आप पियानो बजाते हैं
-- एलन वॉट्स द्वारा लिखित (२२ फरवरी, २०१७)
यह अस्तित्व, भौतिक जगत मूल रूप से चंचल है। इसकी कोई भी आवश्यकता नहीं है। यह कहीं भी नहीं जा रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि इसके लिए कोई मंज़िल नहीं है जहाँ तक इसे पहुँचना ज़रूरी है।
लेकिन इसे सबसे अच्छी तरह इसकी संगीत के साथ तुल्यता द्वारा समझा जा सकता है, जैसा कि कला की कोई भी शैली अनिवार्य रूप से चंचल है। हम कहते हैं, "आप पियानो बजाते हैं।" आप पियानो पर काम नहीं करते।
क्यों? संगीत, उदाहरण के लिए, यात्रा से अलग है। जब आप यात्रा करते हैं, आप कहीं पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि, संगीत में हम एक रचना के अंत तक पहुंचने को रचना का उद्देश्य नहीं बनाते। अगर ऐसा होता, तो सबसे अच्छे कंडक्टर वो होते जो सबसे तेज़ बजाते। और ऐसे रचनाकार होते जो रचना का केवल अंतिम भाग ही लिखते। लोग एक संगीत के कार्यक्रम में सिर्फ एक भड़कदार स्वर-संयोग सुनने जाते ... क्योंकि वह कार्यक्रम का अंत है।
नृत्य के साथ भी वही बात है। आप कमरे में एक विशेष स्थान पर पहुंचने का उद्देश्य नहीं बनाते क्योंकि आप वहां पहुंच जाएंगे। नृत्य का उद्देश्य केवल नृत्य करना है।
लेकिन हम इसे एक ऎसी चीज़ की तरह नहीं देखते जो हमारी शिक्षा द्वारा हमारे आचरण में लायी गयी है। हमारे पास एक शिक्षण प्रणाली है जो बिलकुल अलग प्रभाव छोड़ती है। यह सब वर्गीकृत है और हम ऐसा करते हैं कि एक बच्चे को इस वर्ग प्रणाली के गलियारे में इस तरह डाल देते हैं, जैसे बिल्ली के बच्चे को कह रहे हों, “ चलो चलो, इधर आओ।" और आप किंडरगार्टेन में जाते हैं और यह एक बहुत अच्छी बात है क्योकि जब आप वो ख़त्म कर लेते हैं तो आप पहली कक्षा में पहुंच जाते हैं। फिर, ”चलो आओ” पहली कक्षा, दूसरी कक्षा की और ले जाती है और ऐसा चलता रहता है। और फिर आप प्राथमिक स्कूल से पास हो जाते हैं और आप उच्च विद्यालय में पहुंच जाते हैं। रफ़्तार बढ़ती रहती है, वो चीज़ आ रही है, फिर आप कॉलेज चले जाएंगे ... फिर आपके पास पोस्ट ग्रेजुएट कॉलिज है, और जब आप पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से पास हो जाते है, तो आप दुनिया में शामिल होने के लिए चल पड़ते हैं।
तो फिर आप किसी धमा-चौकड़ी में पहुंच जाते हैं जहां आप इन्शुरन्स बेच रहे होते हैं। और उनके एक कोटा होता है जिस तक पहुंचना उन्हें ज़रूरी है, और आप उस तक ज़रूर पहुचेंगे। और इस पूरे समय वो चीज़ आ रही है - वो आ रही है, वो आ रही है, वो महान चीज़। वो सफलता जिसके लिए आप मेहनत कर रहे हैं।
फिर एक दिन जब आप ४० वर्ष की उम्र के हो जाते है, तो आपकी आँख खुलती है, "हे भगवान, मैं सफल हो गया हूँ। मैं वहाँ पहुंच गया हूँ।" और आप जैसा हमेशा महसूस करते थे उससे बहुत अलग महसूस नही करते।
उन लोगों को देखो जो सिर्फ रिटायर होने के लिए जीते हैं; अपनी बचाई कमाई को जमा करने के लिए। और फिर जब वो 65 के हो जाते हैं तो उनके पास कोई शक्ति नहीं रह जाती। वे ज़्यादातर बेकार हो जाते हैं। और फिर वो जाते हैं और किसी वृद्ध गृह, किसी सीनियर सिटीजन कम्युनिटी में सड़ते हैं। क्योंकि हमने इस पूरे रास्ते में खुद को धोखा दिया है।
क्योंकि हमने जीवन को एक सफ़र, एक तीर्थयात्रा के रूम में देखा, जिसके अंत में एक गंभीर उद्देश्य था, और उद्देश्य था अंत की उस चीज़ तक पहुंचना। सफलता, या जो ये कुछ भी है, या आपके मरने के बाद, शायद स्वर्ग ही।
लेकिन पूरे रास्ते में हम इसका मतलब ही नहीं समझ पाए।
यह एक संगीतमय बात थी, और जब तक संगीत बज रहा था, आप को गाने या नाचने की ज़रूरत थी।
विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: जीवन को संगीत बजाने की तरह जीने से आप क्या समझते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आप ज़िन्दगी को एक “”संगीतमयी चीज़” की तरह अनुभव कर पाए हों? आपको भविष्य की सफलता के लिए एक स्थगित-जीवन की योजना को जीना छोड़, और उसके बदले में संगीत के बजने का आनंद लेने में किस चीज़ से मदद मिलती है?
एलन वॉट्स, एक ब्रिटिश दार्शनिक, लेखक, और वक्ता द्वारा लिखित, जो एक अनुवादक और पश्चिमी दर्शकों के लिए पूर्वी दर्शन को लोकप्रिय बनाने वाले के रूप में जाने जाते हैं ।
Alan Watts, a British philosopher, writer, and speaker, best known as an interpreter and populariser of Eastern philosophy for a Western audience. Excerpt is above Alan Watts from "Coincidence of Opposites" in the
Tao of Philosophy lecture series, courtesy of Alan Watts Org.
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