Three Kinds of Laziness

Author
Tenzin Palmo
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Image of the Weekतीन प्रकार के आलस्य
--तेनज़िन पामो द्वारा लिखित (१६ मार्च, २०१६)

महात्मा बुद्ध ने तीन प्रकार के आलस्यों का वर्णन किया। पहला आलस्य वो है जिसके बारे में हम सभी जानते हैं: हम कुछ भी नहीं करना चाहते, और हम चाहते हैं कि आधा घंटा जल्दी उठने और ध्यान करने की बजाए हम बिस्तर में ही पड़े रहें। दूसरा आलस्य है अपने आप को अयोग्य महसूस करना, यह सोचने का आलस्य कि, ”मैं यह नहीं कर सकता। अन्य लोग ध्यान कर सकते हैं, अन्य लोग सचेत रह सकते हैं, अन्य लोग दयालु हो सकते हैं और कठिन परिस्थितियों में उदार हो सकते हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता, क्योंकि मैं मूर्ख हूँ।" या, इसकी बजाए, “मैं हमेशा नाराज रहने वाला व्यक्ति हूँ;" "मैं अपने जीवन में कुछ भी करने में समर्थ नहीं रहा हूँ;” "मैं हमेशा असफल रहा हूँ, और मेरा विफल होना पक्का है।” यह आलस्य है।

आलस्य का तीसरा प्रकार है सांसारिक बातों में व्यस्त रहना। हम अपने समय के खालीपन को हरदम व्यस्त रहकर भर सकते हैं। यहां तक ​​कि व्यस्त रहना हमें नेक इंसान होने का अहसास तक दे सकता है। लेकिन आमतौर पर यह सिर्फ खुद से भागने का एक तरीका है। जब मैं गुफा से बाहर आयी, तो कुछ लोगों ने कहा, "क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि एकांत चीज़ों से भागने का एक तरीका है?" और मैंने कहा, "किस चीज़ से भागने का?" वहाँ मैं अकेली थी - न कोई रेडियो, न कोई समाचार पत्र, और न ही कोई बात करने के लिए। मैं भाग कर कहाँ जा सकती थी? जब कुछ मन में उठा, मैं किसी मित्र को फोन भी नहीं कर सकती थी। मैं जो थी या जो नहीं थी, उससे मेरा आमना-सामना हो गया। भागने का कोई रास्ता नहीं था।

हमारे सामान्य जीवन इतने व्यस्त हैं, हमारे दिन इतने व्यस्त है, लेकिन हमारे पास एक मिनट के लिए शांति से बैठने का समय कभी नहीं होता। वो भागना है। मेरी एक आंटी हमेशा रेडियो या टेलीविजन चालू रखती थीं। चुप्पी उन्हें परेशान करती थी। पृष्टभूमि में हमेशा आवाज़ होती रहती थी। और हम सब ऐसे ही हैं। हम चुप्पी से डरते हैं - बाहरी चुप्पी, आंतरिक चुप्पी। जब बाहर कोई शोर नहीं हो रहा होता तो हम खुद से बात करते हैं - सोच और विचार और निर्णय और जो पिछले दिन हुआ या जो बचपन में हुआ, उसको नए रूप से सोचना; उसने मुझसे क्या कहा, मैंने उसे क्या कहा। हमारी कल्पनाएँ, हमारे ख्याली पुलाव, हमारी उम्मीदें, हमारी चिंताएं, हमारे संदेह । कहीं शांति नहीं है। हमारी बाहरी शोरभरी दुनिया मात्र हमारे अंदर के शोर का प्रतिबिंब है: लगातार व्यस्त रहने की, कुछ करने रहने की हमारी ज़रूरत है।

हाल ही में मैं एक बहुत भले ऑस्ट्रेलियाई भिक्षु से बात कर रही थी जो एक समय पर इतनी अद्भुत धार्मिक गतिविधियों में लगे हुए थे कि उन्हें काम करने की लत लग गयी। वो सुबह के दो या तीन बजे तक जगे रहते। आखिरकार वो पूरी तरह से ध्वस्त हो गए। [...]

उनकी समस्या यह थी कि उनकी पहचान उनके काम से जुड़ी हुई थी। क्योंकि उनका काम धर्म से जुड़ा था, तो वो बहुत नेक लगता था। ऐसा लगता था कि वो बहुत अच्छे काम कर रहे थे। वो बहुत से लोगों का भला कर रहे थे और अपने गुरु की आज्ञा का पालन कर रहे थे, लेकिन क्योंकि अब वो कुछ नहीं कर सकते, तो वो कौन हैं? और इसलिए वे एक जबरदस्त संकट से गुजर रहे हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा अपनी पहचान अपने काम से और अपनी सफलता से जोड़ कर रखी। अब वे कुछ भी करने में सक्षम नहीं है और दूसरों पर निर्भर है। तो मैंने उनसे कहा, "लेकिन यह एक अद्भुत अवसर है। अब आप को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है, आप केवल अपने आप की तरह जी सकते हैं।” उन्होंने कहा कि वह उस जगह पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ भी न करना, केवल वहां बैठे रहना, और वो जो हैं उससे संतुष्ट होना, न कि जो वो करते हैं, इस सबसे उन्हें डर लगता है।

इसका यही अर्थ है - हम अपना जीवन विभिन्न गतिविधियों से भर लेते हैं। उनमें से कई बहुत अच्छे काम हैं लेकिन अगर हम ध्यान नहीं रखेंगे, तो वो अपने से दूर भागने का एक साधन बन जाएंगे। मैं यह नहीं कहती कि आपको अच्छे काम और ज़रूरी चीज़ें नहीं करनी चाहिऐं, लेकिन उसके साथ-साथ श्वास-प्रश्वास भी चलना चाहिए। हमें सक्रियता और मननशीलता दोनों की आवश्यकता है। हमें केवल खुद के साथ समय बिताने, और असल में केंद्रित हो पाने की ज़रूरत है, जहाँ मन केवल निःशब्द रह सकता है।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: आप इस बात से क्या समझते है कि स्थिरता के लिए जगह न ढूँढ पाना, अपने से भागने का तरीका है? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आपने निःशब्दता की ज़रूरत महसूस की हो? कौनसी साधना आपको असल में केंद्रित होने में मदद करती है?

तेनज़िन पामो द्वारा लिखित पुस्तक, “इनसाइड दी हार्ट ऑफ़ लाइफ (जीवन के हृदय के भीतर)”, से उद्धृत।











 

by Tenzin Palmo, excerpted from her book, Into the Heart of Life.


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