What Do I Really Need Right Now?

Author
Sharon Salzberg
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Image of the Weekमुझे वास्तव में इस समय क्या चाहिए?
- शैरन सैल्स्बर्ग ( १३ अगस्त, २०१३)

हम अपने आप से एक अहम प्रश्न पूछ सकते हैं, "खुश होने के लिए मुझे वास्तव में इस समय क्या चाहिए, ठीक इसी पल में?" ये दुनिया इस सवाल के कई जवाब हमारे सामने रखती है: तुम्हें एक नई कार चाहिए और एक नया घर चाहिए और एक नया नाता चाहिए और. . . लेकिन क्या वास्तव में हमें ये सब चाहिए? 'मुझे इस समय किस चीज़ की कमी है? क्या मुझे खुश होने के लिए किसी चीज़ को बदलने की ज़रुरत है? मुझे वास्तव में क्या चाहिए?" ये महत्त्वपूर्ण प्रश्न है.

जब भी मैं किसी दक्षिणपूर्वी देश में साधना के लिए गयी हूँ वहां आमतौर पर मठों या साधना केन्द्रों में रहने का कोई खर्च नहीं होता, जहाँ सारा खाने का सामान दान में आता है. ज़्यादातर किसी समूह या परिवार, जो दर्शन के लिए आया, उनके द्वारा दिया दान. मुझे विश्वास है कि ये लोगों के समूह अपनी हैसियत के मुताबिक अच्छे से अच्छा सामान दान में देते हैं, लेकिन हर दिन वहां खाने में क्या दिया जाता है वो दान देने वाले के हालात के हिसाब से अलग-अलग होता है. किसी दिन किस्म-किस्म की चीज़ें और कमाल की दावत। किसी दिन बहुत कम और साधारण खाना, क्योंकि देने वाला वही देने की हिम्मत रखता था.

हर बार जब मैं डाइनिंग रूम में खाना खाने गयी और जिन लोगों ने उस दिन का खाना दान किया था, उनका चेहरा देखा, क्योंकि वे लोग आम-तौर पर वहाँ खाना बंटता देखने आते हैं. उनके चेहरे प्रकाशित लगते, इतने खुश कि उन्हें हमें खिलाने का मौका मिला, कुछ ऐसा दान करने का जिससे हमारा पेट भर सके. वे इस बात से इतने खुश लगते कि हम उनके दिए दान की वजह से साधना कर पाएँगे, सत्य की खोज कर पाएँगे, और अपने मन को साफ़ कर पाएँगे। उस पल में, जब वे कुछ दे पाने की क्षमता के लिए इस हद तक आभारी लगते तो मैं अपने आप से यह सवाल पूछती, "खुश रहने के लिए मुझे इस पल में किस चीज़ की ज़रुरत है?" मैंने पाया कि मेरे शरीर का पोषण उस खाने की बजाए उनके आनंद और संतुष्टि से अधिक हो रहा था.

दलाई लामा ने कहा है, "अगर तुम्हें स्वार्थी बनना है, तो समझदारी से स्वार्थी बनो." दूसरे शब्दों में, अगर हम अपने जीवन की ओर ध्यान से देखें तो हम पाएँगे कि हम बहुत अधिक समय खुशी को गलत जगहों और गलत तरीकों से खोजने में निकाल देते हैं. हम आनंद पाने के लिए उत्सुक हैं और यह ठीक भी है. यह वाजिब है; हर प्राणी आनंद चाहता है. समस्या इस लालसा या उत्सुकता में नहीं है, बल्कि हमारे अज्ञान में है. आमतौर पर हमें मालूम नहीं होता कि आनंद हमें कहाँ मिलेगा - यानि सच्चा और खरा आनंद, स्थायी आनंद - और इसलिए हम छटपटाते रहते हैं, और हम खुद दुःख पाते हैं और औरों को भी दुःख देते हैं.

जैसे-जैसे मैं अपने जीवन की इस यात्रा में तरह-तरह की भावनाओं और अनुभवों से गुज़र रही हूँ - खुशी, आश्चर्य, झुंझलाहट, निराशा - इस प्रश्न को मैं मशाल की तरह अपना मार्ग दर्शक मानती हूँ: "खुश रहने के लिए मुझे इस पल में किस चीज़ की ज़रुरत है?" और जिस जवाब पर मैं बार-बार पहुँचती हूँ वो यह है कि प्यार, सम्बन्ध, और दया जैसे गहरे और असीम गुण ही मुझे असल में किसी स्थायी किस्म का आनंद दे पाएंगे।"

शैरन सैल्स्बर्ग, "द काइंडनेस हैंडबुक; ए प्रेक्टिकल कम्पैनियन"

विचार के लिए कुछ बीज सवाल: आपको इसी वक्त खुश रहने के लिए किस चीज़ की ज़रुरत है? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आपको सच्ची और वास्तविक स्थायी खुशी महसूस हुई हो? हम यह कैसे जान सकते हैं कि हम सही जगह और सही तरीके से खुशी की तलाश कर रहे हैं?


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