To Be On A Spiritual Path

Author
Jan Phillips
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Image of the Weekआध्यात्मिक राह पर चलना
-जैन फिलिप्स (५ मार्च, २०१४)

"आध्यात्मिक राह पर चलने का अर्थ है सचेतता से जीना, राह में आने वाले संकेतों पर ध्यान देना और अपने शरीर की ओर जागरूक रहना - जिस माध्यम से हम यह रास्ता तय कर रहे हैं - और इस यात्रा में चल रहे और यात्रियों की ज़रूरतों और सुरक्षा पर ध्यान देना।

"आध्यात्मिक राह पर चलने का अर्थ है कि हम उतना ही अपने अंदर झांक कर देखें जितना हम बाहर की ओर देखते हैं, यह जानते हुए कि हमारी बाहर की ज़िंदगी हमारे विचारों और शब्दों की झलक है, जिसकी हम अपनी धुन के आवेश से कल्पना कर रहे हैं और जिसे हम प्रकट होने की शक्ति दे रहे हैं, उसी की अभिव्यक्ति है।

“आध्यात्मिक राह पर चलने का अर्थ है कि हम अपनी गाड़ी में लगे पीछे देखने के शीशे में देखते रहें कि हमारे पीछे का रास्ता कचरे से भरा नहीं है और हम अपने कचरे से किसी दूसरे की यात्रा में रुकावट नहीं डाल रहे हैं। इसका अर्थ है अपने अतीत से समझौता कर पाना, यह समझते हुए कि हमारा अतीत हमारे भविष्य में समा जाता है, और अब तक जिन चीज़ों के साथ हम चिपके हुए हैं जो हमारे रस्ते में बाधा डाल सकती हैं, उन्हें स्वीकार करने, उन्हें माफ़ कर पाने और छोड़ पाने की हिम्म्त जुटा पाना।

“आध्यात्मिक राह पर चलना अपनी प्रतिबद्धताओं (कमिटमेंटस) के आधार पर अपने खुद के सिद्धांतों को बनाने की ज़िम्मेवारी लेना है, और जो दूसरे लोग यही करना चाहते हैं, उनके इस अधिकार का आदर करना है। इसका अर्थ उन धारणाओं को जिन्हें हमने विरासत में पाया है, उनके बारे में नये सिरे से विचार करना भी है, ताकि वे हमारे विवेक और संवेदन के अनुरूप हों।

"आध्यात्मिक राह पर चलना एक गूढ़ विरोधाभास को स्वीकार करना है कि जबकि हम इस सफ़र में अनोखे, भौतिक प्राणी हैं, लेकिन साथ ही हम एक-दूसरे से पूर्णतया जुड़े हुए भी हैं, उसी असीम शक्ति द्वारा चालित और पोषित हैं, जो एक तारे में, एक फूल की पंखुड़ी में, एक भेड़िये के विलाप में बसती है।

"आध्यात्मिक राह पर चलने के लिए, गलत मोड़ ले लेने पर, दूसरे को रास्ता न देने पर, या दूसरों के प्रभाव में आकर चलने पर, अपने आपको माफ़ कर पाना ज़रूरी है। ये छोटी और माफ़ कर देने लायक गलतियां है। इस रास्ते के ज़यादा ज़रूरी नियम हैं, सचेत रहना, राह से भटकने की ओर ध्यान देना, और जल्दी से जल्दी राह पर वापिस लौट आना।

"हम सब अपने अंदर की ओर जाने की इस यात्रा के लिए एक नक़्शे का इस्तेमाल कर सकते हैं, भीड़ से भरे आम रास्ते से हट कर, जीवन का असली अर्थ खोज पाने के शांत पथ पर जाने का तरीका; एक चेतावनी कि मंज़िल नहीं, बल्कि यह यात्रा है जो ज़यादा महत्त्वपूर्ण है। चौदहवीं शताब्दी की इटली-वासी संत कॅथ्रीन ऑफ़ सिएना ने एक बार लिखा था, "स्वर्ग जाने का सारा रास्ता स्वर्ग ही है," शायद यह नक्शा ही काफी है - यह एक नितांत वाक्य ही हमारे चलते रहने के लिए काफी है, हमें याद दिलाता हुआ कि हमारी गरदन के पीछे जो हवा हमें महसूस हो रही है, वह और कुछ नही बस ईश्वर का श्वास ही है।

जैन फिलिप्स , "अपने आध्यात्मिक पथ पर चढ़ने का रास्ता: आनंद और कायाकल्प का नक्शा " से

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आध्यात्मिक पथ पर चलने से आप क्या समझते हैं? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बांटना चाहेंगे जब आपको अपनी गरदन के पीछे छूने वाली हवा बहुत खास महसूस हुई हो? आप हर अनुभव में क्या ख़ास है, यह देखने की क्षमता को कैसे विकसित कर सकते हैं?


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