
“साँसों के बीच की निस्तब्धता ( खामोशी)”
— स्टीफ़न लेविन
साँसों के बीच एक निस्तब्धता ( खामोशी) होती है,
जब हृदय एक पवित्र ज्योति बन उठता है,
और अंतर्मन की गाँठें खुल जाती हैं;
जो मुझे याद दिलाती हैं
कि एक और दिन तुम्हारे पास जागना
कितना अद्भुत है।
मृत्यु के अंतरालों के बीच
हमने साथ-साथ स्वप्न देखे,
साँसों के बीच, उस स्थिर नीरवता में,
जिसने तब से हमें
अभिन्न रूप से जोड़े रखा है।
उस पहली साँस के साथ
हम जीवन के नृत्य-मंच पर कदम रखते हैं,
और शून्यता के बीच अनजाने ही 'वॉल्ट्ज़' (नृत्य) करते हैं।
हम जहाँ भी मुड़ते हैं,
हर दिशा में पवित्रता ही पवित्रता है।
जैसे-जैसे भौतिक रूप उदारता से विलीन होता है,
अंततःकेवल वह 'Beloved' (प्रियतम) ही शेष रह जाता है।
इस क्षण में,
जो एक सम्पूर्ण जीवन जितना विस्तृत है,
ऐसी कोई जगह नहीं
जहाँ तुम मेरे पास न हो,
जहाँ तुम मेरे भीतर
मेरे साथ न चल रहे हो।
मनन के लिए मूल प्रश्न-
* आप इस कविता में 'Beloved' (प्रियतम) की धारणा से स्वयं को कैसे जोड़ते हैं?
* क्या आप कोई व्यक्तिगत कहानी साझा कर सकते हैं जो उस क्षण को दर्शाती हो जब आपने अपने भीतर किसी अकथनीय लेकिन गहरे 'पवित्र तत्व' के साथ संबंध महसूस किया हो?
* रोज़मर्रा के पलों में अपने भीतर की पवित्रता के प्रति जागरूक रहने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है?
Excerpt from Breaking the Drought.