शोर द्वारा आर्ये कूपर्स्मिथ
जब मैं रेडवुड के जंगल में पहुँचता हूँ, तो वहां के पेड़ अपनी शांति की प्राचीन और गहन वाणी से मेरा स्वागत करते हैं। मैं इतने लंबे समय से यहाँ नहीं आया था कि इस अनुभूति को लगभग भूल ही गया था। मेरा हृदय प्रेम के आँसुओं से भर उठता है।
शुक्रवार की शाम, कैंपसाइट पर, मैं शांतिपूर्वक, शब्बात (यहूदी विश्राम दिवस) के पारंपरिक भोजन की तैयारी करता हूँ— मोमबत्तियाँ, मदिरा , चाल्लाह (विशेष रोटी), विशेष व्यंजन, प्रार्थनाएँ और आशीर्वाद। इन्हीं के माध्यम से मैं उस मौन का उत्तर देना चाहता हूँ।
तभी शोर शुरू हो जाता है। बिल्कुल पास वाले कैंपसाइट पर अभी-अभी आए कैंपर का जनरेटर , वातावरण पर हावी, लगातार ,तेज़ आवाज़ करने लगता है। मैं उसे अनदेखा करने की कोशिश करता हूँ। अपने मन को शांत करना चाहता हूँ, और फिर से उस प्रेमपूर्ण कृतज्ञता और आध्यात्मिक अनुष्ठान में लौटना चाहता हूँ। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाता। अब वह शोर मेरी पूरी शाम पर हावी हो चुका है। ऐसे में मैं क्या करूँ?
दो वर्ष पहले भी ऐसा ही हुआ था। तब मैं बहुत क्रोधित और परेशान हो गया था। मैं उस परिवार के पास गया और उनसे कहा कि दूसरे कैंप करने वालों का भी ध्यान रखें और कृपया अपना जनरेटर बंद कर दें। उस व्यक्ति ने पहले मेरे गुस्से से भरे चेहरे को देखा, फिर अपनी पत्नी और किशोर बेटों की ओर देखा और कंधे उचकाते हुए बोला, "पार्क के नियम कहते हैं कि मैं इसे रात 10 बजे तक चला सकता हूँ।" और उसने वही किया। उस जनरेटर का शोर मेरी पूरी शाम की शांति और सुकून को डुबो गया।
इस बार मैं उसी शोर के बीच बैठा रहा और जीवन भर अपने मित्रों और शिक्षकों से सीखी हुई बातों पर विचार करता रहा। फिर मैं उठा और उस कैंपर की ओर चला गया। वहाँ मेरी ही उम्र का एक दंपति था। महिला बाहर बैठकर किताब पढ़ रही थी और पुरुष भीतर रात का खाना बना रहा था। मैंने कुछ क्षण रुककर उन्हें देखा ताकि उनके जीवन, उनके संघर्षों और उनकी आशाओं की कल्पना कर सकूं ।
"नमस्ते," मैंने कहा, "मैं सामने वाले कैंपसाइट में ठहरा हूँ। कितनी सुंदर शाम है, है न?" हमने एक-दूसरे का परिचय दिया। ज़्यादातर बातचीत वही व्यक्ति कर रहा था। उसकी पत्नी कुछ कमजोर और अस्वस्थ-सी लग रही थी। पता चला कि वे दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया से हैं और ओरेगन में अपने बेटे से मिलकर लौट रहे हैं। मैंने भी उन्हें पोर्टलैंड में रहने वाली अपनी बेटी और अपनी बेटी की बेटी के बारे में बताया।
फिर मैंने कहा, "मैं सोच रहा था कि आप अपना जनरेटर कितनी देर तक चलाने वाले हैं?"
वह बोला, "नियम कहते हैं कि हम इसे रात 10 बजे तक चला सकते हैं।" मैंने बस चुपचाप सिर हिला दिया। मैंने कुछ नहीं कहा। उसने चारों ओर नज़र दौड़ाई। आसपास ज़्यादातर लोग तंबुओं में ठहरे हुए थे। वह बोला, "यहाँ तो सचमुच बहुत शांति है, है न?"
मैंने सहमती में सिर हिलाया और कहा, "मुझे लगता है कि हममें से बहुत-से लोग इसी शांति की तलाश में यहाँ आते हैं।"
कुछ क्षण सोचने के बाद वह बोला, "ठीक है... मेरा ख़याल है कि हम खाना खा लेने के बाद, लगभग एक घंटे में, इसे बंद कर सकते हैं।" उसने अपनी पत्नी की ओर देखा। उसने भी सहमति में सिर हिलाया।
मैंने मुस्कराकर कहा, "बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं इसकी सराहना करता हूँ। आपका भोजन आनंददायक हो!" वह बोला, "धन्यवाद। और आप भी अपने भोजन का आनंद लीजिए।"
मैं वापस अपने कैंपसाइट पर आया। मैंने आशीर्वचन कहा और मोमबत्तियाँ जलाईं। जनरेटर की आवाज़ अब भी उतनी ही तेज़ थी।लेकिन मेरे मन का शोर समाप्त हो चुका था।अब मैं फिर से शांति और मौन में पूरी तरह उपस्थित हो सका।
कुछ ही मिनटों बाद मुझे एहसास हुआ कि बाहर का शोर भी बंद हो गया है। मैं फिर उनके कैंपर के पास गया और पूछा, "सब ठीक है न?" वह मुस्कराया और बोला, "हाँ, मैंने अभी इसे बंद कर दिया।" मैंने कहा, धन्यवाद।"
वह कुछ क्षण चुप खड़ा रहा। थोड़ा संकोच में लग रहा था। फिर मुस्कराकर बोला, "असल में मैंने सोचा... मुझे इसकी गंध भी पसंद नहीं है!" हम तीनों हँस पड़े। उसके बाद हमने अपने बच्चों के बारे में कुछ देर और बातें कीं।
मनन के लिए बीज प्रश्न ; इस धारणा से आप कैसा नाता रखते हैं कि हमारे मन का शोर, बाहर के शोर बंद होने से पहले भी शांत हो सकता है? क्या आप अपने जीवन की उस समय की एक निजी कहानी साझा कर सकते हैं, जब आपने किसी व्यक्ति के जीवन, उसके संघर्षों और उसकी आशाओं को समझने की सच्ची जिज्ञासा के साथ उससे बात की हो, और उस कारण एक संभावित टकराव या दूरी, आपसी समझ और निकटता में बदल गई हो? जब बाहरी परिस्थितियाँ आपकी आंतरिक शांति पर हावी होती प्रतीत हों, तब आपको अपनी शिकायत या नाराज़गी से आगे बढ़कर, अपनी मानवीय संवेदना के साथ प्रतिक्रिया देने की वह छोटी लेकिन महत्वपूर्ण छलांग लगाने में, किस चीज़ से मदद मिलती है ?
Aryae Coopersmith is the author of Holy Beggars and the founder of One World Lights (OWL), a community of global citizens with the shared vision of people everywhere supporting a course change for humanity by supporting each other.
How do you relate to the notion that the noise in our minds can be quieted before the outer noise ever stops? Can you share a personal story of a time when approaching someone with genuine curiosity about their life - pausing to imagine their struggles and their hopes - changed what might otherwise have become a moment of conflict or distance? What helps you make that small but significant shift from leading with your grievance to leading with your humanity, especially when the outer noise feels like it's winning over your inner peace?