Emotions for Liberation

Author
Sally Kempton
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Image of the Weekमुक्ति के लिए भावनाओं का उपयोग
-सैली केमप्टन (30 जुलाई, २०१३)

बहुत साल पहले, एक बार मैं अपने गुरुजी के आश्रम की रसोई में पहुँच गया, और उन्हें रसोइयों पर चिल्लाते पाया। कमरे के चारों ओर कूदती-फांदती क्रोध की लहरों की शक्ति सामान्य आंखों को भी दिखाई दे रही थी. फिर वाक्य के बीच, उन्होंने पलट कर देखा और हमें वहां खड़ा देखकर, वे मुस्कुरा पड़े. उनकी गुस्से से भरी आँखें तुरंत मुलायम पड़ गयीं। "आपको यह शो कैसा लगा?" उन्होंने पूछा। फिर वे हंसते हुए मज़ाक में हैड रसोइये की पीठ पर हाथ मारते हुए वहां से चले गए. उस दोपहर में जो ऊर्जा गुरूजी ने पैदा कर दी थी, उससे उत्तेजित होकर रसोइये हँसते हुए फिर अपने काम में लग गए.

उस क्षण ने भावनाओं के बारे में मेरी समझ को बदल दिया. जिस सफाई और आसानी से उन्होंने इतने तेज़ गुस्से को मज़ाक में बदल दिया, वह मेरी इस नयी समझ का केवल एक हिस्सा था. मुझे अधिक दिलचस्प बात तो यह लगी कि वे अपने गुस्से को भी कोई सीख देने के माध्यम की तरह इस्तेमाल कर रहे थे. क्या वे असल में नाराज़ थे? मुझे मालूम नहीं. मुझे सिर्फ इतना पता है कि वे अपने क्रोध की लहर के चढ़ाव से बिना कोई निशान पीछे छोड़े कितनी आसानी से नीचे उतर आये.

भावनाओं से वैराग्य (detachment) योगिक स्वतंत्रता का एक उद्देश्य है. असल में मूल बात यह है कि उच्च श्रेणी का योगी वो है जिसने अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर लिया है, जो उनसे परे हो चुका है या जो कम से कम अपनी भावनाओं को एक अनासक्त दर्शक की तरह देख सकता है. लेकिन असल वैराग्य कैसा होता है, यह इतना कम देखने को मिलता है कि हम योगिक वैराग्य को गंभीरता, भावहीनता या बेरुखापन समझने लगते हैं.

मेरे गुरु कुछ एकदम अलग ही चीज़ सिखा रहे थे. जैसा मैंने उस समय पाया, वो हमें एक तरह से भावनाओं से स्वतन्त्र होने का तरीका दिखा रहे थे. इस तरीके से वो अपनी भावनाओं की अभ्व्यक्ति को इस तरह इस्तेमाल कर रहे थे जैसे कोई कलाकार या एक्टर तरह-तरह की भावनाओं को देखने वालों को प्रेरित करने के लिए, या अपने आसपास की स्थिति में बदलाव लाने के लिए इस्तेमाल करता है. भेद सिर्फ इतना था कि वो उन भावनाओं से सचेत अवस्था में गुजर रहे थे.

अधिकतर लोग मानते हैं कि एक अच्छा आध्यात्मिक साधक कभी भी अपनी भावनाओं के वेग में बह नहीं जाएगा, कम से कम नकारात्मक (Negative) भावनाओं के वेग में तो नहीं।

फिर भी गहन सच्चाई तो यह है कि आध्यात्मिक साधना नकारात्मक (Negative) भावनाओं को खत्म नहीं कर देगी। भावनाएँ जीवन के विस्तार का अंग हैं, चेतना के बहाव का हिस्सा। न तो आप उनसे छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि अगर आपने उनसे छुटकारा पा लिया तो आप अपने अंदर खालीपन और अभाव का अनुभव करेंगे। आध्यात्मिक साधना भावनाओं से आपके सम्बन्ध को बदल सकती है, ताकि किसी खास किस्म की भावनाओं में फंस जाने की बजाय, आप उन्हें समझ सकते हैं, उन्हें रोक सकते हैं, उन्हें ठीक से पहचान सकते हैं, और अंत में आप उन भावनाओं को अपनी मुक्ति की प्राप्ति के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.


- सैली केमप्टन (मुक्ति के लिए भावनाओं उपयोग से)

चितन के लिए बीज प्रश्न: भावनाओं को अपनी मुक्ति की प्राप्ति के लिए इस्तेमाल करने से आप क्या समझते हैं? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बताना चाहेंगे जो चेतन भावनाएं देखता हो? हम भावनाओं में स्वतंत्रता को खोजने के लिए खुद को कैसे विकसित कर सकते हैं?


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