वर्तमान में कदम रखना एक उपहार है
-- कैरोलाइन हॉब्स (३ अगस्त, २०१६)
हम में से अधिकांश ने अहंकार के बारे में सुना है और बिना जाने हम अहंकार को अपने जीवन को चलाने देते हैं। लेकिन हम में से बहुत कम को यह मालूम है कि किस गहराई से हमारा अहंकार - हमारा वो छोटा, कम परिपक्व, रक्षात्मक हिस्सा जो व्यक्तिगत रूप से हर छोटी बात पर प्रतिक्रिया देता है - वर्तमान का विरोध करके हमें तोड़-फोड़ देता है। चाहे वो ज़ोर और रौब से बोले या हौले और मोहकता से, हमारा अहंकार हमें यह समझाने में खर्च हो जाता है कि हमारे पास बेकार, बोरिंग वर्तमान पर अपना समय बर्बाद करने की बजाए और अधिक महत्वपूर्ण चीजें और योजनाऐं और काम हैं। लेकिन इस सब वाहवाही के नीचे, अहंकार वर्तमान को जीवन के लिए खतरनाक प्लेग की तरह समझता है।
हमारे जीवन में अहंकार का काम है हमें हर हाल में सुरक्षित रखना। एक सुरक्षा प्रबंधक के रूप में, यह अपने काम को बहुत गंभीरता से लेता है। यह अपने को रोक नहीं सकता। लेकिन सिर्फ पास की चीजें देख पाने की वजह से, यह भय और वास्तविकता के बीच के अंतर को समझ नहीं पाता। अगर यह खुद को यह विशवास दिलवा लेता है कि हमारा प्रेमी संभवतः हमें चोट पहुंचा सकता है, तो हमारे रिश्ते को नष्ट करने के लिए अहंकार कुछ भी करता है। अहंकार अपने सब वफादार सैनिकों - डर, चिंता, संदेह, आलोचना, और निराशा- को अपनी नवीनतम लूटपाट पर लगा डेता है।
याद रखें, सुरक्षा (न कि खुशी या प्रेम) अहंकार का एकमात्र लक्ष्य है। हमें संभव चोट, बेचैनी, बीमारी, पीड़ा या दर्द से - विशेष रूप से एक टूटे हुए दिल से - बचाने के लिए हमें मदद करने के लिए यह हर किस्म की रोक लगा देता है। दिन भर, अहंकार हमारे दिमाग को लगातार विचारों, यादों, कल्पनाओं, भयों, पछतावों, योजनाओं, चिंताओं, निराशाओं से भरता रहता है - हमारा ध्यान खींचने के लिए कुछ भी। हम कह सकते हैं कि अहंकार को वर्तमान से डर लगता है।
दादी की शादी की अंगूठी और पिताजी की सोने की घड़ी के अलावा, हमें अहंकार की धोखाधड़ी के लिए एक निर्विवाद वफादारी भी विरासत में मिली है। जब यह हमारे वर्तमान के अनुभव को "अच्छा" या “बुरा” का नाम देता है, तो हम इसके निर्णय को मान लेते हैं। जब यह भविष्य की चोटों से बचने की बेकार कोशिश में अतीत की चोटों का विश्लेषण करने में घंटों लगा देता है, हम उसके निष्कर्षों को पूरी तरह मान लेते हैं। जब अहंकार मेरे विचार, मेरी भावनाओं, मेरी ज़रूरतों के बारे में रसभरी कहानियों के साथ हमें मोहित कर लेता है - यह जानते हुए कि हमारी कहानियों का हम पर क्या असर पड़ता है- हम फिर उनमें फंस जाते हैं।
हम कौन हैं, उसके छोटे से एक भाग के लिए हमारी सम्पूर्ण वफादारी पर सवाल उठाने का समय अभी है। सतह के नीचे एक खरोंच इस बात को सामने ले आती है कि अहंकार कैसे एक पांच वर्षीय बच्चे की तरह सोचता और काम करता है। किसी भी अपरिचित, अप्रत्याशित, आकस्मिक चीज़ जो परेशानी पैदा कर सकती है, उसके शुरू होते ही यह बिस्तर के नीचे छिप जाता है, और साथ ही हमारे लिए और अधिक दुःख पैदा करता है।
अगर हमारा लक्ष्य स्वतंत्रता और खुशी है, तो हमें अहंकार की चतुर हरकतों के आर-पर देखने की जरूरत है।
कुछ गहरी खोज करने की ज़रूरत है।अहंकार ने सदियों पहले अपने खेलों पर महारत हासिल कर ली थी और हर बार जब यह हमारे ध्यान को खींचता है, उन्हें और बेहतर बना लेता है। सबसे पहले, हमें अहंकार के इस झूठे मुख्य स्तम्भ को कि, "अगर तुम अगली बार इस चीज़ को ठीक से कर लोगे तो तुम्हें कभी दुखी, निराश, डर या वंचित महसूस नहीं करना पड़ेगा” इस सच् से बदलना होगा कि: “दुख जीवन के साथ आता है।" हम अहंकार की सम्मोहक कहानियों पर मुस्कराते और सर हिलाते हैं और, इसके बजाय, हम अपने इतना विश्वास करने वाले दिल को हौले से कहते सुनते हैं कि, "तुम्हें आसानी से डर या शक को सीधे महसूस करने और फिर उसे छोड़ देने की खुली छुट्टी है।” [...]
हम डर या आलोचना को रोक नहीं सकते। इससे पहले कि पहले हमें उनके बारे में सोचने का समय मिले, अहंकार के विचार पहुंच जाते हैं। लेकिन हम क्या प्रतिक्रिया दें, इस बात का हम होशपूर्वक चुनाव कर सकते हैं। वर्तमान में कदम रखना एक ऐसा उपहार है जो हम अपने आप को कभी भी, कहीं भी, किसी भी क्षण दे सकते हैं। उपस्थिति, हमारी भीतरी कम्पस, हमारे चुनावों को मन की शांति और स्वतंत्रता की ओर मार्गदर्शित करती है।
विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस धारणा से क्या समझते हैं कि सुरक्षा ही अहंकार का एकमात्र लक्ष्य है? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब अहंकार की सम्मोहक कहानियों को छोड़कर आप अपने दिल की बात सुन पाए हों? वर्तमान में कदम रखने के लिए आपको कौनसी साधना से मदद मिलती है?
कैरोलाइन हॉब्स की पुस्तक, खुद को आज़ाद करो, के कुछ अंश। कैरोलाइन हॉब्स एक विपश्यना ध्यानी, शिक्षक और लेखिका हैं।
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that safety is ego's single goal? Can you share a personal story of a time you were able to hear your heart over ego's compelling stories? What practice helps you give yourself the gift of stepping into the present?