साथ - साथ मौन रहें, — हावर्ड थर्मन
“अभी तक हम एक-दूसरे को जानते नहीं हैं, हमने अभी तक साथ-साथ मौन रहने का साहस नहीं किया है।” वाणी की क्षमता कितनी अनमोल देन है! वाणी की ध्वनि के माध्यम से किसी निश्चित अर्थ और विचार को व्यक्त कर पाना; अपने भीतर के जीवन में बसे भावों को दूसरे के सामने रख पाना; और ऐसे प्रतीकों के माध्यम से स्वयं को प्रकट कर पाना, जो हमारे भावनाओं को स्पष्ट करें, उसे विकृत न करे —यह वाणी के शब्दों का चमत्कार भी है और उनका वरदान भी।
इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं कि मनुष्य अपनी ही वाणी की ध्वनि को मानो पूजने लगते हैं और उसे उस से भी अधिक अधिकार दे देते हैं, जो सारे शब्दों के कह चुकने के बाद शेष रह जाता है। मौन पर हमें भरोसा नहीं होता; हमें लगता है कि उसमें कुछ विघटनकारी है, इसलिए उसे छिपा देना चाहिए। मौन का भय ही वह अर्पण है, जिसे हम शब्दों की वेदी पर चढ़ाते हैं। इसका एक कारण बोलने के अनुभव की अपार समृद्धि भी है। हम नहीं चाहते कि यह अनुभव हमसे छूट जाए, क्योंकि तब हमें फिर से उस विशाल प्रदेश में उतरना पड़ेगा जहाँ शब्द नहीं हैं, जहाँ वाणी नहीं है।
यह याद रखना महत्त्वपूर्ण है कि हर ध्वनि मौन से ही जन्म लेती है; और इसी निश्चलता में वह शब्द आकार ग्रहण करता है, जो आगे चलकर किसी अर्थ को व्यक्त करता है। यहीं, बिना शब्दों वाली ध्वनि को सबसे स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है; यहीं उन अर्थों की गहराई में उतरा जा सकता है, जिनसे हमारे सारे मूल्य जन्म लेते हैं। हम कल्पना ही नहीं कर सकते कि वह स्त्री या पुरुष कैसा होगा जिसने कभी मौन का अनुभव ही न किया हो। “ अभी तक हम एक-दूसरे को जानते नहीं हैं , हमने अभी तक साथ-साथ मौन रहने का साहस नहीं किया है।”
चिंतन के लिए बीज-प्रश्न : आप इस धारणा से कैसे जुड़ते हैं कि मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं है, बल्कि वही धरती है जहाँ से वे शब्द जन्म लेते हैं और उस अर्थ के लिए आकार ग्रहण करते हैं जिसे वे व्यक्त करना चाहते हैं? और यह विचार आपके भीतर क्या जगाता है कि मौन से हमारा डर शायद वह अर्पण है, जो हम स्वयं को उस विशाल, शब्दहीन आंतरिक प्रदेश में उतरने से बचाने के लिए करते हैं? क्या आप अपने जीवन के ऐसे क्षण की कोई निजी कहानी साझा कर सकते हैं, जब किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बिताए गए मौन ने—या फिर अपने भीतर के मौन ने—आपके सामने ऐसी कोई बात खोल दी हो, जिस तक किसी भी मात्रा में बोले गए शब्द नहीं पहुँच सकते थे? वो कौन सी चीज़ है जो आपको अकेले में, या किसी प्रिय व्यक्ति की उपस्थिति में, पर्याप्त देर तक मौन रहने का साहस देती है , और वो भी इतनी देर कि आप वास्तव में अपने आपको या उन्हें जानना शुरू कर सकें?
An Excerpt from The Inward Journey, pgs. (52-53)
How do you relate to the notion that silence is not merely an absence but the very ground from which words are "fashioned for the meaning they convey" - and what does it stir in you to consider that our fear of silence might be a kind of offering we make to keep ourselves from descending into that vast, wordless region within? Can you share a personal story of a moment when silence with another person - or even within yourself - opened something that no amount of speech could have reached? What helps you dare to be silent, whether alone or in the presence of someone you love, long enough to begin to truly know them?