Ninety Six Words for Love


Image of the Week“छियानवे नाम प्रेम के”
- रॉबर्ट जॉनसन के द्वारा

भावनाओं से जुड़ी कोई भी बात करते समय जो पहली कठिनाई आती है, वह यह है कि हमारे पास भावनाओं को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं होते। जहाँ शब्द नहीं होते, वहाँ चेतना भी नहीं होती। किसी विषय की शब्दावली में दरिद्रता यह तुरंत बता देती है कि उस समाज में वह विषय महत्वहीन या उपेक्षित समझा जाता है।

संस्कृत में प्रेम के लिए छियानवे शब्द हैं; प्राचीन फ़ारसी में अस्सी, ग्रीक में तीन, और अंग्रेज़ी में केवल एक। यह इस बात का संकेत है कि हम इस अत्यंत महत्वपूर्ण भावनात्मक क्षेत्र को कितना कम महत्व या जागरूकता देते हैं। एस्किमो लोगों के पास बर्फ के लिए तीस शब्द हैं, क्योंकि उनके लिए यह जीवन और मृत्यु का प्रश्न है — उस तत्व की सटीक जानकारी रखना, जिसके साथ वे इतने घनिष्ठ रूप से रहते हैं। यदि हमारे पास भी प्रेम के लिए तीस शब्द होते… तो हम मानवीय संबंधों के इस बेहद करीबी और ज़रूरी पहलू में कहीं अधिक समृद्ध और बुद्धिमान होते। जिस तरह एस्किमो ने अगर बर्फ के लिए केवल एक ही शब्द खोजा होता तो शायद वो अपनी जान गँवा सकता था,उसी तरह हम “प्रेम” को केवल एक ही बाँधकर अकेलेपन से मरते जा रहे हैं।

पश्चिमी भाषाओं में अंग्रेज़ी शायद भावनाओं के संदर्भ में सबसे अधिक दरिद्र है। सोचिए, यदि पिता के प्रति प्रेम के लिए एक विशेष शब्द हो, माँ के प्रति प्रेम के लिए दूसरा, ऊँट के प्रति प्रेम के लिए एक अलग (जैसा कि फ़ारसियों के पास है), जीवनसाथी के लिए एक अलग, और सूर्यास्त के लिए भी एक विशेष शब्द हो — तो हमारी दुनिया कितनी समृद्ध और स्पष्ट हो सकती है! ऐसे साधनों के होते हुए हमारी भावनाओं की दुनिया असीम विस्तार पा सकती है।

व्यक्ति या संस्कृति में जो पक्ष कमज़ोर होता है, उसी में यह शब्दावली की दरिद्रता सबसे अधिक होती है। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धियाँ हमारे श्रेष्ठ पक्ष से आती हैं, लेकिन वो हमारे कमजोर पक्ष की कीमत पर आती हैं। हमारी सबसे बड़ी सफलताएँ के साथ अक्सर हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरियों भी आती हैं। अंग्रेज़ी-भाषी समाज में चिंतन (thinking) हमारा श्रेष्ठ पक्ष है, इसलिए स्वाभाविक रूप से भावना (feeling) हमारा कमजोर पक्ष बन जाता है। ये दोनों शक्तियाँ अक्सर एक-दूसरे की कीमत पर बढ़ती हैं। यदि कोई भावना में आगे है, तो संभव है कि वह विचार में कमज़ोर हो — और इसके विपरीत भी।

हमारी वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली जितनी समृद्ध है, अगर वैसी ही सूक्ष्म और विविध शब्दावली हमारे पास भावनाओं के लिए भी होती, तो हम मानवीय रिश्तों की ऊष्मा और भावनात्मक उदारता की ओर एक बड़ी छलांग ले चुके होते।


चिंतन के लिए बीज प्रश्न:

1. आप इस विचार से कैसे जुड़ते हैं कि किसी एक कार्य-क्षमता (जैसे विचार या भावना) में श्रेष्ठता, अक्सर दूसरे के कमज़ोरी की कीमत पर आती है?

2. क्या आप कोई ऐसा व्यक्तिगत अनुभव साझा कर सकते हैं जहाँ आपको यह एहसास हुआ हो कि आपके जीवन में किसी एक पक्ष की दरिद्रता ने आपको कोई गहरी सीख दी?

3. हम विचार और भावना, इन दोनों विषयों में संतुलन कैसे बना सकते हैं?
 

Robert Johnson, in The Fisher King and the Handless Maiden. â€‹In 1945, he went to Ojai, California, as a student of Jiddu Krishnamurti, an Indian spiritual teacher. In 1947 he began his own therapy with Fritz Künkel. He later studied at the C. G. Jung Institute in Zürich, Switzerland, where Emma Jung, the wife of Carl, was his principal analyst. He completed his analytical training with Künkel and Tony Sussman. He established an analytical practice in Los Angeles in the early 1950s with Helen Luke. In the early 1960s he closed his practice and became a member of St. Gregory's Abbey, Three Rivers, in Michigan, a Benedictine monastery of the Episcopal Church.


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