मैं चाहूंगा | लारिव अथेम के द्वारा
मैं जीना चाहूँगा , बुद्धिमत्ता और करुणा से भरा जीवन, एक सूरजमुखी की तरह , जो हमेशा उसी दिशा में मुड़ता है जहाँ उसे गहराई से पोषण मिलता है ।
मैं होना चाहूँगा अपने जानने और कुछ बनने की दहलीज़ पर , जहाँ मैं जीवन के उभरते हुए सौंदर्य को देखने के लिए आनंद और विस्मय के साथ पूरी तरह उपस्थित रह सकूं ।
मैं जीना चाहूँगा , अपने या अपने प्रियजनों के डर के बिना —इस भावना का विस्तार सभी जीवों तक करते हुए—और किसी भी जीवित प्राणी के मन में भय पैदा किए बिना।
मैं जीना चाहूँगा एक गहरे और एक गहरी निर्भीक कोमलता के साथ , और इस विश्वास के साथ कि हर परिस्थिति को संभाला जा सकता है और हर चीज़ का समाधान संभव है।
मैं जुड़ना चाहूँगा , ना केवल दूसरों के , बल्कि खुद के भी, सर्वश्रेष्ठ गुणों और क्षमताओं के प्रति पूरी तरह से सजग होकर , और उस संभावना के साथ तालमेल बिठा कर , जो इस जुड़ाव से उभरना चाहती है।
मैं अपने काम में जुड़ना चाहूँगा, एक सौभाग्यमई देन और असीम संभावनाओं की भावना के साथ ।
मैं बनाना चाहूँगा ,आपसी जुड़ाव का एक ऐसा केंद्र , जहाँ से भावनाएँ और विचार बिना किसी रुकावट के बह सकें, और जहाँ मुझे किसी भी चीज़ को पकड़कर रखने की ज़रूरत न पड़े।
मैं स्वागत करना चाहूँगा, और सहजता से खेलना कहूंगा , वर्त्तमान में उपस्थित हर पल का , हर हालात में ।
मैं जीना चाहूंगा, प्यार करना चाहूंगा— जैसे ये आमंत्रण हो ,अनंत संभावनाओं और असीमित चीज़ों के लिए ।
आप क्या चाहेंगे?
चिंतन के लिए बीज प्रश्न : आप किस तरह जीना चाहेंगे, और अपने काम से कैसे जुड़ना चाहेंगे? क्या आप दूसरों के साथ जुड़ने की कोई ऐसी व्यक्तिगत कहानी साझा कर सकते हैं, जहाँ आपने अपनी और उनकी दोनों की सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं को पहचाना और उनके साथ तालमेल बिठाया हो? ऐसी कौन सी चीज़ है जो आपको अपने काम को एक सौभाग्यमई देन और असीम सम्भावना के रूप में देखने में मदद करती है?
Seed Questions for Reflection
How would you like to live and engage with your work? Can you share a personal story of engaging with others with an attunement to your and their greatest gifts? What helps you engage in your work with a sense of privilege and possibility?