Be with the Magic

Author
Steve Karlin
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जादू के साथ रहो
- स्टीव कार्लिन (४ नवंबर, २०१५)

जब जानवर अपनी आँखों से देखते हैं तो वो नहीं देखते जो हम देखते हैं। उनमें से कुछ अल्ट्रावोइलेट किरणें देखते हैं, उनमें से कुछ सैंकड़ों गजों दूर तक बहुत सफाई से देख सकते हैं, कुछ अपने सिर से एक फुट से आगे नहीं देख सकते, कुछ रंग देख सकते हैं, कुछ रंग नहीं देख सकते। जब वो अपने कानों से सुनते हैं, जो वो सुनते हैं, वो जो हम सुनते हैं, उससे अलग है। जब वो चखते हैं, उनके स्वाद लेने की शक्ति हमसे अलग है। जब वो सूँघते हैं, उनमें से कुछ हमसे सौओं गुणा ज़्यादा अच्छा सूंघ सकते हैं, और कुछ बिलकुल भी नहीं सूंघ सकते। लेकिन मनुष्य रूप में हममें उन तक पहुंचने की क्षमता है और उनमें हम तक पहुंचने की क्षमता है और जब ये दोनों चीज़ें एक-दूसरे को छूती हैं, जब उस जंगली जानवर के अंदर का जीव और हमारे अंदर का जीव एक रिश्ते के लिए तरस रहा होता और एक-दूसरे को छूता है, वही जादू है। […]

अधिकांश समय हमारे बाहर असल में क्या हो रहा है, हम खुद को उसे देखने से रोक देते हैं। या फिर जो फिलटर हमने अपने अंदर लगा दिए हैं हम उन्हें इस्तेमाल करते हैं और हम जो देखते हैं वो केवल उसी चीज़ की छवि है जिसे हम वहां प्रकृति में देखना चाहते हैं। हमें ज़रूरत है स्थिर हो जाने की और उस शून्य बिंदु पर जाने की, अपने अंदर उस स्थिरता के स्थान पर जाने की जहां हम नाते बना सकते हैं और जहां हम समझ सकते हैं कि हमारे चारों ओर क्या हो रहा है। मैं सोचता हूँ कि मनुष्य होने के नाते हमारे लिए किसी न किसी तरीके का मननशीलता और ध्यान का अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे वो कैसा भी हो। यह अपने मन को साफ़ करने का एक अविश्वसनीय तरीका है जिससे आप किसी भी रिश्ते में वर्तमान पल में रह सकते हैं।

शायेन नामक एक भेड़िये ने ध्यान और सचेतता के अभ्यास को विकसित करने में मेरी बहुत मदद की। जबभी मैं उस भेड़िये के पिंजरे में होता, और मैं कुछ और सोचने लगता, तो तुरंत सेकिंडों के अंदर उस भेड़िये को पता चल जाता कि मैं पुरी तरह उसके साथ नहीं हूँ। जवाब में, वो अपना होंठ ऊपर की ओर कर लेती और मुझ पर गुर्राने लगती, जैसे मुझसे कह रही हो, “स्टीव, तुम अभी मेरे साथ हो। तुम यहीं रहो। दूसरी चीज़ों के बारे में मत सोचो। इस चीज़् से बाहर मत निकलो। तुम्हारे और मेरे बीच इस पल में जो जादू चल रहा है, उसके साथ रहो।” और उसकी वजह से इस पाठ ने मुझे यहाँ तक पहुंचा दिया क्योंकि उसके साथ, वह शारीरिक रूप से मुझे कह रही थी, “ध्यान करो, स्थिर रहो।”

ध्यान हमेशा बंद आँखों से ही नहीं होता, लोगों से दूर और हर चीज़ से दूर। इसमें से बहुत कुछ का उस से सम्बन्ध है जो तब होता है जब आपकी आँखें खुली होती हैं और आप इस दुनिया में चल-फ़िर रहे होते हैं। आप कौन हैं? क्या आप खुद के लिए इस दुनिया में हैं? क्या आप एक शहीद बनते जा रहे हैं? आप कौन हैं? क्या आप हर चीज़ को ऐसे मापदंड से माप रहे हैं जिसके बारे में आप को खुद पूरी तरह से पता नहीं? शायद आप जो है आप वही रह सकते हैं और जो आत्म-कथा आपने बना रखी है उसकी चिता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि हम सब के पास के इस बारे में कि हम कौन हैं, एक आत्म-कथा है लेकिन किसी भी कहानी की तरह हम उसे बदल सकते हैं। हमारे पास कलम की ताकत है, जो हमारी चेतना है। हममें अपनी खुद की कहानी फ़िर से लिखने की ताकत है, जो हमारा आंतरिक कार्य है। और अगर अधिक नही, वो भी उतना ही महत्तवपूर्ण है, जितना बाहरी कार्य। यह आपका मन साफ़ करने में बहुत सहायक है. और जब आप अंदर से साफ़ हो जाते हैं, तो ये जानवर आपकी ओर देखना चाहते हैं और वो आपसे आकर्षित होते हैं।

विचार के लिए कुछ मूल प्रश्न: इस पल में इस जादू के साथ रहने से आप क्या समझते हैं? क्या आप अपना कोई व्यक्तिगत अनुभव बाँटना चाहेंगे जब आप उस जादू के साथ थे? खुली आँख ध्यान करने में आपको किस चीज़ से मदद मिलती है?

स्टीव कार्लिन नेशनल पार्क सर्विस के भूतपूर्व रेंजर, प्रसिद्ध पर्यावरण शिक्षक, और पुरस्कार विजेता पर्यावरण पत्रकार हैं जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचार में रह चुके हैं। वो वाइल्ड लाइफ असोसिएट्स के संस्थापक है, जहाँ उन जानवरों को रखा जाता है जो जंगल में जीवित नहीं रह पाएंगे, और बदले में जिन्हें हमारे शिक्षक बनने का स्थान दिया जा रहा है।
 

Steve Karlin is a former National Park Service ranger, renowned environmental educator and award-winning environmental reporter who has appeared on local and national news. He is the founder of Wildlife Associates, where animals that cannot survive in the wild are cared for, and in turn given the space to become teachers.


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