वो कौन है जो सही में मायने रखता है , थिओडोर रोसवैल्ट द्वारा
आलोचक नहीं है जो सही में मायने रखता है | अथवा मायने वो नहीं रखता वो नहीं जो यह बता पाता है कि कैसे एक मजबूत व्यक्ति या स्तम्भ लडखडाता है, या जो यह बताता है कि कार्य करने वाला उस कार्य को कैसे बेहतर कर सकता था |
यह श्रेय उसको जाता है जो स्वयं मैदान में उतरा हुआ है , जिसका चेहरा धूल, पसीने एवं खून से सना हुआ है , और जिसने पूरी ताक़त एवं जज्बे से कोशिश की है |
जो गलतियाँ करता है, जो थोड़े से बार बार चूक भी जाता है , क्योकि ऐसा कोई भी प्रयास नहीं है जो गलतियों और कमियों से भरा न हो |
पर वो मायने रखता है जो असल में कोशिश करके अपने कार्यों को पूरा करता है, जिसने बड़ी संभावनाएं और जज्बे देखें हैं , जिसने महान लगन और समर्पण देखा है |
जो अपने आपको एक बड़े लक्ष्य के पीछे ख़त्म कर देता है. और जो सबके अंत में एक महान उपलब्ब्धि की प्राप्ति के विजय के जश्न को भी जानता है |
और वो , जो अगर सब कुछ करके भी असफल होता है , तो वो असफल भी महान बहादुरी के बाद ही होता है , ताकि उसकी जगह उन ठन्डे एवं कमजोर इंसानों में न हो, जिन्हें न जीतना पता है , न हारना पता है |
थिओडोर रोसवैल्ट , अमरीका के 26 थ राष्ट्रपति थे |
मनन के लिए मूल प्रश्न|: आप इस धारणा को कैसे देखते हैं कि सही श्रेया उसी को मिलता है “जो वास्तव में मैदान में उतरता है “? क्या आप एक व्यक्तिगत कहानी साझा कर सकते हैं , जो उस समय को दिखाती है जब आपने एक महान प्रयास किया हो और जहाँ आपने सफलता एवं असफलता, दोनों की संभावनाओं को गले लगाया हो? आपको अपने प्रयासों में भरपूर कोशिश करने , एवं अपने आपको “सराहनीय कार्यों” में दिल एवं भरपूर जोश से लगा देने वाली आदत को विकसित करने में किस चीज़ से सहायता मिलती है ?
Theodore Roosevelt was the 26th President of the United States.