धूल पोंछनी हो तो पोंछ लो
रोज़ मिलिगन के द्वारा
धूल पोंछनी हो तो पोंछ लो, मगर क्या यह बेहतर नहीं होगा
कि कोई चित्र बना लो, या एक ख़त लिख डालो,
एक केक बना लो, या कोई बीज बो दो;
और ज़रा ठहरकर सोचो—
इच्छा और ज़रूरत के बीच कितना अंतर है?
धूल पोंछनी हो तो पोंछ लो, मगर समय बहुत कम है,
नदियाँ हैं जिन्हें तैरकर पार करना है,
पहाड़ हैं जिन्हें चढ़ना है;
संगीत है जिसे सुनना है, किताबें हैं जिन्हें पढ़ना है;
दोस्त हैं जिन्हें सहेजना है,
और जीवन है जिसे जीना है।
धूल पोंछनी हो तो पोंछ लो, मगर दुनिया तुम्हारे सामने है—
आँखों में सूरज की रोशनी है, बालों में हवा की छुअन;
बर्फ़ की हल्की-सी फुहार, बारिश की एक बौछार—
यह दिन फिर कभी लौटकर नहीं आएगा।
धूल पोंछनी हो तो पोंछ लो, मगर यह याद रखना—
बुढ़ापा आएगा, और वह बहुत मेहरबान नहीं होगा।
और जब तुम जाओगे—और जाना तो है ही—
तुम स्वयं ही और धूल बन जाओगे।
मनन के लिए मूल -प्रश्न
1-आप इस विचार से कैसे जुड़ते हैं कि जीवन के सबसे साधारण क्षण—“बर्फ़ की हल्की-सी फुहार, बारिश की एक बौछार”—अपने भीतर ऐसी तात्कालिकता लिए होते हैं, जिसका उत्तर केवल घर को व्यवस्थित करते रहना नहीं हो सकता? और जब आप इस सच्चाई के साथ बैठते हैं कि “यह दिन फिर कभी लौटकर नहीं आएगा,” तो आपके भीतर क्या जागता है?
2-क्या आप अपने जीवन की ऐसी कोई घटना साझा कर सकते हैं, जब आपने किसी ऐसी चीज़ को, जिसे करना ज़रूरी या ज़िम्मेदारी समझा जाता था, थोड़ी देर के लिए किनारे रखकर अपने भीतर की किसी अधिक जीवंत पुकार का अनुसरण किया हो—किसी नदी का, किसी मित्र का, किसी अधूरे-से विचार का? उस चुनाव ने आपको यह समझने में क्या दिखाया कि आप वास्तव में किस चीज़ को महत्व देते हैं?
3-आपको “इच्छा” और “ज़रूरत” के बीच के अंतर के करीब रहने में क्या मदद करता है, ताकि जिस जीवन को आप आज सँवार रहे हैं, वही वह जीवन हो जिसे आप सचमुच जीना चाहते थे?
Rose Milligan lives in Lancaster, Lancashire, England.
How do you relate to the notion that life's most ordinary moments - "a flutter of snow, a shower of rain" - carry an urgency that no amount of tidying can answer, and what does it stir in you to sit with the truth that "this day will not come around again"? Can you share a personal story of a time when you set aside what felt obligatory or responsible to follow something more alive in you - a river, a friend, a half-formed idea - and what that choice revealed about what you actually value? What helps you stay close to the difference between want and need, so that the life you are tending is the one you actually want to have lived?