरान, या - विशेष रूप से - फलने-फूलने की प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि वे हमें उन कठिनाइयों की वास्तविकता के संपर्क में रहने में मदद करते हैं जिनका हम सामना कर रहे हैं। [...]
एक सूफी कहावत है: नकली सोने जैसी कोई चीज नहीं होती अगर असली सोना कहीं नहीं होता। तो हम बिना नकली सोने को जकड़ कर रखे, अपनी वास्तविक, सकारात्मक हार्दिक भावनाओं को कैसे महसूस कर सकते हैं?
मनन के लिए प्रश्न: आप इस धारणा से कैसे सम्बद्ध हैं कि नकारात्मक भावनाएं हमें 'कठिनाइयों के बारे में वास्तविकता के संपर्क में रहने' में मदद करती हैं? क्या आप उस समय की व्यक्तिगत कहानी साझा कर सकते हैं जब सकारात्मक भावनाओं ने आपके लिए अधिक संदर्भ और संभावनाएं खोली हो? आपको अपनी वास्तविक, सकारात्मक हार्दिक भावनाओं को महसूस करने में क्या मदद करता है?
Barbara Fredrickson is the Kenan Distinguished Professor at the University of North Carolina, Chapel Hill. She is also the author of Positivity. Excerpt above from
this article.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that negative emotions help us 'stay in touch with the reality of the difficulties we're facing'? Can you share a personal story of a time positive emotions opened up more context and possibilities for you? What helps you tap into genuine, heartfelt positive emotions without grasping for the counterfeit gold?