“कष्ट में, गहरे दर्द भरे दुख में, चतुराई को नहीं, आश्चर्यपूर्ण घबराहट को चुनें”
-टोको-पा टर्नर के द्वारा,
क्षयकारी ऑटोइम्यून बीमारी से जूझते हुए, मैं अक्सर जल्दी से जल्दी मुक्ति की कामना करता था, ताकि मेरे दर्द और पीड़ा से कुछ सार्थक निकल सके। लेकिन हर बार जब मैं कोशिश करता, बस, थकावट और भ्रम ही मिलते। फिर एक दिन, मुझे निम्नलिखित सपना आया:
मैंने सपना देखा कि एक बहुत महत्वपूर्ण पेड़ बिजली गिरने से गिर गया। ऊपर से एक बिजली गिरती है जो विशाल पेड़ को एक तारे के आकार में फैला देती है। यह एक ऐसी घटना है जो मेरे कदम रोक लेती है। इससे पहले कि मैं समझ पाऊं कि क्या हो रहा है, लोग कुशलतापूर्वक और तेज़ी से पेड़ को जलाऊ लकड़ी में बदलने के लिए आ जाते हैं। यह सब बहुत तेज़ और बेजान लगता है, जैसे कि इस नुकसान के महत्व को ठीक से समझा ही नहीं जा रहा है।
कोई कभी नहीं सोचता कि उसके ऊपर बिजली गिर जाएगी, लेकिन ऐसा ही है, बिजली गिरने स्वरूप बीमारी किसी से भेदभाव नहीं रखती है, वो कभी भी , किसी को भी हो सकती । प्रकृति के अंदर से उपजी एक शक्ति हमारे जीवन के गहरे स्थापित तरीके को तोड़ देती है। यह तीव्र और निर्दयी है, और जिसको भी हमने ठोस और विश्वसनीय माना था, वह एक पल में टहनी की तरह बिखर जाता है।
कभी कभी,एक कार्यदक्ष आतंरिक शक्ति इस स्तिथि में पड़ना चाहती है,और चाहती है इस स्तिथि से कुछ लाभकारी चीज़ निकल आये, जिस से वो इसे “आतंरिक बदलाव की शक्ति” में बदल दे। पर फिर ,एक अन्य, ज्यादा शांतिपूर्ण,आवाज़ हमें रुक जाने को कहती है | इस नुक़सान का व्यापारीकरण न किया जाये।दर्द भरी दुःख की घटनाओं में कुछ लाभकारी मतलब निकालने की हड़बड़ी न करें | जब तक कि जो बर्बाद हो गया है उसके परिमाण का हम पूर्ण मात्र में दर्शन न कर पाए हों।
कई बार इस संकट काल को एक मुक्ति की तरह भी देखा जाता है। एक तरह से देखा जाये तो जिसे गिरा दिया गया है वो एक प्रकार की जेल भी थी। और यह भी कि हालाँकि हमारा ज़मीन पर गिर जाना एक प्रकार का बेहिसाब , अनुमान से भी बाहर का , दुःख ही लायेगा, पर उसके पार , उस से उभर जाने के बाद, एक नए प्रकार से जीने का तरीका भी आ जाएगा। पर ,कृपया , हम उस दर्द भरे दुःख को अभी से कुछ लाभदायक न मानने लग जाएँ। अगर हम ये करते हैं तो अपने पुराने तरीकों में वापस चलने का प्रयास करने लग जायेंगे। हम पुराने थके हुए शब्दों में विश्वास करने लग जायेंगे। हम अपने आपके ही कार्टून बना लेंगे।आसान, तुरंत समझ आने वाले तरीक़े, जो जल्दी से और अल्पकालिक हल खोजने की हमारी इच्छा को बढ़ावा देंगे।
इसके बजाय, आइए हम सच में द्रष्टाभाव में आएँ। आश्चर्य के कोहरे को कुछ समय के लिए हमारी स्पष्टता को अस्पष्ट करने दें। यह न जानना कि हम कैसे – या कहाँ – रहेंगे। उलझन में पड़ना और दुःख से भर जाना, क्योंकि जिस पर हम हमेशा भरोसा करते थे, वह हमारे क्षितिज से दूर हो गया है। और हो सकता है कि हम फिर कभी इतने शानदार न हो सकें।
