दुनिया के दर्द को आतिथ्य प्रदान करना , थॉमस हुब्ल द्वारा
जब हम सामूहिक पीड़ा और आघात को देखने और उसके उपचार की प्रक्रिया में उतरना शुरू करते हैं, तब हमें उन आत्माओं का आभास होता है , जो ज्यादातर हिंसक परिस्थितियों में इस दुनिया से चली गईं थी । उनका बोझ समाज की चेतना में तब तक बना रहता है जब तक हम जीवित लोग उन अन्यायों को पुनः स्वीकार कर, उन्हें अपनी जिम्मेदारी न मान ले, ताकि वे आत्माएँ शांति पा सकें । परंतु अक्सर समाज इस सामूहिक दर्द से आँखें चुराता है, और उससे उसके उपचार और एकीकरण का मार्ग अटक जाता है। दर्द से मुँह मोड़ने का अर्थ है कि हम एक-दूसरे के साथ सच्चे रूप से उपस्थित नहीं हो सकते हैं —और हम समय और स्थान में बिखरे हुए हैं।
जब हम इंसान वर्तमान में ,और उस भूतकाल में, जिसका समाधान निकलना रह गया था, पूर्णतः उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तब हमारा मन भविष्य में उलझ जाता है। हम भविष्य की किसी सुंदर दुनिया को देखने एवं बनाने की कल्पना में खो जाते हैं क्योंकि आज की वास्तविकता के साथ रहना हमें कठिन लगता है। यह हमारी एक स्वाभाविक रक्षा-प्रक्रिया है, जिससे हम भूतकाल के दर्द को देखने एवं उसे सही से हमें बचाता हैं। परंतु यदि हम सचेत होकर इस पीड़ा का सामना नहीं करते हैं , तो हम भीतर से टूटे रहेंगे और बार-बार वही घाव जीवित हो उठेंगे। बेहतर दुनिया की रचना का मार्ग यही है कि हम इसे यहीं और अभी गढ़ें। हमें आज से ही उस दुनिया को बनाना शुरू करना चाहिए जिसमें हम जीना चाहते हैं, सिर्फ़ यह सोचकर इंतज़ार नहीं करना चाहिए कि वह कल अपने आप बन जाएगी।
एक आहत और घायल दुनिया में मुक्ति अक्सर आगे टल जाती है। भविष्य की ओर देखना दरअसल वर्तमान में अनुपस्थिति का प्रतीक है जहाँ पूर्व की पीड़ा को वर्त्तमान में स्वीकार कर वास्तविक भविष्य का वरदान पा सकें | उस भविष्य को जिसे हम सब मिलकर वर्त्तमान एवं इस क्षण की गहराई में उत्तार सकते हैं । सच्चा परिवर्तन एवं अविष्कार वाली खोज हमेशा वर्त्तमान में होती है ।
मनन के लिए बीज प्रश्न: आपके लिए इस विचार का क्या अर्थ है कि हमें अतीत के अन्यायों को पुनः स्वीकार करना होगा, ताकि उसके पीड़ितों और वर्त्तमान के जीवितों—दोनों के लिए शांति और उपचार संभव हो सके?क्या आपके जीवन की कोई निजी कहानी साझा कर सकते हैं जब आगे बढ़ने और वर्तमान को पूरी तरह जीने के लिए आपको अतीत के दर्द का सामना करना पड़ा हो? जब भविष्य की संभावनाओं का आकर्षण बहुत प्रबल हो जाता है, तब आपको वर्तमान क्षण में स्थिर रहने में क्या सहारा देता है?
Excerpted from here.
SEED QUESTIONS FOR REFLECTION: What do you make of the notion that we must re-own past transgressions to allow healing and peace for those who suffered and for the living? Can you share a personal story of a time you felt the need to confront past pain in order to be truly present and move forward? What helps you remain grounded in the present moment, especially when the allure of future possibilities seems overwhelming?