“हिंसा का अंत“
⁃ जे. कृष्णमूर्ति के द्वारा ,
हिंसा सिर्फ किसी की हत्या करना नहीं है। जब हम किसी को कठोर शब्द कहते हैं, किसी को तिरस्कार से दूर करते हैं, या डर के कारण किसी की बात मानते हैं—तो वह भी हिंसा है। इसलिए, हिंसा केवल धर्म, समाज या देश के नाम पर की गई संगठित हत्या नहीं है। वह उससे कहीं ज़्यादा गहरी और सूक्ष्म है। हम यहाँ उसी गहराई से हिंसा की प्रकृति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
जब आप स्वयं को भारतीय, मुस्लिम, ईसाई, या यूरोपीय कहते हैं, या कुछ और, तो आप हिंसक हो रहे होते हैं। क्या आप देख सकते हैं कि यह हिंसा क्यों है?(इसको हिंसा क्यों समझते है?) क्योंकि आप स्वयं को मानवता से अलग कर रहे होते हैं। जब आप अपनी धारणा(belief), राष्ट्रीयता या परंपरा के आधार पर अपने आप को अलग मानते हैं, तो वह हिंसा को जन्म देता है। इसलिए जो व्यक्ति हिंसा को समझना चाहता है, , वह किसी देश, धर्म, राजनीतिक पार्टी या किसी एक विचारधारा से जुड़ा नहीं होता।वह सम्पूर्ण मानवता को समझने में रुचि रखता है।
तो हिंसा के संबंध में दो प्राथमिक विचारधाराएँ हैं, एक जो कहती है, ‘हिंसा मनुष्य में जन्मजात होती है’ और दूसरी जो कहती है, ‘हिंसा उस सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का परिणाम है जिसमें मनुष्य रहता है।’ हमें इस बात से कोई परवाह नहीं है कि हम किस विचारधारा से संबंधित हैं, इसका कोई महत्व नहीं है। जो महत्वपूर्ण है वह यह तथ्य है कि हम हिंसक हैं, न कि इसका कारण।
हिंसा की सबसे आम अभिव्यक्तियों में से एक है क्रोध। जब मेरी पत्नी या बहन पर हमला होता है तो मैं कहता हूँ कि मैं उचित(सही) रूप से क्रोधित हूँ; जब मेरे देश पर, मेरे विचारों, मेरे सिद्धांतों, मेरे जीवन के तरीके पर हमला होता है, तो मैं उचित रूप से क्रोधित होता हूँ। मैं तब भी क्रोधित होता हूँ जब मेरी आदतों या मेरी छोटी-छोटी राय पर हमला होता है। जब आप मेरे पैरों पर पैर रखते हैं या मेरा अपमान करते हैं तो मुझे गुस्सा आता है, या अगर आप मेरी पत्नी के साथ भाग जाते हैं और मुझे जलन होती है, तो उस ईर्ष्या को उचित(सही) कहा जाता है क्योंकि वह मेरी संपत्ति है। और यह सारा गुस्सा नैतिक रूप से उचित है। लेकिन अपने देश के लिए हत्या करना भी उचित ठहराया जाता है। तो जब हम क्रोध के बारे में बात करते हैं, जो हिंसा का एक हिस्सा है, तो क्या हम क्रोध को अपने स्वयं के झुकाव और सामाजिक प्रभाव के अनुसार धर्मसंगत और अधर्मसंगत क्रोध के संदर्भ में देखते हैं, या हम केवल क्रोध देखते हैं? क्या कभी उचित क्रोध होता है? या केवल क्रोध होता है? कोई अच्छा प्रभाव या बुरा प्रभाव नहीं होता, केवल प्रभाव होता है, लेकिन जब आप किसी ऐसी चीज से प्रभावित होते हैं जो मुझे पसंद नहीं है तो मैं इसे बुरा प्रभाव कहता हूं।
जैसे ही आप अपने परिवार, अपने देश, एक रंगीन कपड़े के टुकड़े जिसे झंडा कहते हैं, किसी विश्वास, विचार या सिद्धांत की रक्षा करते हैं — उस संरक्षण में ही क्रोध छिपा होता है।तो क्या आप क्रोध को बिना किसी स्पष्टीकरण या तर्क के देख सकते हैं? बिना यह कहे कि ‘मुझे अपनी चीज़ों की रक्षा करनी थी’, या ‘मुझे गुस्सा आना ठीक था’, या ‘मुझे गुस्सा नहीं करना चाहिए था’? क्या आप क्रोध को ऐसी जागरूकता से देख सकते हैं जैसे वह कोई अलग चीज़ हो — पूरी निष्पक्षता से, न उसे सही ठहराते हुए, न उसे गलत ठहराते हुए? क्या आप ऐसा कर सकते हैं?”
क्या मैं आपको देख सकता हूँ अगर मैं आपके प्रति विरोधी हूँ(आप से द्वेष रखता हु) या फिर मैं सोच रहा हूँ कि आप कितने शानदार व्यक्ति हैं?
मैं आपको तभी देख सकता हूँ जब मैं आपको एक खास तरह की सावधानी से देखता हूँ जिसमें इनमें से कोई भी बात शामिल नहीं होती।( न द्वेष न प्रशंसा) अब, क्या मैं उसी प्रकार से क्रोध को देख सकता हूँ, जिसका अर्थ है कि मैं इस समस्या के प्रति संवेदनशील रहूँ, उसका विरोध न करूँ, और इस असाधारण घटना को बिना किसी प्रतिक्रिया के देखता रहूँ?
तो आइए हम मूल प्रश्न पर लौटें, क्या यह संभव है कि हम अपने भीतर की हिंसा को समाप्त कर सकें? यह भी एक प्रकार की हिंसा है जब मैं कहता हूँ, तुमने अब तक परिवर्तन क्यों नहीं किया? मैं ऐसा नहीं कहता हूँ। मुझे आपको किसी बात पर राजी(convince) करना आवश्यक नहीं लगता। यह आपका जीवन है, मेरा नहीं। आप जैसे भी जीते हैं, वह आपका विषय है। मैं केवल यह पूछ रहा हूँ, क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति, जो किसी भी समाज में मानसिक रूप से जी रहा है, वह अपने भीतर की हिंसा को पूरी तरह से मिटा सके? यदि ऐसा संभव है, तो यह प्रक्रिया स्वयं में एक नया जीवन जीने का तरीका उत्पन्न करेगी।
मनन के लिए मूल प्रश्न
• आप इस विचार से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं कि जब हम खुद को किसी विश्वास, राष्ट्रीयता या परंपरा के आधार पर अलग करते हैं, तो वह विभाजन हिंसा को जन्म देता है?
• क्या आप अपने जीवन की कोई ऐसी घटना बता सकते हैं जहाँ आपने खुद में या अपने आसपास क्रोध को हिंसा के रूप में अनुभव किया हो या देखा हो ?
• आपको क्या मदद करता है कि आप क्रोध को पूरी तरह निष्पक्ष और जागरूक होकर देखें — न उसका बचाव करें, न उसकी निंदा — बल्कि उसे गहराई से समझने के लिए खुद को संवेदनशील बनाए रखें?
Seed Questions for Reflection
How do you relate to the notion that separating ourselves by belief, nationality, or tradition breeds violence? Can you share a personal story that illustrates a moment when you experienced or observed anger as an expression of violence in your own life or environment? What helps you look at anger completely objectively, neither defending it nor condemning it, and remain vulnerable to understanding it deeply?