इसे स्वीकार करना निराशावादी नहीं, बल्कि हक़ीक़त को देखना और समझना है।आखिरकार, बिजली और जमीन एक-दूसरे के सहयोगी हैं। एक बार जब आप पर प्रहार हो जाता है, तो आप केवल "ऊँचे चक्रों" में नहीं रहते हैं, जो यह मानते हैं कि आप ही अपनी वास्तविकता के निर्माता हैं। या यह कि कोई उच्चतर शक्ति केवल परोपकारी है, और लोगों को अच्छे कार्यों के लिए पुरस्कृत करती है। इसके बजाय आप जीवन और मृत्यु की विरोधाभासी प्रकृति के बारे में सीखते हैं।
ज़मीन पर पटके हुए आप इस बात की सूची बनाते हैं कि क्या खो गया है, और क्या बचा है। जो आवश्यक है उसे एक निरंकुश जंगली जानवर की तरह खुद को प्रकट करने की अनुमति देना जो लंबे निर्वासन के बाद अपने मूल स्थान , अपने घर पर लौटता है। आपको एहसास होता है कि आपका टॉवर चाहे कितना भी स्थापित और ऊंचा क्यों न हो,इसके ढाँचे में, बनावट में घातक समस्याएं थीं। सच्चाई के एक झटके ने "टॉवर वे-ऑफ़-लाइफ़" ( जीवन में ऊँचे उड़ना) में अन्याय और असमानता को सामने लाया है और जब तक आप अपने नुकसान की भव्यता की व्यथा और पीड़ा को पूरी तरह से महसूस नहीं करते, तब तक आप एक बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर पाएंगे।
हाँ, इस क़त्लेआम से चेतना में एक नया तारामंडल उभरेगा, लेकिन हमें पहले खुद को अचंभित (आश्चर्य चकित) होने देना चाहिए। इसलिए आइए मुक्त होने में जल्दबाजी न करें। जैसा कि रूमी कहते हैं, "अपनी चतुराई छोड़ो और अचंभित (आश्चर्य चकित) , घबराहट लाओ ।" क्योंकि चतुराई में आप दुनिया को बनाने के जाने-पहचाने हुए तरीकों पर भरोसा करते हैं, आश्चर्य चकित घबराहट में आख़िरकार हमेशा एक नई दृष्टि उभरती है।
चिंतन के लिए बीज प्रश्न: —
- व्याकुलता भरी घबराहट के कोहरे (मानसिक व्यग्रता) का सामना करते समय दृष्टाभाव (साक्षीभाव) रखने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है। - ऐसे समय में जब आप "दिल टूटने की घटनाओं को सार्थक और लाभदायक बनाने में जल्दबाजी नहीं करते", तब आपको.जीवन ने क्या नए सबक सिखाये ?
- एक ऐसा समय साझा करें जब आपने किसी नुकसान की भव्यता की व्यथा और पीड़ा को पूरी तरह से महसूस किया हो, उसका शोक मनाया हो और फिर उससे लंबे निर्वासन के बाद घर लौटने (अपने मूल स्वभाव) में अचंभे (आश्चर्य चकित) घबराहट को महसूस किया हो।
Toko-Pa Turner explores the themes of exile and the search for belonging -- particularly around dreamwork, mythology, wisdom, and poetry. Excerpted from
here.
Seed Questions for Reflection
What has helped you bear witness while facing a fog of confusion? In times when you haven't been "hasty to make events of heartbreak meaningful", what new lessons did life reveal? Share a time when you fully grieved the grandeur of a loss, and felt bewilderment in returning home after a long exile.