“ध्यान देना” अमीशी पी. झा के द्वारा
माना जाता है कि ध्यान को विकसित किया गया है , मस्तिष्क की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को हल करने के लिए: मस्तिष्क की समझने की क्षमता से कहीं अधिक जानकारी हमारे वातावरण में है। फ़िल्टर किए बिना, हमें लगातार प्राप्त होने वाली संवेदी उत्पादक सामग्री, असहनीय भारी होगी , और प्रभावी ढंग से कार्य करने में भी असमर्थ होगी। ध्यान के बारे में सोचने का एक तरीका यह है कि यह एक मशाल की तरह है।यह हमें अपने मस्तिष्क के संग्रहक संसाधनों को सूचना के एक छोटे हिस्से को चुनने और निर्देशित करने की अनुमति देता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम जो पत्र पढ़ रहे हैं और हमारी समझ, आपस में विशद और स्पष्ट रहे, हम पढ़ते समय पृष्ठ के एक हिस्से पर अपनी दृष्टि को सीमित कर सकते हैं; या हम अपनी ध्यान देने वाली मशाल को हमारे साथ बात कर रहे अपने साथी की और निर्देशित कर सकते हैं ताकि उसकी आवाज को भीड़-भाड़ वाले कमरे में भी हम अच्छी तरह से सुन पाए। मस्तिष्क के स्तर पर,संवेदी तंत्रिका गतिविधि को, ध्यान, चुनिंदा रूप से पूर्वाग्रहित करके काम करता है इससे जो जानकारी पर ग़ौर किया है बनाम जो जानकारी उपेक्षित है, में ग़ौर की गई जानकारी बेहतर तंत्रिका प्रतिक्रिया दिखाती है।
संवेदी इनपुट, ध्यान और संबद्ध कार्यकारी नियंत्रण प्रक्रियाओं (जैसे कार्यशील स्मृति) के हमारे प्रत्यक्ष ज्ञानात्मक अनुभव पर उनके प्रभाव के अलावा, सफल सामाजिक क्षमताओं, भावना नियंत्रण, स्मृति, निर्णय लेने की शक्ति और कार्य प्रदर्शन से बहुत करीबी जुड़ा है। ध्यान हमारे जीवन के पल-पल के अनुभव को निर्धारित करता है - हम कैसे बातचीत करते हैं, महसूस करते हैं, याद करते हैं, सोचते हैं और प्रदर्शन करते हैं। इन सभी कार्यों पर इसका प्रभाव है, इसलिए ध्यान शक्तिशाली है।
जबकि यह हमें दुनिया भर में पैंतरेबाज़ी के लिए एक मजबूत विकासवादी लाभ प्रदान करता है, इतने सारे सूचना प्रसंस्करण डोमेन पर ध्यान के शक्तिशाली प्रभाव का एक बड़ा नकारात्मक पहलू है। अगर ध्यान में हम कमी करते है, तो हमारी देखने, बातचीत करने, महसूस करने, याद रखने आदि की क्षमता भी कम होगी। यह आश्चर्य की बात नहीं है, यह कमी हमारे जीवन के कई क्षेत्रों में समस्याएं पैदा कर सकती है।
उदाहरण के लिए, एक अध्ययन में, हमने प्रतिभागियों से उन चेहरों पर ध्यान देने के लिए कहा जो स्क्रीन पर एक-एक करके दिखाए जा रहे हैं, और प्रत्येक चेहरे के बारे में स्पष्ट निर्णय लेने के लिए एक बटन दबाने के लिए कहा । जैसे ही उन्होंने ये कार्य किया, हमने उनकी मस्तिष्क में चल रही गतिविधि को रिकॉर्ड किया। समय-समय पर, हम ध्यान भंग करने वाली छवियां प्रस्तुत करते थे जो कार्य के लिए प्रासंगिक नहीं थीं,या जो नकारात्मक हो सकती हैं (उदाहरण के लिए, मानव पीड़ा के दृश्य) या तटस्थ (रोजमर्रा की अहानिकर घटनाओं के दृश्य, उदाहरण के लिए, बस में बैठकर किताब पढ़ रहे हैं) ) हम जानना चाहते थे कि तटस्थ छवियों की तुलना में नकारात्मक छवियों के प्रकट होने के समय प्रदर्शन और मस्तिष्क गतिविधि में अंतर था या नहीं।न केवल नकारात्मक (बनाम तटस्थ) छवियों के आसपास कार्य प्रदर्शन खराब था, बल्कि चेहरे को समझने से संबंधित मस्तिष्क की गतिविधि भी कम हो गई थी। यह ऐसा था जैसे ध्यान भंग करने वाली नकारात्मक छवियों के दौरान चेहरों पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में ध्यान देने योग्य मशाल से समझौता किया गया था। यह आश्चर्यजनक था क्योंकि विचलित करने वाली छवियां केवल चेहरों के पहले या बाद में दिखाई देती थीं, यह बताता है कि नकारात्मक छवियों की स्मृति या अपेक्षा भी चेहरे की उस धारणा से ध्यान हटाने के लिए पर्याप्त थी जैसे वे दिखाई देते थे।
ध्यान की नाजुक प्रकृति को देखते हुए, विशेष रूप से बाहरी और आंतरिक व्याकुलता के अंतराल के तहत, हम महंगी ध्यान चूक को रोकने के लिए क्या कर सकते हैं? सरल उत्तर है : हाथ में जो काम है उस पर ध्यान केंद्रित करें और व्याकुलता से विचलित न हों। लेकिन यह दो कारणों से उपयोगी सलाह नहीं है। सबसे पहले, हमारे जागने वाले क्षणों के 30 से 50% के बीच मानव मन भटकता है। दूसरा, जब हम भटकते हैं, तो अक्सर हम खुद भी इससे अनजान होते हैं। इस प्रकार, चूंकि हम जागरूकता के बिना भटकने के लिए इच्छुक और प्रस्तुत हैं, इसलिए विलियम जेम्स ने जो सुझाव दिया है, वो शायद एक अधिक उचित दृष्टिकोण है, कि बार-बार भटकनेवाले ध्यान को वापस अपनी जगह पर लाएं।
“ भटकते हुए ध्यान को बार-बार स्वेच्छा से वापस लाने की क्षमता, हमारी निर्णय शक्ति , चरित्र और इच्छा का मूल है। कोई भी आत्म-संयमी नहीं है अगर उसके पास नहीं है। जो शिक्षा इस संकाय में सुधार करेगी वह उत्कृष्ट होगी। लेकिन इस आदर्श को लागू करने के लिए व्यावहारिक निर्देश देने की तुलना में इसे परिभाषित करना आसान है।" --विलियम जेम्स (1890)
मनन के लिए मूल प्रश्न: आप इस धारणा से कैसे संबंधित हैं कि हमारा ध्यान और हम चीजों को कैसे संसाधित करते हैं, ये दोनो, आसानी से जोखिम में आ सकते है , ध्यान भंग करने वाली उस सामग्री से जो हमारे अभी चल रहे कार्य के लिए अप्रासंगिक हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत कहानी साझा कर सकते हैं जब आपने बार-बार भटकते हुए ध्यान को वापस लाया हो? भटकते हुए ध्यान को वापस लाने में क्या बात आपकी मदद करती है?
Amishi Jha is a professor of Psychology and Director of Contemplative Neuroscience, University of Miami and author of the national bestseller,
Peak Mind. Excerpted from
here.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that our attention and how we process things can be easily compromised with distracting inputs that are irrelevant to the task at hand? Can you share a personal story of a time you brought back a wandering attention again and again? What helps you bring back a wandering attention?