Bridging The Spiritual and Mundane

Author
Bhikkhu Bodhi
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Image of the Weekआध्यात्म और संसार को जोड़ना

- भीखू बोधि

में अब जब हमारी परिस्थितियो को देखता हु तो एसे तिन मुख्य क्षेत्र दीखते है जिसमे मानवीय ज़िन्दगी हिस्सा लेती है| एक को में कहेता हु उत्तम क्षेत्र, जो शास्त्रीय अध्यात्मिका के लिए आकांक्षा का क्षेत्र है| दूसरा सामाजिक क्षेत्र है जो की हमारे पारस्परिक सबंध एवं राजकीय, सामाजिक और आर्थिक संस्थानों को शामिल करता है| और तीसरा है प्राकृतिक क्षेत्र, जो हमारे शरीर, अन्य संवेदनशील चीज़े और प्राकृतिक पर्यावरण को शामिल करता है| मेरे अभी के खयाल से वो अध्यात्म जो की श्रेष्ठता को विशेष अधिकार देता है और सामाजिक एवं प्राकृतिक क्षेत्र का अवमूल्यन करता है वो हमारी मोजुदा जरूरियातो के लिए पर्याप्त नहीं है|

इस तरह की निति हमारे कार्य को विभाजित करने के लिए प्रेरित करती है और हमारे भविष्य को जोखम में डालती है | एक ओर अध्यात्म का लक्ष्य अध्यात्मिक गुरुओ के पास से हासिल होता है जो की ध्यानी, रहस्मयी ओर योगी होते है, जो दुसरो को वो खुद जहा है वहां तक पहुचने का मार्गदर्शन देकर दुनिया में श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए प्रेरणा देते है | दूसरी ओर मानवता का भविष्य पूरी तरह से राजकीय नेता, विकास के महारथी, तकनिकी जानकार ओर कोर्पोरेट दिग्गजों के पास है, जो की पुरी तरह से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, गलत व्यावहारिकता ओर तकनिकी जानकारी की सुरंग द्रष्टि से चलते है| यह विभाजन धार्मिक कट्टरपंथियों के लिए हमारे सांप्रदायिक संस्थाओ पर प्रभाव के दरवाजे खोलता है|

जिस तरह से में देखता हु, हमें उस तरह के आध्यात्म की जरुरत है जो मानवीय जीवन के तीनो क्षेत्र को जोड़ सके| इसके लिए एक नया पथ तैयार करना पड़ेगा| अध्यात्म तक पहुचने की आकांक्षा पुराने ज़माने से अब तक चड़ते क्रम में चली आई है| वह अंधकार से प्रवेश की ओर, शर्त से बिना शर्त की ओर एवं मृत्यु से अमर बनाने तक ले जाती है| मेरे खयाल से आज का हमारा लक्ष्य इस आगे बढती अध्यात्मता को साथ में ले के कुछ नयी सोच की ओर बढ़ना है| हमें प्रेम को अध्यात्मिक उचाईओ से थोडा नीचे लाकर एक सामान्य जीवन की घाटियों तक पहुचाना है|

इन दोनों में से किसी को उपेक्षित नहीं किया जा सकता, लेकिन हमारे भविष्य पर आने वाला तूफान हमें आध्यात्म के इस नए सोच के तरीके पर विशेष ध्यान देने के लिए कहेता है | प्रेम की प्रेरणा की तहत, हमें श्रेष्ठ आध्यात्म से प्राप्त हुए प्रकाश ओर ज्ञान को इस दुनिया में वापस लाकर सामाजिक ओर प्राकृतिक क्षेत्र को पाप से छुड़ाना होगा| अधिक रूप से यह इस बात पे ज्यादा जोर देता है की सामाजिक क्षेत्र में हम शासन में न्याय, समानता एवं दया का उपयोग करे| सामाजिक ओर आर्थिक नीतिया इस बात पर निर्भर होनी चाहिए की सभी लोगो को शांति से रहेने का अधिकार एवं प्रयाप्त खाना, पानी, चिकित्सा ओर घर मीले ओर अपनी क्षमता को पुरा करने का अवसर मीले| प्राकृतिक क्षेत्र में हमें इस विश्व को आश्चर्य, श्रद्धा ओर सन्मान से देखना सीखना चाहिए| हमें दुसरो को प्रेम ओर करुणा देना, ओर प्रकृति अपनी स्वयं सर्जन की क्षमता को बरक़रार रखे एसे प्रयत्न करने चाहिए|

अर्थात, हमारी चुनोती ये है की यह दुनिया प्रकृति, पर्यावरण एवं हर एक जीव के लिए रहने लायक हो| इस चुनोती का सामना करने के लिए हमारे पास अध्यात्मिक परंपराओ से बहेतर कोई मार्ग नहीं है लेकिन हमें उसमे से आसपास के लोगो के साथ एवं प्रकृति के साथ के हमारे रिश्ते को बहेतर बनाने की क्षमता को बहार लाना चाहिए| आगे का कार्य किसी भी तरह से आसान नहीं है, जिन लोको को मोजुदा परिस्थिति से लाभ हो रहा है उन लोगो से प्रतिरोध आने की पुरी उमीद है| हालाकि मुझे ये विश्वास है की कोशल्य के सही संयोजन से हम यह कर पाएंगे| मेरे विचार में हमें अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपने अध्यात्मिक विरासत के ज्ञान और सामाजिक कार्यकर्ता के जूनून को एक साथ लाना चाहिए| जब यह दोनों एक होंगे तब ही ज्ञान ओर प्रेम दोनों प्रेरित होकर सामाजिक बदलाव ला पाएंगे| ओर जब सामाजिक चेतना सत्य की ओर बढती है - तब हम हमारी संस्थाए ओर नीतिया इस तरह बना सकते है की इस नाजुक लेकिन सुन्दर पृथ्वी पर मनुष्य का साहसिक कार्य आगे बढ़ता रहे |

भीखू बोधि - आध्यात्म और संसार को जोड़ना से


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