जब समाधान सच्चाई को टालने के तरीके बन जाते हैं
- बायो अकोमोलाफे
जब चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं, जब प्रयोगशाला एक धमाके में बिखर जाती है — कांच के टुकड़े, धुआं, और अच्छी नीयतें सब हवा में उड़ जाते हैं — तो हम आमतौर पर सोचते हैं कि क्या गलत हुआ। ताकि उससे कुछ सबक लिया जा सके। यह बहुत सामान्य है। शायद हम सभी ऐसा करते हैं।
लेकिन हाल ही में मैं सोचने लगा हूं कि क्या यह प्रक्रिया — यानी हर विफलता को तर्क से समझने और समाधान खोजने की कोशिश — कहीं कुछ और से बचने की कोशिश तो नहीं है? क्या हम कुछ और देखने से चूक रहे हैं?
योरूबा (नाइजीरिया की एक संस्कृति) की एक कहावत है:
“राजा का महल जलता है, और वह और भी सुंदर हो जाता है।”
शायद यह बात आपने भी किसी रूप में सुनी हो — जैसे “हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है” या “हर नुकसान में कोई फायदा छिपा होता है”।
लेकिन मेरा मानना है कि योरूबा की यह कहावत कुछ और, कुछ गहरा कह रही है।
यह हमें सिखा रही है कि विफलता को केवल सुधारने या उससे “सीख” निकालने की चीज़ न समझें — बल्कि कभी-कभी खुद को उस विफलता के हवाले कर देना भी जरूरी है।
हवा में उड़ते धुएं, हमारे टूटे हुए इरादे, वह गड़बड़ जो हमने रोकी नहीं — शायद वहीं कहीं कोई रहस्य छिपा है।
हो सकता है कि जीवन हमारे सबसे अच्छे प्रयासों से नहीं चलता।
कभी-कभी हमें उस ठहराव में रुक जाना चाहिए —
जहाँ कुछ नहीं हो रहा,
जहाँ सब कुछ गड़बड़ है,
जहाँ शरीर जवाब नहीं दे रहा,
जहाँ याद की गई बातें याद नहीं आ रहीं,
वे गीत अब वहाँ रहते हैं, जहाँ भटके हुए प्रेमी बसा करते हैं — वो भी, जिन्हें उनके अपने सृजनहारों ने भुला दिया।
कब समाधान सच्चाई को टालने के तरीके बन जाते हैं?
क्या कभी यह भी ठीक है कि हम कुछ और आज़माएँ?
क्या हम इन टूटे हुए क्षणों को एक नये प्रकार की समृद्धि के दूत मान सकते हैं — ऐसी समृद्धि, जो खोई हुई चीज़ों से नहीं, बल्कि खोने की क्रिया से आती है?
विफलता कठिन होती है। अपमानजनक भी लग सकती है।
लेकिन हो सकता है,
वहाँ भी कुछ सुंदर हो —
जैसे माँ काली की बिखरी जटाओं में छुपी कोई नरम सी रौशनी।
शायद थोड़ा सा झुक जाना ही काफी हो
उस तूफ़ान के सामने
जो चीखता हुआ मैदानों में दौड़ रहा है,
और पीछे एक उजड़ा हुआ शहर छोड़ गया है।
“काले बकरे को दिन में ही ढूंढ़ो,” एक और नाइजीरियन कहावत है।
समाधानों का भी एक समय होता है।
और फिर ऐसे समय भी आते हैं जिन्हें हम नाम भी नहीं दे सकते।
उन्हें वैसा ही गुजर जाने दो।
मनन के लिए मूल प्रश्न:
•आप उस धारणा को कैसा मानते हैं , कि बुधिमत्ता इसी में हो सकती है को कोई असफलता आने पर हम उसे पूरी तरह अपना लें, बजाये इसके कि हम सिर्फ सिर्फ विश्लेषण करने लग जाएँ उसके समाधान के लिए?
• क्या आप कोई ऐसा निजी कहानी साझा कर सकते हैं, जब आपने किसी टूटन या अस्थिरता का अनुभव किया हो और उसे अपनाया हो — और उससे कोई अनपेक्षित सुंदरता या समझ सामने निकल कर आई हो?
• असफलता एकं अस्थिरता के क्षणों को उभरने देने में एवं हडबडाहट में उनके समाधान नहीं खोजने और उन्हें सही नहीं करने में , आपको किस चीज़ से मदद मिलती है ?
Seed Questions for Reflection
What do you make of the notion that there may be wisdom in allowing oneself to be "taken" by failure, rather than simply analyzing it for solutions? Can you share a personal story that reflects the experience of embracing disruption or failure in a way that led to unexpected beauty or insight? What helps you allow moments of "failure" and "disruption" to unfold without rushing to resolve or fix them immediately?