“ बस, विलीन हो जाने को देखें “ ⁃ शिनज़ेन यंग के द्वारा।
मैं कौन-सी तकनीक को आत्मबोध (एनलाइटनमेंट) का सबसे तेज़ मार्ग चुनूँगा? यह प्रश्न मुझसे अक्सर पूछा जाता है। यह एक कठिन चुनाव है, लेकिन मुझे लगता है कि मैं उस तकनीक को चुनूँगा जिसे मैं “जस्ट नोट गॉन” (बस,‘विलीन’ होने को देखना) कहता हूँ।
हम सभी ने यह अनुभव किया है—कुत्ते का भौंकना, उसका भौंकना, और फिर भौंकना बंद होना। कोई हवाई जहाज़ ऊपर से गुजरता है—आप उसे सुनते हैं, सुनते हैं, उसकी आवाज़ धीमी होती जाती है, और फिर किसी क्षण वह हल्की हो कर पूरी तरह ग़ायब हो जाती है। [...] देर-सबेर, सभी इंद्रिय अनुभव लुप्त हो जाते हैं।
यह एक साधारण-सी बात लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह अत्यंत गहरी है। यदि आप उस क्षण को नोटिस करने लगें जब कोई चीज़ समाप्त होती है, तो वह आपका ध्यान किसी महत्वपूर्ण दिशा में ले जाती है। जहाँ चीज़ें शून्य में विलीन हो जाती हैं, वही स्थान है जहाँ से वे आरंभ में उत्पन्न होती हैं। हर बार जब आप किसी ‘विलीन होने’ को देखते हैं, तब क्षणभर के लिए आपका ध्यान उस ओर जाता है जिसे चेतना का सबसे गहरा स्तर कहा जा सकता है।
‘गॉन’ (विलीन होने) की समृद्धि का पहला स्वाद शायद यह हो सकता है कि असुविधा या पीड़ा के समय यह आपको राहत देता है। फिर अगला स्वाद यह हो सकता है कि आप यह नोटिस करें कि हर शून्यता के क्षण से एक प्रकार की शांति फैलती है। लेकिन जैसे-जैसे ‘गॉन’ के प्रति आपकी संवेदनशीलता बढ़ती है, कुछ ऐसी बातें स्पष्ट होने लगती हैं जो तर्क की दृष्टि से बिल्कुल भी समझ में नहीं आतीं, फिर भी वे इस अनुभव का अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।
आप उस ‘विलीनता’ के साथ एक प्रकार की तृप्ति या पूर्णता का अनुभव करने लगते हैं। संस्कृत में एक ऐसा शब्द है जिसका अर्थ एक साथ ‘समाप्ति’ और ‘तृप्ति’ दोनों होता है—ऐसी तृप्ति मानो आपकी प्यास बुझ गई हो। दुनिया की किसी और भाषा में ये दोनों अवधारणाएँ एक ही शब्द में इस तरह जुड़ी नहीं हैं— शून्यता का भाव और संपूर्ण संतोष या पूर्णता का भाव। संस्कृत में वह शब्द है—निर्वाण।
‘गॉन’ से एक और बात भी उत्पन्न हो सकती है—और वह है प्रेम की भावना। यह बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं लगता, क्योंकि यह अनुभव इतना निरपेक्ष और शून्य-सा है। फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि मनुष्य के सर्वोत्तम गुण किसी ऐसी चीज़ के संपर्क से उत्पन्न हों जो पूरी तरह अमानवीय प्रतीत होती है? यह समझ में नहीं आता, लेकिन यही इसका तरीका है।
आत्मचिंतन के मूल प्रश्न : १- इस विचार के बारे में आप क्या सोचते हैं कि जब चीज़ें विलीन होती हैं, वह क्षण आपका ध्यान चेतना के सबसे गहरे स्तर की ओर ले जा सकता है? आप इसे अपने व्यक्तिगत अनुभवों से कैसे जोड़ते हैं? २- क्या आप अपने जीवन की कोई ऐसी घटना साझा कर सकते हैं जहाँ किसी इंद्रिय अनुभव के अंत ने आपको अप्रत्याशित शांति या तृप्ति का अनुभव कराया हो? ३- अपने दैनिक जीवन में ‘गॉन’ (विलीन) के क्षणों के प्रति जागरूकता विकसित करने में आपको क्या सहायता करता है, जिससे आपके भीतर गहरी तृप्ति और प्रेम का भाव विकसित हो सके?
Shinzen Young is a meditation teacher, and excerpt above is taken from his book 'Science of Enlightenment.'
Excerpted above from
here.
Seed Questions for Reflection
What do you make of the notion that the moment things vanish can direct your attention toward the deepest level of consciousness? Can you share a personal story of a time when your awareness of the end of a sensory experience brought you an unexpected sense of tranquility or fulfillment? What helps you cultivate an awareness of the 'gone-ing' moments in your daily life?