क्या तुम उसे प्यार कर सकते हो जो ...
--लिया पर्लमन (30 जनवरी, 2013)
तुममें एक वो है जो प्यारा सा है।
तुममें एक वो है जो कुछ घिनौना है।
क्या तुम उन दोनों से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम उन दोनों को प्रदर्शित होने दे सकते हो?
तुममें जो कोशिश करता है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
और जब वह नाकाम हो जाए, तब क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममें जो झूठ बोलता हो, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
और जो बिलखता है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने आंसुओं से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपनी चिंताओं से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने अंदर छुपे डर से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने क्रोध से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपनी उदासीनता से प्यार कर सकते हो?
तुममें जो जकड़ना चाहता हे, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममें जो आकर्षक है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
जिसका सुंदर गान है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममें जो व्यसनी(addict) है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममे जो चोर छुपा है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममें जो अहंकार है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने दुखों से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने भीतर बसे बचपने से प्यार कर सकते हो?
और अपने ढलते शरीर से?
क्या तुम अपने मन के उड़ते पंछी से प्यार कर सकते हो?
क्या उसे अपने पिंजरे से फुर्र से उड़ने दे सकते हो?
तुममें जो संतुष्ट है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
और उसे जो संतुष्ट नहीं है?
तुममें जो शीतल मन है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
और जो गर्म मिज़ाज का है?
तुममें जो कमज़ोर है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
जो कभी बीमार है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
तुममें जो योद्धा है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
जो हर हाल में लड़ने को तैयार है?
तुममें जो दीवाना है, क्या तुम उससे प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने मानसिक संतुलन से प्यार कर सकते हो?
क्या तुम अपने पागल दिल से प्यार कर सकते हो?
अपने बिखरे ख्यालों से?
तुममें एक वो है जिसका मन उचाट है,
और एक वो जो अकसर तनाव में रहता है।
क्या तुम उन दोनों को एक साथ प्यार कर सकते हो?
और वो जो अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है?
अगर इन सब प्रश्नों में से
कुछ का जवाब "न" है,
तो क्या तुम अपने अंदर छुपे उस इंसान से प्यार कर सकते हो
जो अभी प्यार करना सीख रहा है?
---लिया पर्लमन
Seed Questions for Reflection
The poet draws our attention to a remarkable level of acceptance - how do you relate to using love as a practice to be able to embrace all that is? How can we stand up for our truth and at the same time love those who are not aligned with that truth? Can you share a personal story of loving someone while disagreeing with their actions?