केवल जो आपका नहीं है उसे त्याग दें
- शैला कैथरीन द्वारा (२८ अगस्त, २०१९)
बुद्धिमान लोग किसी चीज़ को त्याग देने के महत्व को समझते हैं - यहां तक कि उन चीजों को त्याग देने का जिनके लिए हम बहुत प्रयास करते हैं और प्राप्त करते हैं। ध्यान का प्रशिक्षण अवशोषण के स्तरों को प्राप्त करने के बारे में नहीं बल्कि चीज़ों का त्याग करने के बारे में है । आध्यात्मिक जीवन आपको उन सभी चोजों को त्यागने के लिए आमंत्रित करता है जो आपको बांधती हैं, चाहे वह आपकी पोषित कल्पनाएं, विनाशकारी दृष्टिकोण, धारणाएं, विचार, या क़ीमती भूमिकाएं, विश्वास और आदर्श हों।
"यदि आप पीड़ित नहीं होना चाहते हैं, तो बंधन में न पड़ें" बुद्ध के सभी निर्देशों के मुख्य जोर को संक्षेप में यूँ प्रस्तुत कर सकते हैं । लेकिन अगर आप उस सरल निर्देश का पूरी तरह से पालन नहीं कर सकते और आपको मदद के लिए अधिक जटिल दृष्टिकोण की ज़रूरत है (जैसा कि हम में से बहुत से लोग करते हैं) या आपको तब तक व्यस्त रखते हैं जब तक कि आप अंत में चिपके रहने से थक नहीं जाते, तो ध्यान साधकों की कई पीढ़ियों ने ध्यान करने के के तरीक़े इजाद किए हैं ।
और फिर भी, अगर किसी भी समय पर आप अनिश्चित हैं कि इस अभ्यास में क्या करना है, तो अपनी पकड़ में ढील दें।
यह अनिवार्य रूप से करने का एक और कार्य नहीं है । यह, बस वो है, जो तब होता है जब आप किसी चीज़ से चिपके नहीं रहते: अनुभव के एक क्षण में उत्पन्न होने वाली ज्ञान की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति। सरल ज्ञान हमें बताता है, "जब आपको घसीटा जा रहा है, तो पट्टे को ढील दे दें ।" जब आप खिंचेने का दर्द महसूस करते हैं और समझते हैं कि आपके दुख का कारण चीज़ों को पकड़े रहना है, तो समाधान स्पष्ट हो जाता है।
कुछ लोगों को डर होता है कि चीज़ों का त्याग कर देने से उनके जीवन, स्वास्थ्य, क्षमताओं, उपलब्धियों, या व्यक्तिगत संपत्ति की गुणवत्ता कम हो सकती है। इसके लिए, बुद्ध ने कहा, "जो कुछ तुम्हारा नहीं है, उसे त्याग दो; जब तुम इसे त्याग देते हो, तो वो तुम्हें अपने कल्याण और आनंद की ओर ले जाएगा।" यह एक गहन सोच करने का आमंत्रण देता है कि हम प्रामाणिक रूप से किन चीज़ों को अपना कहने का दावा कर सकते हैं। जैसे जैसे हम सभी भौतिक और मानसिक प्रक्रियाओं के नश्वर, अनुकूलित चरित्र को समझते हैं, हम धारणाओं, संवेदी अनुभव और भौतिक चीजों को कब्जे के क्षेत्र के रूप में देखना समाप्त करते हैं। सतह पर ऐसा लगता है जैसे हमें सब कुछ छोड़ देने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन उसके साथ ही यह अहसास भी होता है कि वास्तव में क़ब्ज़ा करने के लिए कुछ भी नहीं है और फलस्वरूप कुछ भी नहीं है जिसे वास्तव छोड़ा जा सकता है। महान परित्याग स्वामित्व की अवधारणा को ही छोड़ देना है।
ध्यान में किसी चीज़ को छोड़ देना वह त्याग है जिसमें कोई नुकसान नहीं होता है। नश्वरता को पहचानने से चीजों की असल और ना समझ आने वाली प्रकृति का एहसास होता है। चीजों के इस मूल तथ्य को जानने के बाद, किसी को डरने की कोई बात नहीं है। और जो असाधारण खुशी इस अहसास के साथ पैदा होती है, वो सभी अस्थायी सुखों को पार कर जाती है, उस बचे-कुचे भय को भी नरम कर देती जो फिर से उसे पकड़ना चाहता है जिस पर वास्तव में कभी क़ाबू नहीं हो सकता।
विचार के लिए मूल प्रश्न: 'ऐसा त्याग जिसमें कोई हानि नहीं है' का क्या अर्थ है? क्या आप उस समय की व्यक्तिगत कहानी बाँट सकते हैं, जब आपने पट्टे को ढील दे दी हो? आपके दैनिक जीवन में चीजों की नश्वरता को पहचानने में क्या मदद करता है?
शैला कैथरीन एक ध्यान शिक्षक हैं, जो अवशोषण की गहरी अवस्था में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। ऊपर का अंश उनकी पुस्तक, फोकस्ड एंड फियरलेस से है।
Shaila Catherine is a meditation teacher, with particular expertise in deep states of absorption. Excerpt above is from her book, Focused and Fearless.
Seed Questions for Reflection
What does 'relinquishment that involves no loss' mean to you? Can you share a personal story of a time you let go of the leash? What helps you recognize the impermanence of things in your daily life?