वास्तविकता जैसी है, उसे, उसी रूप में देखना , द्वारा अन्नका हैरिस
ध्यान का प्रयास है अपने हर पल-पल के अनुभव पर पूरा ध्यान लगाना, अपनी लगातार उठ रही आतंरिक भावनाओं पर ध्यान, अनगिनत विचारों और एहसासों पर ध्यान , 'सही या गलत' की सोच अथवा उनका अर्थ निकाले बिना, उन्हें हमारे तात्कालिक कार्यो का कब्ज़ा दिए बिना, रहना | आसान शब्दों में कहें, तो ध्यान एक ऐसा हुनर है जो हमारी पुरानी आदतन विचारों के बहाव को रोकता है: जैसे भविष्य की चिंता करना, पुरानी बातों को याद करना, या अपने खाने-पीने और दर्द से बचने की इच्छाओं के पीछे भागना। इसके बजाय, ध्यान के समय हम अपनी भावनाओं, विचारों औए धारणाओं को बस आने और जाने देते है, और ऐसा करने से, ये अनुभव हमें रोज़ाना की ज़िंदगी के मुकाबले बिल्कुल अलग और नए लगने लगते हैं।
मानसिक वैज्ञानिक डोनाल्ड हॉफमैन का सिद्धांत (FBT) जिसका अभिप्राय है “ स्वस्थता सत्य पर जीतती है, ‘ का मानना है की विकास प्रेरित प्रक्रिया कामयाब ही होती है सत्य अथवा उसके अन्दर की वास्तविकता को छुपा कर । दुसरे शब्दों में , दुनिया में जीवन की जितनी वास्तविकता छुपाई जाने के ज्यादा तंत्र हैं , उतनी ही उसके बचे रहने की सम्भावना है| उदाहरण के लिए, "हरा रंग" देखना दुनिया को देखने के लिए तो बहुत काम आता है, पर यह हमें उस वास्तविक प्रक्रिया के बारे में कुछ नहीं बताता कि यह वास्तव में यह एक प्रकाश की लहरें पत्ते से टकराकर हमारी आँखों में आने की और दिमाग की उन्हें प्रोसेस की प्रक्रिया है | यही सिद्धांत ( FBT) एक कदम और आगे जाकर कहता है कि हमारे सभी अनुभव—यहाँ तक कि ब्रह्माण्डऔर समय भी—हमें असलियत के बारे में धोखा दे रहे हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी धारणाएं वास्तविकता के माप दंड को लेकर बेकार है; और अगर ऐसा होता तो इनसे हमें विकासवादी वंशवाद में मदद नहीं मिलती। "हरा रंग" बहुत सारी जानकारी को एक छोटे से अनुभव में समेटने का एक बढ़िया तरीका है, लेकिन हरा रंग देखने का हमारा एहसास हमें प्रकाश की तरंगों के बारे में कुछ नहीं बताता। यह हमें यह यकीन दिला देता है कि हमारे अनुभव के बाहर भी "हरा रंग " मौजूद है । अगर यह सिद्धांत (FBT) सही है, जैसा की मुझे लगता भी है, तो ध्यान (meditation) हमें वास्तविकता की मूल परतों को समझने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह हमारी पुरानी देखने की आदतों से ऊपर उठने (un-training) का एक अभ्यास है।
शायद हमें इस बात पर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि लोग ध्यान (meditation) में अक्सर ऐसी अवस्थाओं का अनुभव करते हैं जहाँ न कोई विस्तार (space) है और न ही समय (time) औए उसे ऐसी "एकता" (oneness) के रूप में महसूस किया जाता है जहाँ इंसान खुद को एक अलग "व्यक्ति" या "स्व" (self) नहीं समझता। तांत्रिक विज्ञान (neuroscience) और भौतिक विज्ञानं (physics) ने भी यह दिखाया है कि ये तीनों चीजें— विस्तार ( ब्रह्माण्ड), समय और स्व की धारणाएं भी हमारे समझ के वास्तविक भौतिक सत्य का का अलग बिगड़ा हुआ स्वरुप है | । इन्हें एक तरह से "भ्रम" (illusions) भी कहा जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि ध्यान करना हमें एक विकसित इंसान के तौर पर अपने जीवन की कद्र करना छोडने को कहता है । बल्कि इसके बिलकुल विपरीत , ध्यान हमारी जिज्ञासा और आज़ादी को बढ़ाकर हमें जीवन की सुंदरता और अनोखेपन को और गहराई से महसूस करने में मदद करता है और वर्त्तमान में जीना सिखाता है । लेकिन इसमें कोई ताज्जुब नहीं कि यह हुनर हमें कुछ मौकों पर तो वास्तविकता को और करीब से देखने में मदद करता है। अगर विकास (evolution) अपनी प्रकृति से ही हमसे सच को छिपाता है, तो यह बात समझ में आती है कि अपने मन को अपनी पुरानी विकसित आदतों और इच्छाओं से दूर करना (चाहे कुछ मिनटों या घंटों के लिए ही सही), हमें इस ब्रह्मांड की असली सच्चाई को देखने के लिए एक साफ खिड़की दे सकता है।
चिंतन के लिए बीज प्रश्न:आप इस धारणा को कैसा मानते की ध्यान हमें मूल वास्तविकता की परतें दिखा सकता है, हमारी पुरानी विकसित धारणाओं को भुलाने में मदद करके, ताकि हम उन अवस्थाओं का अनुभव कर सकें जो विस्तार, समय एवं स्व के भ्रम से ऊपर उठ के हैं? क्या अपनी कोई ऐसी कहानी साझा सकते हैं जो आपके उस पल को दर्शाती जब आपने अपनी पुरानी धारणाएं एवं सही-गलत के सोच के फैसलों को छोड़ दिया हो और तब आपको सबके साथ एक आतंरिक जुड़ाव या गहन "एकता" (oneness) महसूस हुई हो? आपको दैनिक जीवन में वर्त्तमान में उपस्थित रहने और उसी में ध्यान केन्द्रित रखने की आदत को जारी रखने में किस चीज़ से मदद मिलती है, ताकि आप इस जीवन की समस्त उपलब्ध सुन्दरता एवं अचंभों का मानवीय अनुभव कर सकें ?
Annaka Harris is the New York Times bestselling author of CONSCIOUS and writer and producer of the audio documentary series, LIGHTS ON.
Seed Questions for Reflection
What do you make of the notion that meditation can reveal a more fundamental layer of reality by "un-training" our evolved perceptions and allowing us to experience states beyond the illusions of space, time, and self? Can you share a personal story that illustrates a moment when you let go of your usual perceptions or judgments and felt a deep sense of interconnectedness or "oneness"? What helps you sustain the habit of being present and cultivating concentrated attention in your daily life, so you can deepen your experience of beauty and awe in the full range of human experience?