**"हम चीज़ों के जीवन (सार) में झांक पाते हैं"**
-विलियम वर्ड्सवर्थ
ये सुंदर रूप,
लंबे समय तक दूर रहने के बाद भी,
मेरे लिए उस दृश्य की तरह नहीं हैं
जैसे अंधे की आँखों के सामने कोई नज़ारा।
बल्कि, अक्सर अकेले कमरों में, या शहरों के कोलाहल में,
थकान भरे पलों में ये रूप मुझे देते रहे हैं
वो मधुर एहसास, जो रगों में बहता है,
दिल की धड़कनों में छलकता है;
और मेरे शांत मन तक पहुँचकर ताज़गी भर देता है... वो भाव भी जिन्हें याद नहीं, पर जिनकी मिठास ने
एक अच्छे इंसान के जीवन के सबसे कीमती हिस्से,
उसके छोटे, बेनाम, भुला दिए गए
ममता और प्रेम के कार्यों को
गहराई तक छुआ है।
मुझे विश्वास है, इन्हीं रूपों ने
मुझे एक और अनमोल देन दी है:
वह पवित्र भाव, जहाँ इस रहस्यमय दुनिया का बोझ,
इस अबूझ पहेली का ताक़तवर भार,
हल्का हो जाता है... वह शांतिमय भाव,
जहाँ हमारी भावनाएँ हमें धीरे से ले चलती हैं—
यहाँ तक कि इस शरीर की साँसें
और रक्त की गति भी मानो ठहर जाती है,
हम शरीर में सुषुप्त हुए, जीवात्मा बन जाते हैं;
जब समन्वय-सदभाव की शक्ति और आनंद की गहराई से
शांत हुई दृष्टि से हम देख पाते हैं चीजों के जीवन (सार) को ।
**मनन के लिए मूल प्रश्न :**
१. "शरीर में सुषुप्त होकर जीवात्मा बनने" के विचार से आप कैसे जुड़ते हैं?
२. क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बता सकते हैं जब समन्वय-सदभाव और आनंद की शक्ति से शांत हुई दृष्टि से आपने जीवन के सार को देखा हो?
३. आपको चीज़ों के जीवन सार तक पहुँचने में क्या मदद करता है?
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion of being laid asleep in body and becoming a living soul? Can you share a personal story of a time you saw with an eye made quiet by the power of harmony and joy? What helps you see into the life of things?