नवीनीकरण किसी चीज़ को मूल्यवान बनाता है
-- मार्टिन प्रेक्टेल द्वारा लिखित (२७ अप्रैल, २०१६)
गांव में लोग अपने घर पारंपरिक सामान से बनाते थे, बिना लोहे या लकड़ी या कीलों का उपयोग किये, लेकिन घर शानदार होते थे। बहुत से घर छाल और फाइबर को जोड़कर बनाए जाते थे। जैसे शरीर का घर होता है, वो घर जिसमें एक इंसान सोता है, वो बहुत ही सुंदर और मजबूत होना चाहिए, लेकिन इतना मज़बूत भी नहीं कि वो कुछ समय के बाद गिर टूट नहीं जाए। अगर आपका घर गिरता नहीं, तो उसे फिरसे बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। और यही नवीनीकरण है जो किसी चीज़ को और मूल्यवान बनाता है। उसका रख-रखाव करना उसे अर्थ देता है।
गांव में एकजुटता और खुशी होने का कारण हमेशा लोगों की उदारता रही है, लेकिन उस उदारता का मूल कारण अक्षमता और क्षय है। क्योंकि हमारे गांव की झोपड़ियों बहुत लंबे समय तक चलने के लिए नहीं बनाया जाती थीं, इसलिए उन्हें नियमित रूप से दोबारा बनाना पड़ता था। ऐसा करने के लिए गाँव वाले किसी की झोपड़ी को ठीक करने के लिए, कम से कम साल में एक बार मिलकर काम करते। जब आपका घर गिरने की हालत में होता तो आप और सब लोगों को बुलाते। छोटे बच्चे चारों ओर दौड़ते हुए, दूसरे लोगों के काम को बिगाड़ते। नवयुवतियां पानी लातीं। नवयुवक पत्थर ढो कर लाते। बूढ़े आदमी सबको बताते कि उन्हें क्या करना है, और बूढ़ी औरतें बूढ़े आदमियों को कहतीं कि वो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे। जब वो घर फिर से बन कर खड़ा हो जाता, सब लोग मिलकर खाते, घर की तारीफ़ करते, हँसते, और रोते। कुछ ही दिनों में, वे अगले घर पर काम करने लगते। इस तरह, गांव में प्रत्येक परिवार का घर फिरसे बनता और याद किया जाता। पहले ऐसा ही होता था।
फिर मिशनरी और व्यापारी और नेता मजबूत घर बनाने के लिए टीन और लकड़ी ले आये।अब मकान बहुत दिन चलते हैं, लेकिन रिश्ते नहीं।
कुछ मायनों में, संकट समुदायों को एक साथ लाते हैं। आजकल भी, अगर बाढ़ आती है, या अगर कोई किसी मोहल्ले के बीच से हाई वे निकालना चाहता है, तो लोग मिलजुल कर उस समस्या का समाधान निकालते हैं। माया सभ्यता के लोग संकट आने का इंतजार नहीं करते; वे खुद संकट को बना लेते है। उनकी आध्यात्मिकता निर्देशित आपत्तियों पर आधारित है -- जिन्हें धार्मिक संस्कार के रूप में जाना जाता है -- जिसमें सब को मिलजुल कर फिरसे सबके कपड़ों, या एक दूसरे के घर, या समुदाय, या संसार का निर्माण करना होता है। हर चीज़ का ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि वो शुरूआत से इतनी नाजुक है कि वह अंततः टूट जाती है। यह उसे फिर से जोड़ना, उसे नया रूप देना ही है जो अंततः किसी चीज़ को मजबूत बनाता है। यही बात हमारे घरों, हमारी भाषा, हमारे संबंधों के बारे में सच है।
यह बहुत नाज़ुक संतुलन है, कुछ ऐसा बनाना जो इतना कमज़ोर नहीं है कि वो बहुत जल्दी टूट जाए, लेकिन इतना ठोस भी नहीं कि वो हमेशा बना रहे। इसके लिए एक खास तरह की सुगढ़ता की ज़रूरत है। हम सब कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो हमारे बाद भी ज़िंदा रहे, लेकिन वो चीज़ एक घर, या कोई और भौतिक वस्तु नहीं होनी चाहिए। वह एक गांव होना चाहिए जो खुद को बनाए रखना जारी रख सकता है। इस तरह का निरंतर नवीकरण ही वो हमेशा रहने वाली चीज़ है जिसे पाने की हमें चाह रखनी चाहिए।
विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस विचार से क्या समझते हैं कि नवीनीकरण ही वो तरीका है जो किसी चीज़ को मूल्यवान बनता है? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँटना चाहेंगे जब आपने अक्षमता (inefficiency) और अस्थिरता (impermanence) के माध्यम से नवीनीकरण देखा हो? अस्थिरता का आदर करने में आपको किस चीज़ से मदद मिली है?
न्यू मैक्सिको में एक पुएब्लो इंडियन आरक्षण में पले मार्टिन प्रेक्टेल, “सीक्रेट्स ऑफ़ द टॉकिंग जैगुआर और लॉन्ग लाइफ, हनी इन द हार्ट” के लेखक हैं। ऊपर लिखा उद्धरण सन मैगज़ीन के एक इंटरव्यू में से लिया गया है।
Raised in New Mexico on a Pueblo Indian reservation, Martin Prechtel is the author of
Secrets of the Talking Jaguar and
Long Life, Honey in the Heart. The above excerpt is from an
interview in Sun Magazine.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that renewability is what makes something valuable? Can you share a personal story of a time that you experienced renewal through inefficiency and impermanence? What has helped you value impermanence?