How to Live If You're Going to Die

Author
Blanche Hartman
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अगर आप मरने वाले हैं, तो कैसे जियें

-- ब्लांश हार्टमैन (१४ दिसंबर, २०१६)

मुझे एक फोन आया कि मेरी एक प्रिय दोस्त, जिसने सालों पहले जब मैं ग्रीन गल्च में रहती थी, मुझसे धर्मादेश प्राप्त किये थे, मरने वाली थी। मैंने उसके पति के साथ व्यवस्था की कि मैं जाऊं, उसको मिलूं और उसे फ़िर से धर्मादेश दूँ। इस जन्म और मृत्यु के मामले में एक चीज़ जो मुझे सार्थक लगी है - जैसे मेरी मृत्यु के मामले में - वो है मृत्यु को एक महान जिज्ञासा के साथ मिलना। वह क्या है? हमें मालुम नहीं। हम समय से पहले नहीं जान सकते। क्या हम उसके लिए उपस्थित रह सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि जन्म और मृत्यु का यह महान रहस्य क्या है? जब मैं अपनी दोस्त जेनी से मिलने गयी, मैंने उससे कहा, "तो, जेनी, ऐसा लगता है कि तुम पीट और मुझसे पहले इस महान रहस्य के बारे में जानने वाली हो।" वह अस्पताल के कमरे के बिस्तर पर थी, लेकिन वह कूद कर उठ गई और अपनी बांहें मेरी मेरी गर्दन में लपेट कर बोली, "ब्लांश! यह सब प्यार और ख़ुशी की बात है!" यह उसके मरने से एक सप्ताह से भी कम पहले की बात है। और इसलिए, जेनी, मैं तुम्हें धन्यवाद देती हूं, इस सीख के लिए। यह सब प्यार और खुशी की ही बात है। जैसे -२ मेरी उम्र बढ़ रही है, मैं जानती हूँ कि मैं अपने आपको यह कल्पना करते हुए पाती हूँ कि क्या मैं अपनी खुद की मृत्युशय्या पर ऐसी बात कह सकती थी, लेकिन निश्चित रूप से यह वो चीज़ है जिसके बारे में, जैसे-जैसे मैं अपनी मृत्युशय्या के करीब पहुंच रही हूँ, मैं बात करती आ रही हूँ। वो प्यार और खुशी वास्तव में यहीं है और हमारे लिए उपलब्ध है, अगर हम उनके लिए अपने मन को खोल दें। [...]

मैंने साधना करनी इसलिए शुरू की क्योंकि मुझे पता चला कि मैं मरने वाली हूँ - मैं, खुद। बस मैंने यह पहले कभी सोचा नहीं था, लेकिन फ़िर मेरी सबसे अच्छी दोस्त, जो मेरी उम्र की थी और जिसके बच्चे मेरे बच्चों की उम्र के थे, उसे एक रात सिर में दर्द हुआ जब हम एक साथ थे। वह इतना बुरा सिर दर्द था कि वह अगली सुबह डॉक्टर के पास गयी। उसे एक निष्क्रिय मस्तिष्क ट्यूमर था, वो कोमा में चली गयी, और मर गयी। फटाफट! शायद पहले सिरदर्द के पूरे एक महीने बाद।

खैर, पैट की जगह वो मैं भी हो सकती थी। हे भगवान! मैं मर जाऊँगी। लेकिन अगला विचार था, "अगर आपको मालूम हो कि आप मरने वाले हैं, तो आप कैसे जियें?” यह मेरे लिए एक उपहार है कि यह सवाल मेरे सामने आया। और इसलिए मैंने खोजना शुरू किया कि कौन मुझे बता यह सकता कि अगर मुझे मालुम है कि मैं मरने वाली हूँ तो मैं कैसे जिऊँ? और मैं जानती हूँ कि मैं पक्का मरने वाली हूँ। तो मैं बस आपको बुद्ध के उपझान सूत्र से पांच दैनिक अनुस्मरण बताती हूँ:


मैं बूढ़े हो जाने की प्रकृति का हूँ। बढ़ती उम्र से बचने का कोई रास्ता नहीं है।

मैं अस्वस्थ हो जाने की प्रकृति का हूँ। अस्वस्थ होने से बचने कोई रास्ता नहीं है।

मैं मर जाने की प्रकृति का हूं। मौत से बचने का कोई रास्ता नहीं है।

मुझे जो सब प्रिय है और वो सब जो मेरे पास है और हर जिस चीज़ को मैं प्यार करता हूँ, वो बदलने की प्रकृति के हैं। उन्हें खोने से बचाने का कोई रास्ता नहीं है।

मेरे कर्म ही मेरी असली संपत्ति हैं। मैं अपने कर्मों के फल से बच नहीं सकता। मेरे कर्म ही वो ज़मीन हैं जिस पर मैं खड़ा हूँ।

ये पांच दैनिक अनुस्मरण, मेरे लिए, ऐसे प्रतीत होते हैं , कि अगर आपको मालूम हो कि आप मरने ही वाले हैं तो आप कैसे जिएं ये उस और संकेत करते हैं। आप कैसे जीते हैं इस बात पर ध्यान दें। अपने कामों पर ध्यान दें। क्या आपके काम उदार हैं? क्या आपके काम निष्कपट हैं? क्या आपके काम प्राणियों की भलाई करने, प्राणियों को लाभ पहुंचाने की कामना पर आधारित हैं। क्या आपके काम स्वार्थी हैं या उदार हैं? आप यह जीवन कैसे जी रहे हैं?

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न:पांच दैनिक अनुस्मरण आप में क्या जगाते हैं? क्या आप कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँट सकते हैं जब आपको बहुत निजी और अंतरंग तरीके से मौत का आभास हुआ हो? अपने कामों पर ध्यान देने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है?

ज़ेनके ब्लांश हार्टमैन सैन फ्रांसिस्को ज़ेन केंद्र की पहली महिला मठाधीश थीं, और शुनरयु सुजुकी के वंशावली में साधना कर रही थीं।
 

Zenkei Blanche Hartman was the first woman abbot of the San Francisco Zen Center, practicing in the lineage of Shunryu Suzuki.


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