सूरजमुखी में संसार को देखना , द्वारा थिच नहत हंह ( Thich Nhat Hanh)
मैं दक्षिण पश्चिमी फ्रांस के, दोर्दोगने छेत्र. के, प्लम गाँव में रहता हूँ, जो सूरजमुखी फूलों के लिए मशहूर है| हालाँकि जो व्यक्ति प्लम गाँव में अप्रैल में आते हैं उन्हें सूरजमुखी फूल नहीं दीखते| वो लोगों को कहते हुए सुनते तो हैं, कि यहाँ पे काफी मात्रा में सूरजमुखी फूल हैं,पर उन्हें वो नज़र नहीं आते| वहां के किसानों से बात करें तो वे कहते हैं कि उन्हें सूरजमुखी फूल खूब नज़र आते हैं, क्योंकि उन्होंने सूरजमुखी फूलों के बीज बो रखे हैं|उन्होंने जमीन को जोत दिया है, बीज बो दिए हैं, और खाद भी बिछा दी है| उन्हें पता है कि सिर्फ एक और हालात जरूरी है, सूरजमुखी को उगने के लिए.| वो अंतिम जरूरत है गरमाहट | जैसे जैसे मौसम में गरमाहट आएगी, सूरजमुखी फूल अंकुरित होंगे, और यदि मौसम गरम होता जायेगा , जून जुलाई में सूरजमुखी फूल खिलेंगे|
यानि कि किसान वो देख सकते हैं जो बाहरी व्यक्ति नहीं देख पाते| हम कहते हैं कि यहाँ सूरजमुखी नहीं है, क्योंकि हम अप्रत्यक्ष कारणों को , जो धैर्यपूर्वक इंतेज़ार कर रहे हैं, नहीं देख पाते| हम इस तरह की सोच रखते हैं कि जब तक हम सूरजमुखी फूल को देख नहीं पाते तब तक वो होते नहीं हैं, और जैसे ही वो दीखने मैं आते हैं, उनका अस्तित्त्व आ जाता है|
ये शब्द कि “ वो होते नहीं हैं” सही नहीं है, और ये शब्द की “वो होते हैं” भी सही नहीं है|जब तक कोई चीज़ प्रकट नहीं होती , तब तक हम उसे अस्तित्व हीन मानते हैं, और जैसे ही प्रकट होती है, हम उसे अस्तित्व पूर्ण मानने लग जाते हैं| हालाँकि अस्तित्व हीन , एवं अस्तित्व पूर्ण, दोनों स्थिति सत्यता से दूर हैं | इसलिए , हमें फूलों के खिलते हुए दीखने का इंतज़ार किये बिना ही मान लेना चाहिए कि फूल हैं| वो वहीँ हैं, अद्रश्य हैं, और यह कि हम उन्हें देख पायेंगे की नहीं, समय और कुछ सुप्त स्थितियों पर निर्भर करता है|
मनन के लिए बीज प्रश्न: आप इस बात से कैसे नाता रखते हैं कि, अस्तित्व हीन और अस्तित्व पूर्ण, दोनों श्रेणियां , वास्तविकता से परे हैं| क्या आप कोई ऐसे समय का अनुभव साझा कर सकते हैं, जब आप किसी चीज़ को उसके अंकुरित होने के पहले ही देख पाए हों? जो प्रकट होने का इंतज़ार कर रहा हो, उसे देखने में आपको किस चीज़ से सहायता मिलती है?
Thich Nhat Hanh is a Buddhist monk, an author, a teacher, and a global luminary who was nominated for Noble Peace Prize by Martin Luther King Jr.
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that both existence and non-existence are categories that do not correspond to reality? Can you share an experience of a time you were able to see what was latent far before it manifested? What helps you see that which is waiting for the right conditions to bloom?